उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज का 43वां अवतरण दिवस सेवा कार्यों के साथ मनाया, जरूरतमंदों को कराया भोजन
Gwalior । परम पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज का 43वां अवतरण दिवस विहसंत महिला मंडल, आनंद नगर द्वारा श्रद्धा, उत्साह और सेवा भावना के साथ मनाया गया। अवतरण दिवस के अवसर पर महिला मंडल ने धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सरोकार को भी प्राथमिकता देते हुए हजार बिस्तर अस्पताल परिसर में मरीजों के अटेंडरों एवं जरूरतमंद लोगों को गर्म भोजन वितरित किया। इस सेवा कार्य में महिला मंडल की सदस्यों के साथ जैन समाज के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने भी सहभागिता की।
अवतरण दिवस के अवसर पर सुबह से ही आनंद नगर क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण रहा। महिला मंडल की सदस्यों ने परम पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर आध्यात्मिक मार्गदर्शन की कामना की। इसके बाद सेवा कार्य के रूप में अस्पताल पहुंचकर जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरण किया गया।
जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर किया भोजन वितरण
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के 43वें अवतरण दिवस को विशेष बनाने के उद्देश्य से विहसंत महिला मंडल द्वारा जरूरतमंदों की सेवा का निर्णय लिया गया। इसी भावना के साथ हजार बिस्तर अस्पताल में मरीजों के साथ रहने वाले अटेंडरों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तथा अन्य जरूरतमंदों को गर्म भोजन उपलब्ध कराया गया।
अस्पताल परिसर में भोजन वितरण के दौरान महिला मंडल की सदस्यों ने लोगों से आत्मीयता के साथ संवाद भी किया। मरीजों के परिजनों और जरूरतमंद लोगों ने भोजन प्राप्त किया। सेवा कार्य में शामिल सदस्यों ने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन उपलब्ध कराना मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। धार्मिक अवसरों पर इस तरह के कार्य समाज में सेवा, करुणा और परोपकार की भावना को मजबूत करते हैं।
महिला मंडल की ओर से भोजन वितरण की पूरी व्यवस्था व्यवस्थित रूप से की गई। गर्म भोजन तैयार कर अस्पताल परिसर में लाया गया और जरूरतमंदों को वितरित किया गया। इस दौरान सेवा कार्य में शामिल सदस्यों ने अनुशासन और स्वच्छता का भी ध्यान रखा।

सेवा को बनाया अवतरण दिवस का माध्यम
विहसंत महिला मंडल द्वारा अवतरण दिवस पर किए गए इस आयोजन का उद्देश्य केवल जन्मदिवस मनाना नहीं, बल्कि गुरु के संदेशों और सेवा भावना को समाज तक पहुंचाना भी रहा। जैन समाज में त्याग, संयम, करुणा और जीवदया की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए महिला मंडल ने जरूरतमंदों की सहायता को कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बनाया।
कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों के अवतरण दिवस पर समाज सेवा के कार्य किए जाने से आयोजन की सार्थकता और बढ़ जाती है। भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को तत्काल राहत मिलती है और समाज के अन्य लोगों को भी सेवा कार्यों के लिए प्रेरणा मिलती है।
महिला मंडल की सदस्यों ने निभाई सक्रिय भूमिका
भोजन वितरण कार्यक्रम में विहसंत महिला मंडल की संस्थापक अध्यक्ष कमलेश जैन, अध्यक्ष अल्का जैन, सचिव दिव्या जैन और कोषाध्यक्ष रितिका जैन सहित अर्चना जैन, रजनी जैन, कुसुम जैन, इंदु जैन, राजकुमारी जैन, नेहा जैन, सपना जैन, विवेक जैन, नेमीचन्द्र जैन, विकास जैन, नवीन जैन आदि ने सक्रिय सहभागिता की।
महिला मंडल की सदस्यों ने जरूरतमंदों को भोजन परोसा और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सदस्यों ने कहा कि गुरु के अवतरण दिवस पर सेवा कार्य करने से उन्हें आत्मिक संतोष मिला। उनका प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में भी सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाए।

अस्पताल में जरूरतमंदों को मिला सहारा
हजार बिस्तर अस्पताल में दूर-दराज से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। कई मरीजों के साथ उनके परिजन और अटेंडर लंबे समय तक अस्पताल परिसर में रहते हैं। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन वितरण का यह प्रयास उपयोगी साबित हुआ।
कार्यक्रम के दौरान भोजन प्राप्त करने वाले लोगों ने महिला मंडल के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसे स्थान पर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराना सराहनीय सेवा है। इस तरह के आयोजनों से समाज में एक-दूसरे की मदद करने और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रहने की भावना मजबूत होती है।
ऊषा जैन को दी गई श्रद्धांजलि
अवतरण दिवस के कार्यक्रम के दौरान मंदिर की संस्थापक ऊषा जैन को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित समाजजनों एवं महिला मंडल के सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत ऊषा जैन को श्रद्धांजलि दी। सभी ने उनके सामाजिक एवं धार्मिक योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावुक हो गया। उपस्थित लोगों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के 43वें अवतरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। महिला मंडल ने यह दिखाया कि किसी भी धार्मिक अवसर को सेवा और जनकल्याण से जोड़कर समाज के जरूरतमंद वर्ग तक सहायता पहुंचाई जा सकती है।
कार्यक्रम में शामिल समाजजनों ने कहा कि गुरुजनों के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज सेवा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। जरूरतमंदों को भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सहायता और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने जैसे कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विहसंत महिला मंडल द्वारा आयोजित इस सेवा कार्यक्रम से युवाओं और समाज के अन्य लोगों को भी सामाजिक कार्यों में आगे आने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भविष्य में भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए इसी तरह के सेवा कार्य जारी रखने की भावना व्यक्त की।
आयोजन ने दिया मानव सेवा का संदेश
उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के 43वें अवतरण दिवस पर हुआ यह आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ मानव सेवा का संदेश देने वाला कार्यक्रम बना। अस्पताल में जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने से लेकर दिवंगत ऊषा जैन को श्रद्धांजलि देने तक पूरे कार्यक्रम में सेवा, श्रद्धा और संवेदना का भाव दिखाई दिया।
विहसंत महिला मंडल आनंद नगर के इस प्रयास की समाजजनों ने सराहना की। कार्यक्रम में शामिल सदस्यों ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा का कार्य आगे भी जारी रहेगा और सामाजिक हित से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहभागिता की जाएगी।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने परम पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। अवतरण दिवस पर आयोजित सेवा कार्य ने यह संदेश दिया कि उत्सव की वास्तविक सार्थकता तब बढ़ जाती है, जब उसकी खुशी जरूरतमंदों के साथ साझा की जाए।
इस प्रकार उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज का 43वां अवतरण दिवस ग्वालियर में श्रद्धा, सेवा, करुणा और सामाजिक सहभागिता के साथ मनाया गया। महिला मंडल द्वारा अस्पताल में किए गए भोजन वितरण ने आयोजन को विशेष रूप से सार्थक बनाया और समाज में मानव सेवा एवं परोपकार की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

