Indore News: एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बच्चों तक पहुंच रहा हाई-कैफीन बेवरेज, इंदौर में लिए गए सैंपल
10 से 30 रुपये की छोटी बोतलों की बिक्री पर सवाल, 150 मिलीलीटर पैक में 45 मिलीग्राम तक कैफीन होने का दावा; डॉक्टरों ने चिंता जताई
इंदौर। शहर में कम कीमत वाले कुछ पेय पदार्थों की बिक्री को लेकर बच्चों और किशोरों की सेहत पर सवाल उठने लगे हैं। एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बिक रहे कैफीन युक्त बेवरेज अब छोटी दुकानों और मोहल्ले की सामान्य किराना दुकानों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। इनकी कम कीमत और आकर्षक पैकेजिंग के कारण बच्चों और किशोरों के बीच इनकी मांग बढ़ने की बात सामने आ रही है।
इंदौर में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से ऐसे पेय पदार्थों के सैंपल लिए जाने की कार्रवाई की गई है। अब इन नमूनों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित उत्पादों में कैफीन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
इस मामले ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि कम उम्र के उपभोक्ताओं तक कैफीन युक्त पेय पदार्थ आसानी से पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और किशोरों में कैफीन के अत्यधिक सेवन को लेकर अभिभावकों और प्रशासन दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।
10 से 30 रुपये में उपलब्ध छोटी बोतलें बनीं चिंता का कारण
इंदौर में बाजार में उपलब्ध कुछ छोटे पैक कथित तौर पर 10 से 30 रुपये की कीमत में बिक रहे हैं। कम कीमत होने के कारण इन्हें खरीदना बच्चों और किशोरों के लिए आसान हो जाता है।
बड़े पैक की तुलना में छोटे पैक बच्चों के लिए अधिक आकर्षक हो सकते हैं। यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि कैफीन युक्त पेय पदार्थों की बिक्री, लेबलिंग और लक्षित उपभोक्ताओं पर गंभीरता से नजर रखी जानी चाहिए।
बताया गया है कि कुछ उत्पाद 150 मिलीलीटर की बोतलों में उपलब्ध हैं और इनमें 45 मिलीग्राम तक कैफीन होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि किसी विशेष ब्रांड या सैंपल में कैफीन की वास्तविक मात्रा की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही होगी।
कैफीन युक्त पेय पदार्थों के लिए FSSAI के नियम
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के अनुसार कैफीन युक्त पेय पदार्थों के लिए निर्धारित मानक मौजूद हैं। FSSAI के दस्तावेजों के मुताबिक कैफीनयुक्त पेय पदार्थों में कुल कैफीन की मात्रा 145 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे उत्पादों के लेबल पर दैनिक सेवन से जुड़ी चेतावनी भी निर्धारित है।
FSSAI ऊर्जा पेय को आम तौर पर कैफीन, ग्वाराना, टॉरिन, ग्लूकोरोनोलैक्टोन, जिनसेंग और अन्य उत्तेजक घटकों वाले गैर-मादक पेय पदार्थों के रूप में परिभाषित करता है।
इसलिए बाजार में किसी पेय को केवल ‘एनर्जी ड्रिंक’ या आकर्षक नाम से बेचे जाने के बजाय उसकी वास्तविक सामग्री और लेबल पर दी गई जानकारी को देखना महत्वपूर्ण है।
बच्चों और किशोरों तक पहुंच को लेकर चिंता
कैफीन एक उत्तेजक पदार्थ है और अधिक मात्रा में इसका सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। FSSAI के एक आधिकारिक दस्तावेज में भी अत्यधिक कैफीन सेवन के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता दर्ज की गई है और विशेष रूप से बच्चों तक कैफीनयुक्त पेय की पहुंच को लेकर वैज्ञानिक समुदाय की चिंता का उल्लेख किया गया है।
बच्चों और किशोरों के मामले में चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि वे चाय, कॉफी, शीतल पेय और अन्य स्रोतों से भी कैफीन प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में अलग से कैफीनयुक्त पेय का सेवन कुल कैफीन सेवन को बढ़ा सकता है।
यही कारण है कि अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों द्वारा खरीदे जा रहे पेय पदार्थों के लेबल को ध्यान से देखें और उनमें मौजूद कैफीन की मात्रा की जानकारी लें।
मीठे पेय में कैफीन की मात्रा पर उठ रहे सवाल
बाजार में उपलब्ध कई ऐसे पेय पदार्थ स्वाद में मीठे होते हैं और इन्हें आकर्षक फ्लेवर तथा पैकेजिंग के साथ बेचा जाता है। बच्चों के लिए मीठा स्वाद इन्हें और आकर्षक बना सकता है।
ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि क्या बच्चे इन उत्पादों को सामान्य सॉफ्ट ड्रिंक समझकर खरीद रहे हैं या उन्हें यह जानकारी है कि इनमें कैफीन मौजूद है।
खाद्य उत्पादों की लेबलिंग का उद्देश्य उपभोक्ता को उत्पाद में मौजूद महत्वपूर्ण सामग्री की जानकारी देना है। FSSAI के नियमों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के लिए लेबल पर आवश्यक घोषणा और चेतावनी का प्रावधान है।
इंदौर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिए सैंपल
इंदौर में इस तरह के पेय पदार्थों को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपल लेने की कार्रवाई की है। अब इन सैंपलों की प्रयोगशाला जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।
जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित उत्पादों में कैफीन की मात्रा कितनी है, लेबल पर दी गई जानकारी वास्तविक सामग्री से मेल खाती है या नहीं और उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित उत्पाद या निर्माता के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
डॉक्टरों ने प्रतिबंध और सख्त निगरानी की मांग की
इंदौर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से बच्चों और किशोरों तक ऐसे उत्पादों की पहुंच को लेकर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम कीमत में आसानी से उपलब्ध होने वाले कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की बिक्री पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
विशेष रूप से स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास इनकी बिक्री पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा अभिभावकों को भी बच्चों को कैफीन के अत्यधिक सेवन से जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है।
राजस्थान और महाराष्ट्र का उदाहरण भी चर्चा में
इस मामले में राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कैफीनयुक्त या कथित एनर्जी ड्रिंक उत्पादों को लेकर उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि अलग-अलग उत्पादों और राज्यों में लागू नियमों की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए किसी उत्पाद पर प्रतिबंध की स्थिति की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से ही की जानी चाहिए।
मध्य प्रदेश में भी अब यह सवाल उठ रहा है कि बच्चों और किशोरों के बीच लोकप्रिय हो रहे कम कीमत वाले कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की बिक्री और प्रचार पर पर्याप्त निगरानी है या नहीं।
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल इंदौर में लिए गए सैंपलों की जांच के परिणाम इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण होंगे। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित उत्पादों में कैफीन की मात्रा कितनी है और वे निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, किसी खास उत्पाद को मानक से बाहर या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा। हालांकि बच्चों और किशोरों तक कैफीनयुक्त पेय की आसान पहुंच को देखते हुए अभिभावकों और प्रशासन के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
अभिभावक लेबल जरूर पढ़ें
बच्चों के लिए कोई भी पैक्ड ड्रिंक खरीदते समय अभिभावकों को उसके लेबल पर कैफीन की मात्रा, सामग्री, चेतावनी और सेवन संबंधी निर्देश जरूर देखना चाहिए। FSSAI के अनुसार कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के लिए विशेष लेबलिंग प्रावधान मौजूद हैं।
इंदौर में लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि इन उत्पादों में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। फिलहाल इस मामले ने बच्चों के बीच कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की बढ़ती पहुंच और खाद्य सुरक्षा निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर खड़ी कर दी है।
