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अनूपपुर में PWD की व्यवस्था पर सवाल: जिला न्यायालय परिसर के शौचालय की पाइप नाली से जुड़ी होने का आरोप

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Published On: 11 August 2026
PWD drainage issue at Anuppur District Court, with an alleged toilet wastewater pipe connected directly to an open drain, raising sanitation and public health concerns
— PWD drainage issue at Anuppur District Court, with an alleged toilet wastewater pipe connected directly to an open drain, raising sanitation and public health concerns

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अनूपपुर में PWD की व्यवस्था पर सवाल: जिला न्यायालय परिसर के शौचालय की पाइप नाली से जुड़ी होने का आरोप

न्यायालय परिसर के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जताई चिंता; PWD से जांच और स्पष्टीकरण की मांग

संवाददाता: अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में सरकारी निर्माण और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर एक मामला सामने आया है, जिसने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली और निर्माण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जिला न्यायालय परिसर में बनाए गए शौचालय की कथित मल-निकासी व्यवस्था से जुड़ा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी और आरोपों के अनुसार, न्यायालय परिसर में न्यायाधीश के लिए बनाए गए शौचालय से निकलने वाली पाइप को सीधे मुख्य नाली से जोड़ा गया है। यदि मौके पर ऐसी ही व्यवस्था पाई जाती है और शौचालय की मल-निकासी बिना उचित उपचार व्यवस्था के सीधे खुली नाली में जा रही है, तो यह स्वच्छता और पर्यावरणीय सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय हो सकता है।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है। इसलिए पाइपलाइन की वास्तविक तकनीकी संरचना और उससे निकलने वाले पानी की प्रकृति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

शौचालय की निकासी व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

सामान्य तौर पर शौचालय की मल-निकासी को उचित सीवेज सिस्टम, सेप्टिक टैंक या स्थानीय नियमों के अनुरूप बनाए गए उपचार तंत्र से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य मानव अपशिष्ट को सीधे खुले जल निकासी मार्ग में जाने से रोकना होता है।

ऐसे में यदि किसी सरकारी भवन के शौचालय की पाइप वास्तव में सीधे मुख्य नाली में जुड़ी हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भवन की ड्रेनेज डिजाइन किस आधार पर तैयार की गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान के परिसर में स्वच्छता और ड्रेनेज व्यवस्था के मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे में संबंधित निर्माण और तकनीकी अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने की जरूरत है।

नाली आगे आम लोगों के घरों के सामने से गुजरती है

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर जताई जा रही है कि जिस नाली में कथित तौर पर शौचालय की निकासी जा रही है, वह आगे आम लोगों के घरों और सार्वजनिक क्षेत्र से होकर गुजरती है।

यदि नाली में बिना उचित उपचार के मानव अपशिष्ट या दूषित पानी पहुंच रहा है, तो इससे आसपास दुर्गंध, गंदगी और मच्छरों की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा दूषित जल के संपर्क में आने से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा होने की आशंका भी हो सकती है।

इसी वजह से स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पाइपलाइन की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे ड्रेनेज सिस्टम की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।

नाली की नियमित सफाई नहीं होने का भी आरोप

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आया है कि जिस नाली से यह पानी गुजरता है, उसकी नियमित सफाई नहीं की जाती। यदि नाली लंबे समय तक साफ नहीं होती है और उसमें लगातार गंदा पानी जमा रहता है, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

जाम या गंदगी से भरी नाली में पानी के प्रवाह में बाधा आने पर आसपास जलभराव और दुर्गंध की स्थिति बन सकती है। बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ने की आशंका रहती है।

इसलिए स्थानीय लोगों ने नाली की सफाई के साथ-साथ यह पता लगाने की मांग की है कि उसमें किस-किस स्रोत से पानी आ रहा है और क्या किसी सरकारी भवन का सीवेज सिस्टम उससे जुड़ा हुआ है।

निर्माण के दौरान तकनीकी निरीक्षण पर भी सवाल

मामले ने निर्माण कार्य के दौरान होने वाले तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि शौचालय की पाइपलाइन वास्तव में मुख्य नाली से जुड़ी है, तो निर्माण के दौरान इसका निरीक्षण किस अधिकारी या एजेंसी द्वारा किया गया था, यह जानना जरूरी होगा।

निर्माण पूरा होने के बाद भवन को उपयोग में लेने से पहले ड्रेनेज, सीवेज, पानी की निकासी और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की जाती है। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित भवन की ड्रेनेज व्यवस्था किस स्वीकृत डिजाइन के अनुसार तैयार की गई।

यदि मौके पर निर्माण में स्वीकृत डिजाइन से अलग व्यवस्था पाई जाती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ सुधारात्मक कार्रवाई भी जरूरी होगी।

PWD से मांगा जा रहा है स्पष्ट जवाब

मामला PWD से संबंधित बताया जा रहा है, इसलिए विभाग से कई सवालों के जवाब अपेक्षित हैं।

  • जिला न्यायालय परिसर के शौचालय की स्वीकृत ड्रेनेज डिजाइन क्या है?
  • शौचालय की मल-निकासी के लिए सेप्टिक टैंक या अन्य उपचार व्यवस्था कहां है?
  • क्या मुख्य नाली से पाइपलाइन का कनेक्शन स्वीकृत है?
  • निर्माण के दौरान ड्रेनेज सिस्टम का तकनीकी निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?
  • यदि व्यवस्था में कोई कमी है तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
  • मुख्य नाली की नियमित सफाई की जिम्मेदारी किस विभाग की है?

इन सवालों का जवाब मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला तकनीकी डिजाइन की गलती का है, निर्माण में हुई लापरवाही का है या पाइपलाइन की मौजूदा स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा मामला

यह विषय केवल सरकारी निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। यदि किसी सार्वजनिक स्थान से निकलने वाला अपशिष्ट उचित उपचार के बिना खुली नाली में जा रहा है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा मामला बन सकता है।

मानव अपशिष्ट में विभिन्न प्रकार के रोगजनक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए सीवेज का उचित निस्तारण और उपचार आवश्यक माना जाता है। खुले में या अनुचित तरीके से सीवेज का बहाव आसपास के पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है।

इसी कारण संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराना जरूरी है।

स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की मांग की

स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला न्यायालय परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। यदि शौचालय की मल-निकासी वास्तव में खुली नाली में जा रही है, तो तत्काल वैकल्पिक और मानक व्यवस्था की जाए।

इसके साथ ही जिस नाली से यह पानी गुजरता है, उसकी सफाई और आवश्यक मरम्मत भी कराई जाए। लोगों का कहना है कि समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समाधान किया जाना चाहिए, ताकि बारिश के मौसम में स्थिति और खराब न हो।

जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मौके की आधिकारिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। पाइप किससे जुड़ी है, उसमें किस प्रकार का पानी जा रहा है, सेप्टिक टैंक या सीवेज ट्रीटमेंट english heading

की कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की तकनीकी जांच जरूरी है।

यदि जांच में नियमों के विपरीत निर्माण या ड्रेनेज व्यवस्था सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

अब निगाहें PWD और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण कब कराते हैं और यदि कोई खामी पाई जाती है तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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