बदनावर शासकीय अस्पताल में निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद निवारण शिविर का सफल आयोजन, 70 मरीजों की जांच, 17 ऑपरेशन के लिए चयनित
बदनावर में ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवा का सराहनीय प्रयास
रिपोर्टर: महेश कुमार वर्मा
बदनावर (धार), 05 अगस्त 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने तथा मोतियाबिंद जैसी गंभीर आंखों की बीमारियों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शासकीय अस्पताल बदनावर में निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद निवारण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर गीता वेलफेयर एंड हेल्थ फाउंडेशन, धार द्वारा जिला अंधत्व निवारण समिति, धार एवं शंकरा आई सेंटर, विजय नगर इंदौर के सहयोग से आयोजित किया गया।
शिविर में बड़ी संख्या में बदनावर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी आंखों की जांच करवाई। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आधुनिक उपकरणों की सहायता से मरीजों की आंखों का परीक्षण किया गया तथा आवश्यकता अनुसार उन्हें उचित उपचार एवं परामर्श प्रदान किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों को आंखों के प्रति जागरूक करना तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रहा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुआ शिविर का शुभारंभ
शिविर का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अनिता सिंगारे, डॉ. सौरभ बौरासी (डीपीएम एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय धार) तथा खंड चिकित्सा अधिकारी बदनावर श्री मुजाल्दा के मार्गदर्शन में किया गया।
अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे लोगों को प्रारंभिक अवस्था में ही बीमारियों की पहचान हो सके और उनका समय पर उपचार संभव हो। उन्होंने कहा कि आंखों की बीमारियों की अनदेखी कई बार स्थायी दृष्टिहीनता का कारण बन जाती है, इसलिए नियमित नेत्र परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञ टीम ने किया नेत्र परीक्षण

शिविर में नेत्र चिकित्सा सहायक रजनीश पाटीदार द्वारा मरीजों की आंखों का विस्तृत परीक्षण किया गया। प्रत्येक मरीज की दृष्टि क्षमता की जांच की गई तथा मोतियाबिंद, दृष्टिदोष, आंखों में संक्रमण, धुंधला दिखाई देना, आंखों में जलन, लालपन एवं अन्य नेत्र संबंधी समस्याओं का परीक्षण किया गया।
जिन मरीजों में गंभीर नेत्र रोग पाए गए, उन्हें विशेषज्ञ उपचार के लिए चिन्हित किया गया। चिकित्सकों ने मरीजों को आंखों की नियमित जांच कराने, संतुलित आहार लेने तथा आंखों की स्वच्छता बनाए रखने के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
70 मरीजों का पंजीयन, 17 मरीज ऑपरेशन के लिए चयनित
शिविर के दौरान कुल 70 मरीजों का पंजीयन एवं विस्तृत नेत्र परीक्षण किया गया। जांच के उपरांत 17 मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि होने पर उन्हें निःशुल्क ऑपरेशन के लिए चयनित किया गया।
इन मरीजों का ऑपरेशन शंकरा आई सेंटर, विजय नगर इंदौर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान आधुनिक तकनीक से लेंस प्रत्यारोपण भी किया जाएगा, जिससे मरीजों की दृष्टि में सुधार हो सके।
चयनित मरीजों को पूरी तरह निःशुल्क मिलेगी उपचार सुविधा
शिविर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि चयनित मरीजों को किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। सभी सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन सुविधाओं में शामिल हैं—
- विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों द्वारा जांच
- मोतियाबिंद का आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन
- उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम लेंस का प्रत्यारोपण
- ऑपरेशन से पूर्व आवश्यक जांच
- सभी आवश्यक दवाइयां
- अस्पताल में भोजन की व्यवस्था
- मरीजों के लिए परिवहन सुविधा
- ऑपरेशन के बाद फॉलोअप जांच
इस प्रकार की सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है, क्योंकि निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च कई हजार रुपये तक पहुंच जाता है।
सामाजिक संस्था ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इस शिविर के आयोजन में गीता वेलफेयर एंड हेल्थ फाउंडेशन, धार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से समाज के जरूरतमंद वर्ग तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का कार्य कर रही है।
संस्था की ओर से सचिन गुप्ता, महेश कुमार वर्मा एवं सुमीत ठाकुर ने शिविर की व्यवस्थाओं का संचालन किया। वहीं शंकरा आई फाउंडेशन के जिला संयोजक लोकेश करोड़ीवाल ने मरीजों के पंजीयन, परीक्षण तथा चयन प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
आशा कार्यकर्ताओं और अस्पताल स्टाफ का सराहनीय सहयोग
शिविर की सफलता में आशा कार्यकर्ताओं, शासकीय अस्पताल बदनावर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आशा कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर लोगों को शिविर की जानकारी दी और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में सहयोग किया। वहीं अस्पताल स्टाफ ने पंजीयन, जांच, मरीजों के मार्गदर्शन तथा अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया।
आयोजकों ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे सामाजिक स्वास्थ्य अभियान सफल हो पाते हैं।
मोतियाबिंद क्या है?
मोतियाबिंद आंखों की एक सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी है, जिसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। इसके कारण व्यक्ति को साफ दिखाई देना बंद हो जाता है और समय के साथ दृष्टि कमजोर होती जाती है।
यदि समय रहते इसका उपचार न कराया जाए तो मरीज की दृष्टि पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के माध्यम से मोतियाबिंद का ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित और सफल माना जाता है।
नेत्र रोगों के प्रति जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोग आंखों की समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को—
- धुंधला दिखाई दे,
- रोशनी में परेशानी हो,
- आंखों में लगातार पानी आए,
- आंखों में दर्द या जलन हो,
- पढ़ने में कठिनाई महसूस हो,
तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऐसे शिविर क्यों हैं महत्वपूर्ण?
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो आर्थिक अभाव या जागरूकता की कमी के कारण समय पर आंखों का इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर उनके लिए वरदान साबित होते हैं।
इन शिविरों के माध्यम से मरीजों को उनके घर के नजदीक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल जाती है। साथ ही गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर कर उनका निःशुल्क उपचार भी सुनिश्चित किया जाता है।
आंखों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों की सलाह
शिविर में उपस्थित विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों को आंखों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए—
- वर्ष में कम से कम एक बार आंखों की जांच अवश्य कराएं।
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीज नियमित नेत्र परीक्षण कराएं।
- तेज धूप में गुणवत्तापूर्ण चश्मे का उपयोग करें।
- आंखों में किसी प्रकार की समस्या होने पर स्वयं दवा न लें।
- विटामिन-ए युक्त संतुलित भोजन का सेवन करें।
- बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराते रहें।
आयोजकों ने नागरिकों से की अपील
शिविर के समापन अवसर पर आयोजकों ने क्षेत्र के नागरिकों से अपील की कि यदि परिवार में किसी भी सदस्य को धुंधला दिखाई देता है या मोतियाबिंद के लक्षण दिखाई देते हैं तो वे जांच कराने में देर न करें।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से अंधत्व जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। भविष्य में भी इस प्रकार के निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
स्वास्थ्य सेवा की दिशा में प्रेरणादायक पहल
बदनावर में आयोजित यह निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद निवारण शिविर सरकारी स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संस्था और विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थान के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। शिविर ने न केवल सैकड़ों लोगों को नेत्र रोगों के प्रति जागरूक किया, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क उपचार का अवसर भी उपलब्ध कराया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने और अंधत्व जैसी समस्याओं को कम करने की दिशा में इस प्रकार के शिविर अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इसी प्रकार नियमित रूप से स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते रहें, तो हजारों लोगों की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है तथा समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाया जा सकता है।
