“कर्म सत्ता किसी को नहीं छोड़ती, राजा हो या रंक सभी को कर्मों का फल मिलता है” – साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज
महिदपुर रोड में सिद्धि दायक सिद्धि तप का मंगलमय शुभारंभ, 45 दिवसीय धार्मिक तपस्या में श्रद्धालुओं ने लिया संकल्प
महिदपुर रोड। चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में कर्मों के महत्व और जीवन में सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कर्म सत्ता किसी को नहीं छोड़ती, चाहे व्यक्ति राजा हो या रंक, सभी को अपने किए हुए कर्मों का फल अवश्य प्राप्त होता है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों का बंधन स्वयं करता है, लेकिन जब वही कर्म उदय में आते हैं तो व्यक्ति को सुख-दुख और विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में विचार और भावनाओं का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि “जैसी मति होती है, वैसी ही गति होती है और जैसा भाव होता है, वैसा ही भव बनता है।” इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों और भावों को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए।
निंदा रस से बचने की दी प्रेरणा
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने कहा कि जीवन में सबसे खतरनाक चीजों में से एक है निंदा रस। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर दूसरों की आलोचना और बुराई करने में आनंद लेने लगता है, लेकिन इससे नकारात्मक कर्मों का बंध होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि दूसरों की कमियां देखने के बजाय आत्मचिंतन करें और अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करें। सकारात्मक सोच और अच्छे भाव ही व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।

सिद्धि दायक सिद्धि तप का हुआ शुभारंभ
साध्वी श्री के पावन सान्निध्य में नगर में सिद्धि दायक सिद्धि तप का मंगलमय शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में तपस्वियों और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।
तपस्वियों ने मंगल कलश भरकर परमात्मा से निर्विघ्न तपस्या पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस 45 दिवसीय धार्मिक तपस्या में शामिल होकर श्रद्धालु महान पुण्य अर्जित करेंगे।
अनुष्ठान के दौरान सभी तपस्वियों और समाजजनों ने पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ सहभागिता की। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कार्यक्रम में भाग लिया।
धर्मसभा में श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि मंगलवार को आयोजित धार्मिक भक्ति, प्रभावना और संपूर्ण कार्यक्रम का लाभ अशोक कुमार बापूलाल कोचर मावावाला परिवार द्वारा लिया गया।
उन्होंने बताया कि धर्मसभा के दौरान जैन समाज के धर्मनिष्ठ सुश्रावक एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री पारस जैन को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
तप और संयम का बताया महत्व
धर्मसभा में साध्वी श्री ने कहा कि तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है। तप के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर के विकारों को दूर कर आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास का समय आत्मचिंतन, स्वाध्याय, संयम और धर्म साधना के लिए विशेष अवसर होता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।

श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा वातावरण
सिद्धि दायक सिद्धि तप के शुभारंभ अवसर पर नगर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के पावन सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
श्रद्धालुओं ने साध्वी श्री के मंगल प्रवचन सुनकर जीवन में धर्म, संयम, सदाचार और अच्छे कर्मों को अपनाने का संकल्प लिया। साध्वी श्री ने अपने आशीर्वचनों में आत्मशुद्धि, तपस्या और सकारात्मक विचारों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान जैन समाज के पदाधिकारी, तपस्वी, समाजजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया तथा साध्वी श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर धर्मलाभ लिया।
सिद्धि दायक सिद्धि तप के शुभारंभ के साथ ही नगर में धार्मिक गतिविधियों का वातावरण और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया है। श्रद्धालुओं ने तप, त्याग और संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहभागिता की।
