इंदौर क्यों रूठ जाती है प्रकृति विषय पर सेवा सुरभि की गोष्ठी में सांसद शंकर लालवानी, पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी और डॉ. भरत शर्मा ने जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षारोपण और पर्यावरण बचाने के प्रभावी उपाय बताए।
क्यों रूठ जाती है प्रकृति? इंदौर में पर्यावरण संरक्षण पर सेवा सुरभि की प्रेरक गोष्ठी, विशेषज्ञों ने बताए बड़े समाधान
इंदौर। क्यों रूठ जाती है प्रकृति विषय पर सामाजिक संस्था सेवा सुरभि द्वारा आयोजित विशेष गोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को लेकर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने अध्यक्षता की, जबकि प्रसिद्ध पर्यावरणविद पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के पूर्व सदस्य डॉ. भरत शर्मा सहित शहर के अनेक पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
सेवा सुरभि की पर्यावरण गोष्ठी
क्यों रूठ जाती है प्रकृति विषय पर आयोजित इस गोष्ठी का उद्देश्य समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट, वनों की कटाई, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा—जलवायु परिवर्तन केंद्र सरकार की प्राथमिकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन केंद्र सरकार के एजेंडे का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है।उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सौर मिशन, ऊर्जा दक्षता संवर्धन मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन तथा ग्रीन इंडिया मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नदियों की सफाई, पेयजल उपलब्धता तथा वन संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
डॉ. भरत शर्मा बोले—मानव ही संकट का कारण और समाधान
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्व सदस्य डॉ. भरत शर्मा ने कहा कि मानव ही प्रकृति के संकट का सबसे बड़ा कारण भी है और समाधान का आधार भी।उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चले तो जल, वायु और जलवायु तीनों सुरक्षित रह सकते हैं।उन्होंने कहा कि आज—
- वनों की अंधाधुंध कटाई
- जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग
- औद्योगिक प्रदूषण
- प्लास्टिक एवं रासायनिक कचरा
- अनियोजित शहरीकरण
- हरित क्षेत्रों का लगातार कम होना
पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं।डॉ. शर्मा ने अधिक से अधिक जल संचयन, वर्षा जल प्रबंधन, दूषित जल उपचार, वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी ने दिया बड़ा संदेश
प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी ने कहा कि अब केवल पौधारोपण की चर्चा पर्याप्त नहीं है।उन्होंने कहा—
“आज सबसे बड़ी आवश्यकता जल संचयन और जल संवर्धन की है।”
उन्होंने बताया कि देश के जिन प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर लगातार घट रहा है, उन्हें चिन्हित कर वैज्ञानिक तरीके से पुनर्भरण किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में मानव ने प्रकृति के साथ अन्याय किया है और यही कारण है कि आज प्रकृति मनुष्य से रूठती हुई दिखाई दे रही है।
आईआईटी इंदौर में प्राकृतिक जलाशयों पर बनेगा रोडमैप
पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी ने कहा कि आईआईटी इंदौर में जनभागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक जलाशयों और उनकी संभावनाओं का वैज्ञानिक रोडमैप तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि यदि समाज और वैज्ञानिक संस्थाएं मिलकर काम करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार
कार्यक्रम का सफल संचालन अतुल सेठ ने किया, जबकि अनिल त्रिवेदी ने आभार व्यक्त किया।
ये गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
गोष्ठी में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- सांसद शंकर लालवानी
- पद्मभूषण अनिलप्रकाश जोशी
- डॉ. भरत शर्मा
- पद्मश्री जनक पलटा
- ओम नरेडा
- शहर काजी इशरत अली
- डॉ. ओ. पी. जोशी
- दिलीप वाघेला
- प्रो. राजीव शर्मा
- कुमार सिद्धार्थ
- अतुल सेठ
- अनिल त्रिवेदी
- इंदौर शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक
निष्कर्ष
क्यों रूठ जाती है प्रकृति विषय पर आयोजित यह गोष्ठी केवल एक चर्चा नहीं बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा का संदेश रही। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यदि अभी से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और जनभागीदारी पर गंभीरता से कार्य किया जाए, तो जलवायु परिवर्तन की गति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है।
