लाख की रिकवरी वाला सरपंच… फिर भाजपा मंडल महामंत्री!
संवाददाता : अभिषेक द्विवेदी
बदरा पंचायत के शिवभान सिंह पर लगभग ₹4 लाख की रिकवरी, कुल ₹9 लाख में करीब ₹1 लाख जमा होने की जानकारी; फिर दोबारा सरपंच कैसे बने?
भाजपा की कथनी-करनी पर सवाल: भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा, लेकिन रिकवरी प्रकरण से जुड़े व्यक्ति को मंडल महामंत्री का दायित्व!
अनूपपुर/बदरा। ग्राम पंचायत बदरा में वर्ष 2023 के पुलिया निर्माण से जुड़ी शासकीय राशि के मामले ने अब प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक संगठन को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। उपलब्ध रिकवरी संबंधी जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में कुल ₹9 लाख की रिकवरी निर्धारित की गई थी। इसमें तत्कालीन सरपंच शिवभान सिंह पर ₹4.75 लाख तथा पंचायत सचिव भीष्म देव पर ₹4.75 लाख की रिकवरी बताई गई है।
बताया जा रहा है कि दोनों की ओर से मिलाकर करीब ₹1 लाख ही जमा किया गया, जबकि करीब ₹8 लाख की राशि की वसूली अब भी सवालों के घेरे में है।
इसके बावजूद शिवभान सिंह आज भी ग्राम पंचायत बदरा के सरपंच हैं। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में उन्हें भाजपा मंडल पसान का महामंत्री बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
यहीं से उठता है सबसे बड़ा सवाल—
“शासकीय राशि की रिकवरी का मामला सामने आने के बाद भी सरपंच की कुर्सी बरकरार कैसे और भाजपा मंडल महामंत्री का पद कैसे?”
भाजपा की कथनी-करनी पर सवाल
भाजपा सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की बात करती है। लेकिन बदरा पंचायत के इस मामले ने स्थानीय स्तर पर पार्टी की कथनी और करनी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि भाजपा संगठन को शिवभान सिंह से जुड़े ₹4.75 लाख के रिकवरी प्रकरण की जानकारी थी, तो सवाल है कि उन्हें मंडल महामंत्री जैसा महत्वपूर्ण संगठनात्मक दायित्व क्यों दिया गया?
और यदि संगठन को इस मामले की जानकारी नहीं थी, तो सवाल यह है कि पद देने से पहले संबंधित व्यक्ति के रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं की गई?
क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का सिद्धांत सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
2023 में भी सरपंच, आज भी सरपंच
रिकवरी का यह मामला वर्ष 2023 के पुलिया निर्माण से संबंधित बताया जा रहा है। उस समय भी शिवभान सिंह ग्राम पंचायत बदरा के सरपंच थे और आज भी सरपंच हैं।
ऐसे में प्रशासन से सीधा सवाल है कि रिकवरी प्रकरण सामने आने के बाद उनकी पात्रता, जिम्मेदारी और पंचायत पद पर बने रहने की स्थिति की जांच किस स्तर पर हुई?
क्या किसी सक्षम अधिकारी ने यह परीक्षण किया कि उनके विरुद्ध पंचायत अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई बनती थी या नहीं?
यदि कार्रवाई नहीं बनती थी तो उसका स्पष्ट आधार क्या था?
₹9 लाख की रिकवरी, लगभग ₹1 लाख जमा—बाकी ₹8 लाख का हिसाब कौन देगा?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
शिवभान सिंह — ₹4,75,000 रिकवरी
भीष्म देव — ₹4,75,000 रिकवरी
कुल — ₹9,00,000 रिकवरी
दोनों की ओर से मिलाकर करीब ₹1 लाख जमा किए जाने की जानकारी है।
यदि यह जानकारी रिकॉर्ड से पुष्ट होती है तो करीब ₹8 लाख की राशि की वसूली शेष रह जाती है।
अब सवाल है—
शेष राशि की वसूली क्यों नहीं हुई?
वसूली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
क्या कोई विभागीय कार्रवाई हुई?
क्या प्रकरण को अंतिम रूप से बंद किया गया या अभी भी लंबित है?
रिकवरी के बाद भी राजनीतिक जिम्मेदारी क्यों?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2025 में शिवभान सिंह को भाजपा मंडल पसान में महामंत्री का दायित्व मिलने की जानकारी सामने आई है।
एक तरफ शासकीय राशि की रिकवरी का प्रकरण और दूसरी तरफ राजनीतिक संगठन में महत्वपूर्ण पद—यह विरोधाभास अब चर्चा का विषय बन गया है।
जनता का सवाल है—
“क्या राजनीतिक पद देने के लिए अलग मापदंड हैं और शासकीय जवाबदेही के लिए अलग?”
यदि संगठन को पूरे मामले की जानकारी थी तो भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि महामंत्री पद देने का आधार क्या था।
यदि जानकारी नहीं थी तो अब संगठन इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद क्या कदम उठाएगा?
जनता मांग रही पूरी फाइल सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि वर्ष 2023 के पुलिया निर्माण प्रकरण की पूरी फाइल सार्वजनिक की जाए। इसमें—
जांच प्रतिवेदन,
रिकवरी आदेश,
₹4.75 लाख की रिकवरी का आधार,
भुगतान संबंधी दस्तावेज,
माप पुस्तिका,
जमा की गई राशि,
शेष रिकवरी,
अब तक की विभागीय कार्रवाई
सार्वजनिक की जाए।
सवाल शिवभान से भी, प्रशासन से भी और भाजपा से भी
यह मामला अब केवल ग्राम पंचायत बदरा तक सीमित नहीं रह गया है।
शिवभान सिंह से सवाल है—
रिकवरी की पूरी राशि जमा हुई या नहीं?
प्रशासन से सवाल है—
शेष राशि की वसूली और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई हुई?
भाजपा संगठन से सवाल है—
रिकवरी प्रकरण से जुड़े व्यक्ति को मंडल महामंत्री का दायित्व देने का आधार क्या था?
सबसे बड़ा सवाल
₹9 लाख की रिकवरी का मामला… करीब ₹1 लाख जमा होने की जानकारी… फिर भी सरपंच की कुर्सी बरकरार और भाजपा मंडल महामंत्री का पद भी बरकरार!
क्या यही है भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा की कथनी और करनी?
अब जनता को प्रशासन और भाजपा संगठन—दोनों के जवाब का इंतजार है।
