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हस्तिनापुर के वीर में दोस्ती पर संकट, अर्जुन से क्यों दूर हो रहा अश्वत्थामा? द्रोणाचार्य की सोच बनेगी वजह

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Published On: 12 August 2026
Dronacharya trains Arjun and Ashwatthama at the Gurukul as their friendship faces tension in Sony SAB’s Hastinapur Ke Veer
— Dronacharya trains Arjun and Ashwatthama at the Gurukul as their friendship faces tension in Sony SAB’s Hastinapur Ke Veer

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हस्तिनापुर के वीर में दोस्ती पर संकट, अर्जुन से क्यों दूर हो रहा अश्वत्थामा? द्रोणाचार्य की सोच बनेगी वजह

मुंबई। सोनी सब का पौराणिक धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ इन दिनों पांडवों और कौरवों के बचपन की कहानी को दर्शकों के सामने नए अंदाज में पेश कर रहा है। गुरुकुल का जीवन, राजकुमारों के बीच दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और पारिवारिक रिश्ते धीरे-धीरे कहानी को एक नए मोड़ की ओर ले जा रहे हैं।

आने वाले एपिसोड में दर्शकों को अर्जुन और अश्वत्थामा की दोस्ती में दरार देखने को मिलेगी। दोनों अब तक गुरुकुल में साथ प्रशिक्षण लेते हुए एक-दूसरे के करीबी दोस्त रहे हैं। लेकिन गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन की प्रतिभा पर बढ़ता विश्वास अश्वत्थामा के मन में असुरक्षा और ईर्ष्या की भावना पैदा कर रहा है।

गुरुकुल में अर्जुन की प्रतिभा से प्रभावित हैं द्रोणाचार्य

गुरुकुल में पांडवों और कौरवों के साथ अश्वत्थामा भी युद्धकला और विभिन्न शस्त्रों का प्रशिक्षण ले रहा है। इसी दौरान अर्जुन अपनी लगन, एकाग्रता और लगातार अभ्यास से गुरु द्रोणाचार्य को प्रभावित करता है।

अर्जुन की प्रतिभा को देखकर द्रोणाचार्य को विश्वास होने लगता है कि उसमें महान धनुर्धर बनने की क्षमता है। गुरु के रूप में द्रोणाचार्य अर्जुन की प्रतिभा को निखारने और उसकी क्षमता को सही दिशा देने पर विशेष ध्यान देते हैं।

हालांकि, यही स्थिति उनके पुत्र अश्वत्थामा के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण बन जाती है।

पिता की नजर में अर्जुन की खासियत से अश्वत्थामा परेशान

अश्वत्थामा को धीरे-धीरे यह महसूस होने लगता है कि उसके पिता अर्जुन की प्रतिभा को उससे अधिक महत्व दे रहे हैं। एक बेटे के लिए यह भावना काफी परेशान करने वाली साबित होती है।

उसे लगने लगता है कि उसके पिता को उसमें वह क्षमता नजर नहीं आती, जो उन्हें अर्जुन में दिखाई देती है। इसी असुरक्षा के कारण अश्वत्थामा के मन में अर्जुन के प्रति दूरी और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ने लगती है।

पहले से ही दुर्योधन के शब्दों और विचारों से प्रभावित अश्वत्थामा अब अर्जुन से दूरी बनाना शुरू कर देता है। इससे दोनों की मजबूत दोस्ती पहली बार गंभीर परीक्षा में पड़ती नजर आएगी।

दुर्योधन की बातों का भी पड़ रहा है असर

कहानी में दुर्योधन की भूमिका भी इस बदलते रिश्ते में महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है। अश्वत्थामा पहले से दुर्योधन की बातों से प्रभावित है। ऐसे में अर्जुन को लेकर उसके मन में पैदा हो रही असुरक्षा को दुर्योधन की सोच और मजबूत कर सकती है।

दोनों दोस्तों के बीच गलतफहमियां बढ़ती हैं और अश्वत्थामा अर्जुन से भावनात्मक दूरी बनाने लगता है। दूसरी ओर अर्जुन को समझ ही नहीं आता कि आखिर अचानक उनके रिश्ते में बदलाव क्यों आ गया।

अर्जुन नहीं समझ पा रहा दोस्ती में आई दूरी

अर्जुन के लिए अश्वत्थामा केवल उसका साथी या प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि करीबी दोस्त है। दोनों ने लंबे समय तक गुरुकुल में साथ प्रशिक्षण लिया है और कई पल साथ बिताए हैं।

ऐसे में जब अश्वत्थामा उससे अलग व्यवहार करना शुरू करता है, तो अर्जुन परेशान हो जाता है। उसे यह समझ नहीं आता कि आखिर ऐसा क्या बदल गया है, जिसकी वजह से उसका दोस्त उससे दूर जा रहा है।

अर्जुन किसी तरह की प्रतियोगिता या व्यक्तिगत टकराव नहीं चाहता। वह सिर्फ यह जानना चाहता है कि दोनों के बीच आखिर हुआ क्या है और उनकी दोस्ती पहले जैसी कब होगी।

द्रोणाचार्य की नीयत पर नहीं है कोई सवाल

गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर वह अपने बेटे अश्वत्थामा के पिता हैं, वहीं दूसरी ओर गुरुकुल में मौजूद सभी राजकुमार उनके शिष्य हैं।

द्रोणाचार्य का उद्देश्य अर्जुन को किसी अन्य शिष्य से अलग करना नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे बेहतर योद्धा और धनुर्धर बनाना है। लेकिन इसी प्रक्रिया में अनजाने में उनके बेटे के मन में पैदा हो रही भावनाओं को वह समझ नहीं पा रहे हैं।

यही कहानी का भावनात्मक पहलू इसे और दिलचस्प बना रहा है।

जितेन लालवानी ने बताया द्रोणाचार्य का नजरिया

गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे अभिनेता जितेन लालवानी ने अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा कि एक पिता के रूप में द्रोणाचार्य चाहते हैं कि अश्वत्थामा मजबूत और आत्मविश्वासी बने।

उनके अनुसार, द्रोणाचार्य ने कभी नहीं चाहा कि उनका बेटा खुद की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति से करे या खुद को किसी से कम समझे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान अपने सभी शिष्यों को प्रशिक्षित करने और अर्जुन की क्षमता को निखारने पर है।

जितेन लालवानी के मुताबिक, द्रोणाचार्य को इस बात का अंदाजा नहीं है कि अर्जुन को लेकर उनका विश्वास उनके बेटे के भीतर किस तरह की भावनाएं पैदा कर रहा है। यही विरोधाभास कहानी को रोचक बनाता है।

अर्जुन के किरदार में उर्वा सवालिया की प्रतिक्रिया

अर्जुन का किरदार निभा रहीं उर्वा सवालिया ने भी इस बदलते रिश्ते पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि अर्जुन इस बात से काफी दुखी होता है कि अश्वत्थामा धीरे-धीरे उससे दूर जा रहा है।

अर्जुन को समझ नहीं आता कि उनके बीच ऐसा क्या बदल गया है। उसके लिए अश्वत्थामा अभी भी वही दोस्त है, जिसके साथ उसने गुरुकुल में प्रशिक्षण लिया और कई यादगार पल बिताए।

उर्वा के अनुसार, अर्जुन अश्वत्थामा से प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश नहीं कर रहा। इसलिए जब अश्वत्थामा उसके साथ अलग व्यवहार करता है, तो अर्जुन को यह बदलाव और ज्यादा तकलीफ देता है।

क्या टूट जाएगी अर्जुन-अश्वत्थामा की दोस्ती?

आने वाले एपिसोड का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अश्वत्थामा की बढ़ती ईर्ष्या उसे अर्जुन से कितनी दूर ले जाएगी। क्या दोनों की दोस्ती गलतफहमियों के बीच खत्म हो जाएगी या अर्जुन अपने दोस्त के मन की बात समझ पाएगा?

दूसरी ओर, क्या द्रोणाचार्य समय रहते अश्वत्थामा की भावनाओं को समझ पाएंगे? क्या वह अपने बेटे को यह भरोसा दिला पाएंगे कि किसी दूसरे शिष्य की प्रतिभा की प्रशंसा करने का अर्थ यह नहीं है कि अश्वत्थामा उनके लिए कम महत्वपूर्ण है?

इन सवालों के जवाब आने वाले एपिसोड में देखने को मिलेंगे।

दोस्ती, महत्वाकांक्षा और रिश्तों के बीच बढ़ेगा तनाव

‘हस्तिनापुर के वीर’ की कहानी केवल पांडवों और कौरवों की युद्धकला तक सीमित नहीं है। इसमें उनके बचपन के रिश्तों और भावनात्मक संघर्षों को भी प्रमुखता से दिखाया जा रहा है।

अर्जुन और अश्वत्थामा की दोस्ती में आने वाला बदलाव यह दिखाता है कि प्रतिभा, महत्वाकांक्षा और पारिवारिक अपेक्षाएं किस तरह रिश्तों को प्रभावित कर सकती हैं। एक तरफ अर्जुन अपनी प्रतिभा के साथ आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ अश्वत्थामा अपने पिता की स्वीकृति और पहचान पाने की कोशिश कर रहा है।

सोमवार से शनिवार प्रसारित हो रहा है शो

‘हस्तिनापुर के वीर’ में आने वाला यह ट्रैक दर्शकों के लिए भावनात्मक और रोमांचक होने वाला है। अर्जुन और अश्वत्थामा के रिश्ते में बढ़ती दूरी कहानी को नई दिशा देगी।

दर्शक देख सकते हैं कि आगे द्रोणाचार्य, अर्जुन और अश्वत्थामा के बीच यह भावनात्मक संघर्ष किस तरह आगे बढ़ता है।

 

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