बदरा जनपद में विकास कार्यों पर उठे सवाल, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग
संवाददाता :अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर/बदरा। जनपद पंचायत बदरा की ग्राम पंचायत बदरा में विकास कार्यों और विभिन्न मदों में किए गए कथित भुगतानों को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर पाइपलाइन, सफाई, निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और अन्य विकास कार्यों में खर्च की गई राशि तथा मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई देता है। इन आरोपों के बाद जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
भुगतान और निर्माण कार्यों पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार कुछ विकास कार्यों में भुगतान तो किए गए, लेकिन मौके पर कार्य की स्थिति और भुगतान की गई राशि के बीच कथित तौर पर समानता नहीं दिखाई देती। कुछ मामलों में पाइपलाइन बिछाने के बाद दोबारा खुदाई से जुड़े खर्च, सफाई कार्यों के भुगतान तथा निर्माण सामग्री की खरीदी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का भी मुद्दा उठाते हुए मौके पर भौतिक सत्यापन और तकनीकी मूल्यांकन कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के विकास कार्यों में खर्च होने वाली राशि जनता के हित से जुड़ी है, इसलिए प्रत्येक भुगतान और निर्माण कार्य की पारदर्शी जांच आवश्यक है।
जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल
कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आई शिकायतों में ग्राम पंचायत के सरपंच शिवभान सिंह, सचिव और अन्य संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि प्रथमदृष्टया अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच समिति गठित करने की मांग
ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतें सामने आने के बावजूद जनपद स्तर पर निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित कार्यों का स्थल निरीक्षण कराया जाए, पंचायत के अभिलेखों की जांच हो और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का भौतिक कार्यों से मिलान किया जाए।
उनका कहना है कि केवल कार्यालयीन रिकॉर्ड के आधार पर विकास कार्यों की स्थिति तय नहीं की जा सकती। मौके पर जाकर कार्य की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की जांच करना भी जरूरी है।
राजनीतिक दबाव की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता
कथित अनियमितताओं के बीच स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी प्रकार का दबाव नहीं है तो फिर शिकायतों पर निष्पक्ष जांच कराने में देरी क्यों हो रही है।
हालांकि किसी भी व्यक्ति या संगठन पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय नियमों के अनुसार जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
सीईओ की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों के भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और मौके पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो संबंधित अधिकारियों को जांच प्रक्रिया शुरू करानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि संदिग्ध भुगतानों और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनपद पंचायत और संबंधित कार्यालयों का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। किसी भी व्यक्ति, पद या राजनीतिक प्रभाव के कारण जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अब निष्पक्ष जांच का इंतजार
फिलहाल बदरा पंचायत में लगाए गए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप जांच का विषय हैं। आरोप सही हैं या गलत, इसका अंतिम निर्णय दस्तावेजों की जांच, स्थल निरीक्षण और संबंधित पक्षों का पक्ष सुनने के बाद ही संभव होगा।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए, ताकि जनता के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
अब निगाहें जनपद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं—क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी?
