गुरुमां आर्यिका संगममति माताजी ने बताया ‘छहढाला’ का आध्यात्मिक महत्व, आत्मकल्याण का मार्ग दिखाता है यह ग्रंथ
जैन बगीची अम्बाह में धर्मसभा का आयोजन, श्रद्धालुओं ने सुने मंगल प्रवचन
मुरैना/अम्बाह (मनोज जैन नायक)। जैन बगीची अम्बाह में आयोजित धर्मसभा में गुरुमां आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ने जैन धर्म के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ ‘छहढाला’ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छहढाला केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराने वाला अद्भुत आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।
गुरुमां ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का वास्तविक उद्देश्य बाहरी सुख-सुविधाओं को प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना होना चाहिए। छहढाला का अध्ययन व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।Gurumaa Aryika Sangammati Mataji Explains Spiritual
सरल भाषा में जैन दर्शन को समझाता है छहढाला
गुरुमां संगममति माताजी ने बताया कि छहढाला की रचना महान विद्वान पंडित दौलतराम जी ने अत्यंत सरल और सहज भाषा में की है। इस कारण यह ग्रंथ सामान्य व्यक्ति के लिए भी जैन दर्शन के गहरे सिद्धांतों को समझने का सरल माध्यम बन गया है।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनेक गूढ़ विषयों को छहढाला में इतनी सरलता से प्रस्तुत किया गया है कि हर व्यक्ति इसे पढ़कर अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन ला सकता है।
यह ग्रंथ आत्मा और कर्म के संबंधों को समझाने के साथ-साथ जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। इसके अध्ययन से व्यक्ति को अपने भीतर छिपी आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव होता है।

आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का प्रकाश स्तंभ
गुरुमां ने कहा कि छहढाला आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का प्रकाशपुंज है। इसमें जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा और मोक्ष जैसे जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों को समझने से व्यक्ति अपने कर्मों और विचारों के प्रति जागरूक होता है। नियमित स्वाध्याय करने से आत्मा में सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र की भावना जागृत होती है।
गुरुमां ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया जाना चाहिए।
बाहरी सफलता से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मिक उन्नति
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरुमां ने कहा कि आज मनुष्य बाहरी उपलब्धियों को ही जीवन की सफलता मान बैठा है, जबकि वास्तविक सफलता आत्मशुद्धि और आत्मसंयम में निहित है।
उन्होंने कहा कि धन, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक सुविधाएं जीवन को आराम दे सकती हैं, लेकिन आत्मा को शांति और संतोष केवल धर्म, संयम और सदाचार से ही प्राप्त होता है।
छहढाला व्यक्ति को राग-द्वेष, मोह और कषायों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। इसके सिद्धांतों को अपनाकर मनुष्य अपने जीवन में विनम्रता, विवेक और वैराग्य का विकास कर सकता है।
जीवन में उतारें ग्रंथ के सिद्धांत
गुरुमां संगममति माताजी ने कहा कि केवल धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना पर्याप्त नहीं है। उनके संदेशों और सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना ही वास्तविक धर्म साधना है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से छहढाला का स्वाध्याय करें और इसमें बताए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। इससे जीवन में शांति, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आत्मचिंतन करता है और अपने दोषों को दूर करने का प्रयास करता है, वही सच्चे अर्थों में धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

धर्मसभा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
जैन बगीची अम्बाह में आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरुमां के आध्यात्मिक प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और धर्मलाभ प्राप्त किया।
प्रवचन के दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने छहढाला के महत्व को समझते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
धर्मसभा में उपस्थित भक्तों ने कहा कि गुरुमां के प्रेरणादायी विचार जीवन को नई दिशा देने वाले हैं। उनके प्रवचनों से व्यक्ति को धर्म, संयम और आत्मजागरण की प्रेरणा मिलती है।
आध्यात्मिक चेतना का माध्यम बना छहढाला स्वाध्याय
गुरुमां ने अंत में कहा कि जैन धर्म के महान ग्रंथों का अध्ययन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। छहढाला केवल पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि आत्मा की उन्नति के लिए निरंतर प्रयास, संयम और सही ज्ञान आवश्यक है। छहढाला इसी मार्ग को सरलता से समझाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है।
धर्मसभा का समापन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुमां के मंगल आशीर्वाद के साथ धर्ममार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
