छह दिन से डायलिसिस मशीन बंद, अनूपपुर जिला अस्पताल में मरीज परेशान; बार-बार खराबी पर उठे सवाल
महीने में दो-तीन बार तकनीकी खराबी का दावा, नया भवन तैयार होने के बावजूद शिफ्टिंग अटकी; मरम्मत और मेंटेनेंस खर्च की जांच की मांग
संवाददाता: अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में डायलिसिस सेवा पिछले करीब छह दिनों से प्रभावित होने की बात सामने आई है। डायलिसिस मशीन खराब होने के कारण नियमित उपचार पर निर्भर किडनी रोगियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि डायलिसिस में देरी उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि नियमित डायलिसिस उनकी चिकित्सा जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मशीन बंद होने के बाद कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों अथवा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में डायलिसिस कराने के लिए जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वहीं, दूर स्थानों पर जाने से समय और आवागमन की परेशानी भी बढ़ रही है।
छह दिन से मशीन खराब, मरीजों की बढ़ी चिंता
मरीजों के परिजनों के अनुसार डायलिसिस मशीन खराब हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सेवा सामान्य नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई मरीज नियमित अंतराल पर इसी उपचार पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे में मशीन के लंबे समय तक बंद रहने से मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ रही है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि मशीन को जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाए और जब तक मशीन ठीक नहीं होती, तब तक मरीजों के लिए वैकल्पिक डायलिसिस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बार-बार खराब होने की शिकायत, स्थायी समाधान पर सवाल
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि डायलिसिस यूनिट में तकनीकी खराबी कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार मशीन या यूनिट में महीने में दो-तीन बार खराबी सामने आने की स्थिति बनती है।
बार-बार खराबी की शिकायतों के बीच अब यूनिट की तकनीकी क्षमता, नियमित मेंटेनेंस और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि एक ही प्रकार की समस्या बार-बार सामने आती है तो केवल मरम्मत कराने के बजाय उसके स्थायी समाधान की दिशा में प्रयास होना चाहिए।
नए भवन में शिफ्टिंग भी बनी सवाल
डायलिसिस सेवा से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा यूनिट की नई जगह पर शिफ्टिंग का है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल परिसर में डायलिसिस यूनिट के लिए नया भवन तैयार किया जा चुका है। इसके बावजूद मौजूदा यूनिट को नए भवन में स्थानांतरित नहीं किया गया है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि नए भवन में डायलिसिस संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, तो यूनिट को वहां शिफ्ट करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए। उनका मानना है कि नए भवन में बेहतर स्थान, विद्युत व्यवस्था, पानी और उपकरणों के रखरखाव की सुविधाएं उपलब्ध होने से डायलिसिस सेवा को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, नए भवन में शिफ्टिंग में देरी के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
बार-बार मरम्मत खर्च की जांच की मांग
डायलिसिस मशीन में लगातार खराबी की शिकायतों के बीच अब इसके मरम्मत और मेंटेनेंस पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि मशीन बार-बार खराब हो रही है और हर बार उसकी मरम्मत कराई जा रही है तो पिछले वर्षों में हुए मरम्मत और रखरखाव खर्च की समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पिछले एक-दो वर्षों में डायलिसिस यूनिट की मशीनों पर हुए मरम्मत, मेंटेनेंस और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि मशीन में बार-बार किस प्रकार की तकनीकी खराबी आ रही है और उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पाया।
यह भी मांग की गई है कि यदि रिकॉर्ड में एक जैसी खराबी के लिए बार-बार मरम्मत या भुगतान का उल्लेख मिलता है, तो उसकी तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाए।
मरीजों की जिंदगी से जुड़ी है डायलिसिस सेवा
किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस सामान्य चिकित्सा सुविधा नहीं, बल्कि उपचार की महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों को निर्धारित चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अस्पताल में उपलब्ध डायलिसिस सेवा के बाधित होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद यदि उन्हें निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है तो परिवार पर अतिरिक्त खर्च आता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह परेशानी और गंभीर हो सकती है।
अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
मशीन के लंबे समय तक बंद रहने को लेकर मरीजों के परिजनों में अस्पताल प्रबंधन के प्रति नाराजगी भी सामने आई है। उनका कहना है कि ऐसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा में खराबी आने पर तत्काल तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर सेवा बहाल की जानी चाहिए।
परिजनों ने जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. परस्ते की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि डायलिसिस सेवा जैसी महत्वपूर्ण सुविधा के लिए स्थायी एवं वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
कलेक्टर ने कहा—‘मैं इसको दिखवाता हूं’
डायलिसिस मशीन के खराब होने और मरीजों की परेशानी के संबंध में जब अनूपपुर कलेक्टर रत्नाकर झा से जानकारी ली गई तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं इसको दिखवाता हूं।”
कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद अब मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करेगा और डायलिसिस सेवा को जल्द से जल्द बहाल कराया जाएगा।
तत्काल मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि डायलिसिस मशीन की तकनीकी खराबी को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाए। जब तक मशीन पूरी तरह ठीक नहीं होती, तब तक नियमित डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही यूनिट की बार-बार होने वाली खराबी का तकनीकी परीक्षण, नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था और नए भवन में शिफ्टिंग की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने की मांग की गई है।
अब नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन के संज्ञान में मामला आने के बाद डायलिसिस मशीन कितनी जल्दी चालू होती है और मरीजों को राहत कब मिलती है। साथ ही बार-बार खराबी की शिकायतों और मरम्मत खर्च की जांच को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।
