विश्व स्तनपान सप्ताह: जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाएं — डॉ. शिल्पी सराफ
जिला चिकित्सालय शहडोल में जागरूकता कार्यक्रम, माताओं को बताए स्तनपान के महत्व और लाभ
रिपोर्ट – संभागीय ब्यूरो प्रमुख सुनील रैदास
Shahdol , 4 अगस्त।
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर जिला चिकित्सालय शहडोल में माताओं और आम नागरिकों को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और बड़ी संख्या में माताओं ने भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने शिशु के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और विकास के लिए मां के दूध को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने कहा कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। मां का दूध नवजात के लिए संपूर्ण आहार होता है, जिसमें शिशु के शरीर की आवश्यकता के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। उन्होंने कहा कि स्तनपान से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वे कई गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रहते हैं।
पहला पीला दूध नवजात के लिए अमृत समान
डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि प्रसव के बाद निकलने वाला पहला पीला और गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात के लिए बेहद लाभकारी होता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं। उन्होंने माताओं से अपील की कि वे किसी भी स्थिति में बच्चे को जन्म के तुरंत बाद पहला दूध अवश्य पिलाएं।
उन्होंने कहा कि कई बार सामाजिक भ्रांतियों के कारण माताएं बच्चों को शुरुआती समय में मां का दूध देने में देरी कर देती हैं, जबकि यही समय शिशु के स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

छह माह तक पानी और अन्य आहार की आवश्यकता नहीं
कार्यक्रम में डॉ. सराफ ने बताया कि शिशु को पहले छह माह तक पानी, शहद, घुट्टी या अन्य किसी भी प्रकार का बाहरी आहार देने की आवश्यकता नहीं होती है। मां का दूध ही बच्चे की भूख और प्यास दोनों को पूरा करने में सक्षम होता है।
उन्होंने कहा कि छह माह की आयु पूरी होने के बाद शिशु को मां के दूध के साथ-साथ पूरक आहार देना शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही बच्चे के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखा जा सकता है।

स्तनपान से मजबूत होता है मां और बच्चे का रिश्ता
कार्यक्रम में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल ने कहा कि स्तनपान केवल पोषण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध को भी मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मां का दूध बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चों से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। इसलिए प्रत्येक परिवार को स्तनपान के महत्व को समझना चाहिए और माताओं को इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
जागरूकता गतिविधियों का भी हुआ आयोजन
विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत जिला चिकित्सालय में विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्विज प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता और अन्य माध्यमों से माताओं एवं उपस्थित लोगों को स्तनपान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माताओं की समस्याओं और सवालों का समाधान करते हुए बच्चों के पोषण, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में डॉ. टी.एन. चतुर्वेदी, डॉ. उमेश नामदेव, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, एएनएमटीसी के संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं, एलायंस क्लब के सदस्य, शिवानी पैरामेडिकल के विद्यार्थी तथा एएनसी एवं पीएनसी माताएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए स्तनपान को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से माताओं को सही जानकारी देकर शिशु मृत्यु दर कम करने और स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
