बदरा पंचायत में विकास कार्यों को लेकर उठे गंभीर सवाल, नल-जल से मनरेगा तक अनियमितताओं की शिकायत
ग्रामीणों ने सरपंच शिवभान सिंह के कार्यकाल में कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की मांग की, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपील
अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की बदरा पंचायत में पंचायत विकास से जुड़े कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की ओर से पंचायत में नल-जल योजना, नर्सरी विकास और मनरेगा सहित विभिन्न कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतों में पंचायत के वर्तमान सरपंच शिवभान सिंह के कार्यकाल में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर जांच की मांग की गई है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच या दोष सिद्ध होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड की जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नल-जल योजना के काम पर उठे सवाल
ग्रामीणों के लिए पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित नल-जल योजना को लेकर भी बदरा पंचायत में सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और उससे जुड़े कार्यों में नियमों का पालन नहीं किया गया।
आरोप है कि पंचायत के रिकॉर्ड में पाइपलाइन बिछाने के लिए जमीन की खुदाई और अन्य कार्यों पर खर्च दर्शाया गया, जबकि मौके पर काम की वास्तविक स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ स्थानों पर अपेक्षित तरीके से खुदाई किए बिना ही जेसीबी और मजदूरी के नाम पर राशि खर्च किए जाने का संदेह है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नल-जल योजना से संबंधित स्वीकृति, तकनीकी मंजूरी, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण, बिल-वाउचर और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्य और जमीन पर हुए कार्य में कोई अंतर है या नहीं।
नर्सरी विकास के नाम पर भी जांच की मांग
पंचायत क्षेत्र में नर्सरी विकास और हरियाली से जुड़े कार्यों को लेकर भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नर्सरी के विकास के लिए स्वीकृत राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि खर्च किए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित स्तर का कार्य दिखाई नहीं देता। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित विभाग द्वारा स्वीकृत कार्य की जानकारी, पौधों की संख्या, खरीदी, मजदूरी भुगतान और मौके पर उपलब्ध नर्सरी का सत्यापन करना आवश्यक होगा।
यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मनरेगा के कार्यों में भी उठे गंभीर सवाल
बदरा पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम मस्टर रोल में दर्ज किए गए, जो कथित तौर पर मध्य प्रदेश में मौजूद नहीं थे।
एक आरोप यह भी लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले व्यक्ति की बदरा पंचायत के मनरेगा कार्यों में उपस्थिति दर्ज की गई। इसके अलावा मृत, अनुपस्थित या अन्य स्थानों पर रहने वाले व्यक्तियों के नाम से जॉब कार्ड और मस्टर रोल के कथित दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए मनरेगा के मस्टर रोल, जॉब कार्ड, आधार आधारित उपस्थिति, बैंक भुगतान रिकॉर्ड, कार्यस्थल की तस्वीरें और संबंधित मजदूरों के बयान की जांच जरूरी होगी।
मस्टर रोल की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
मनरेगा में मजदूरी भुगतान सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था होने के कारण रिकॉर्ड की जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किस व्यक्ति ने किस तारीख को किस कार्यस्थल पर काम किया और उसके खाते में कितनी राशि का भुगतान हुआ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के पिछले वर्षों के मस्टर रोल और भुगतान रिकॉर्ड का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कराया जाए। यदि किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर भुगतान पाया जाता है जिसने वास्तव में काम नहीं किया है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों के अनुसार जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड की जांच की मांग
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल पंचायत कार्यालय के रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय मौके पर जाकर कार्यों का सत्यापन किया जाना चाहिए।
उनकी मांग है कि नल-जल योजना, नर्सरी विकास और मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराई जाए। साथ ही स्वीकृत राशि, वास्तविक खर्च और मौके पर हुए काम के बीच तुलना की जाए।
जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग
बदरा पंचायत में उठे आरोपों के बाद ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायतों को मिलने वाला सरकारी धन ग्रामीण विकास और जनसुविधाओं के लिए होता है। इसलिए इसके उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग या फर्जी भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
फिलहाल बदरा पंचायत से जुड़े इन आरोपों पर आधिकारिक जांच का परिणाम सामने आना बाकी है। इसलिए सरपंच या किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और कार्यस्थल का सत्यापन जरूरी है।
मामले में जिला प्रशासन की ओर से यदि जांच समिति गठित की जाती है तो उसकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और किन कार्यों में नियमों का पालन हुआ है।
ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार
बदरा पंचायत में सामने आई शिकायतों ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए और विकास के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों पर ही होना चाहिए।
अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। यदि प्रशासन शिकायतों की विस्तृत जांच कराता है और रिपोर्ट सार्वजनिक होती है, तो नल-जल, नर्सरी और मनरेगा से जुड़े कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
