Hero Honda Fuel Dispute: हीरो होंडा की टंकी से अधिक पेट्रोल भरने का आरोप, विनायक फिलिंग स्टेशन के खिलाफ शिकायत
संवाददाता : अभिषेक द्विवेदी
अनूपपुर। धरहर कला-अमरकंटक रोड स्थित विनायक फिलिंग स्टेशन पर एक उपभोक्ता ने अपनी Hero Honda मोटरसाइकिल में निर्धारित टंकी क्षमता से अधिक पेट्रोल भरे जाने का आरोप लगाया है। उपभोक्ता ने इस मामले को लेकर संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों से शिकायत करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पेट्रोल भरवाने के दौरान मशीन पर दर्ज की गई पेट्रोल की मात्रा और उनकी मोटरसाइकिल की टंकी की क्षमता के बीच काफी अंतर है। इसी अंतर को लेकर उन्होंने पेट्रोल पंप की मीटर व्यवस्था, नोजल तथा पेट्रोल की वास्तविक मात्रा की जांच की मांग उठाई है।
7 अगस्त को पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे उपभोक्ता
जमुना कॉलोनी निवासी आशुतोष मनोज मिश्रा ने शिकायत में बताया कि वह 7 अगस्त 2026 को अमरकंटक यूनिवर्सिटी से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने धरहर कला-अमरकंटक रोड स्थित विनायक फिलिंग स्टेशन पर अपनी हीरो होंडा मोटरसाइकिल क्रमांक MP 65 JP 7193 में पेट्रोल भरवाया।
आशुतोष मिश्रा के मुताबिक, पेट्रोल पंप पर मौजूद नोजलमैन ने उनकी मोटरसाइकिल में पेट्रोल भरा। पेट्रोल भरने के बाद उन्हें जो रसीद दी गई, उसमें 14.62 लीटर पेट्रोल दर्ज था। इसके लिए उनसे लगभग 1700 रुपये की राशि ली गई।
उपभोक्ता का कहना है कि रसीद मिलने के बाद जब उन्होंने पेट्रोल की दर्ज मात्रा पर ध्यान दिया तो उन्हें यह आंकड़ा असामान्य लगा। इसके बाद उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल की पेट्रोल टंकी की क्षमता और पेट्रोल पंप की रसीद में दर्ज मात्रा की तुलना की।
टंकी की क्षमता करीब 11 लीटर होने का दावा
शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी हीरो होंडा मोटरसाइकिल की पेट्रोल टंकी की क्षमता कंपनी के निर्धारित मापदंड के अनुसार करीब 11 लीटर है। उनका कहना है कि पेट्रोल भरवाने से पहले मोटरसाइकिल की टंकी पूरी तरह खाली भी नहीं थी, बल्कि उसमें लगभग 2 लीटर पेट्रोल पहले से मौजूद था।
ऐसे में उपभोक्ता ने सवाल उठाया है कि यदि मोटरसाइकिल की टंकी की कुल क्षमता करीब 11 लीटर है और उसमें पहले से लगभग 2 लीटर पेट्रोल मौजूद था, तो उसमें 14.62 लीटर पेट्रोल कैसे दर्ज किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, दर्ज मात्रा टंकी की अनुमानित क्षमता से करीब साढ़े तीन लीटर अधिक है। इसी वजह से उन्होंने पेट्रोल पंप की मशीन और पेट्रोल वितरण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

रसीद में दर्ज मात्रा को लेकर उठे सवाल
पेट्रोल पंप से ईंधन खरीदने के बाद ग्राहकों को दी जाने वाली रसीद में आमतौर पर पेट्रोल की मात्रा और भुगतान की राशि दर्ज होती है। इस मामले में भी उपभोक्ता को रसीद दी गई, जिसमें 14.62 लीटर पेट्रोल दर्ज होने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने इसी रसीद को आधार बनाते हुए संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि मामले की जांच केवल शिकायत के आधार पर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंप की मशीन, नोजल, मीटर रीडिंग और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि यह भी जांचा जाए कि जिस समय पेट्रोल भरा गया, उस समय मशीन की शुरुआती और अंतिम रीडिंग क्या थी तथा मशीन से वास्तविक रूप से कितनी मात्रा में पेट्रोल निकला।
मीटर की कार्यप्रणाली की जांच की मांग
उपभोक्ता ने पेट्रोल पंप की मीटर व्यवस्था की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मोटरसाइकिल की टंकी में निर्धारित क्षमता से अधिक पेट्रोल दर्ज किया गया है तो इसके पीछे कारण स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों से आग्रह किया है कि पेट्रोल पंप पर लगे डिस्पेंसिंग यूनिट की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि मशीन का मीटर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं।
उपभोक्ता के अनुसार, यदि मशीन में तकनीकी खराबी या कैलिब्रेशन से जुड़ी कोई समस्या है तो उसका पता लगाया जाना जरूरी है। वहीं यदि मशीन सही पाई जाती है तो पेट्रोल की इतनी मात्रा दर्ज होने के पीछे अन्य संभावित कारणों की जांच की जानी चाहिए।

शिकायत सही होने पर कार्रवाई की मांग
आशुतोष मिश्रा ने अपनी शिकायत में संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पेट्रोल पंप पर उपभोक्ता को निर्धारित मात्रा से कम पेट्रोल दिया गया या मशीन की रीडिंग में कोई गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति या पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान पेट्रोल पंप के संबंधित दस्तावेज, मशीन की जांच रिपोर्ट और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड को देखा जाए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
क्या तकनीकी त्रुटि की वजह से दर्ज हुई अधिक मात्रा?
फिलहाल इस मामले में कई सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मोटरसाइकिल की टंकी की क्षमता करीब 11 लीटर है और उसमें पहले से लगभग 2 लीटर पेट्रोल मौजूद था, तो मशीन पर 14.62 लीटर पेट्रोल की मात्रा कैसे दर्ज हुई।
संभावना यह भी हो सकती है कि पेट्रोल की मात्रा दर्ज करने में कोई तकनीकी त्रुटि हुई हो। मशीन की रीडिंग, मीटर कैलिब्रेशन या डिस्पेंसिंग सिस्टम में किसी प्रकार की समस्या होने पर भी ऐसी स्थिति की जांच की जा सकती है।
हालांकि, इन संभावनाओं की पुष्टि केवल तकनीकी जांच के बाद ही की जा सकती है। अभी तक सामने आई जानकारी उपभोक्ता की शिकायत और उसके द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है।

पेट्रोल पंप पर जांच से सामने आएगी सच्चाई
मामले की वास्तविकता जानने के लिए पेट्रोल पंप की मशीन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि जिस नोजल से पेट्रोल भरा गया, उसकी मशीन रीडिंग क्या थी और उस समय डिस्पेंसिंग यूनिट की स्थिति कैसी थी।
इसके अलावा पेट्रोल पंप के बिक्री रिकॉर्ड और मशीन से संबंधित तकनीकी दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। यदि आवश्यकता हुई तो अधिकृत तकनीकी टीम द्वारा मशीन की जांच और माप की शुद्धता का परीक्षण भी किया जा सकता है।
उपभोक्ता का कहना है कि वह चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और वास्तविक तथ्य सामने आएं। उनका उद्देश्य यह स्पष्ट कराना है कि पेट्रोल की मात्रा में इतना बड़ा अंतर आखिर कैसे आया।
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा मामला
पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सही मात्रा और गुणवत्ता उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय है। ग्राहक द्वारा भुगतान की गई राशि के अनुरूप उसे सही मात्रा में ईंधन मिलना आवश्यक है। ऐसे मामलों में किसी भी शिकायत के सामने आने पर पारदर्शी जांच से उपभोक्ता और पेट्रोल पंप दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस मामले में भी जांच के माध्यम से यह पता लगाना जरूरी होगा कि पेट्रोल की मात्रा वास्तव में कितनी थी और मशीन पर 14.62 लीटर की रीडिंग क्यों दर्ज हुई।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल उपभोक्ता की शिकायत संबंधित अधिकारियों के समक्ष पहुंच चुकी है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या थी, मीटर की रीडिंग में त्रुटि हुई या पेट्रोल की मात्रा दर्ज होने का कोई अन्य कारण था।
यदि जांच में पेट्रोल पंप की मशीन पूरी तरह सही पाई जाती है, तो 14.62 लीटर की रीडिंग के संबंध में अन्य संभावित कारणों की जांच करनी होगी। वहीं यदि मशीन या मीटर में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ता ने मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच पूरी की जाए और जांच के निष्कर्ष से उन्हें अवगत कराया जाए। उनका कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल विनायक फिलिंग स्टेशन पर 11 लीटर के आसपास क्षमता वाली बताई जा रही मोटरसाइकिल में 14.62 लीटर पेट्रोल दर्ज होने का मामला सवालों के घेरे में है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी और तब यह स्पष्ट होगा कि यह तकनीकी त्रुटि थी, मीटर से जुड़ी समस्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण रहा।
