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सारनी में अवैध स्क्रैप कारोबार को लेकर बढ़ा विवाद, ग्रामीणों ने चोरी की घटनाओं पर जताई चिंता, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

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Published On: 3 August 2026
A scrap yard in the Sarni–Ghodadongri area of Betul district, where local residents have raised concerns over alleged illegal scrap trading and increasing iron theft incidents, prompting demands for an administrative investigation
— A scrap yard in the Sarni–Ghodadongri area of Betul district, where local residents have raised concerns over alleged illegal scrap trading and increasing iron theft incidents, prompting demands for an administrative investigation

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सारनी में अवैध स्क्रैप कारोबार को लेकर बढ़ा विवाद, ग्रामीणों ने चोरी की घटनाओं पर जताई चिंता, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

संवाददाता: संदीप तायड़े, सारनी/घोड़ाडोंगरी (बैतूल)
सारनी (बैतूल)।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के सारनी और घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में कथित अवैध स्क्रैप (कबाड़) कारोबार को लेकर स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बिना अनुमति संचालित हो रही कुछ स्क्रैप दुकानों के कारण चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ अब गांवों में भी लोहे से बने कृषि उपकरण, मोटर पंप और अन्य धातु सामग्री चोरी होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित दुकानों के संचालकों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

क्षेत्रवासियों ने अवैध स्क्रैप कारोबार पर उठाए सवाल

सारनी, पाथाखेड़ा तिगड्डा और ग्राम पंचायत सलैया के मुख्य मार्ग पर संचालित कुछ स्क्रैप दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्क्रैप कारोबार निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों के बिना संचालित हो रहा है, तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि अवैध रूप से संचालित स्क्रैप कारोबार चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दे सकता है।

नागरिकों का कहना है कि इस विषय में प्रशासन द्वारा पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का दावा—लोहे की चोरी की घटनाएं बढ़ीं

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ समय में क्षेत्र में लोहे से बनी सामग्री की चोरी की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऐसी घटनाएं मुख्य रूप से औद्योगिक परिसरों तक सीमित थीं, लेकिन अब गांवों में भी किसानों की संपत्ति निशाना बनने लगी है।

उनके अनुसार चोरी होने वाली वस्तुओं में शामिल हैं—

  • कृषि कार्य में उपयोग होने वाले लोहे के उपकरण
  • मोटर पंप
  • पाइप और मशीनरी के हिस्से
  • लोहे के एंगल और संरचनात्मक सामग्री
  • अन्य धातु सामग्री

हालांकि इन घटनाओं के संबंध में आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

स्क्रैप दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि किसी स्क्रैप दुकान पर चोरी का सामान खरीदा जाता है, तो इससे चोरी करने वालों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

इसी आधार पर नागरिकों ने मांग की है कि क्षेत्र में संचालित सभी स्क्रैप दुकानों की वैधता, लाइसेंस, रिकॉर्ड और खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।

उनका कहना है कि यदि सभी कारोबार नियमों के अनुसार संचालित होंगे, तो किसी भी प्रकार की शंका स्वतः समाप्त हो जाएगी।

सलैया क्षेत्र की एक स्क्रैप दुकान को लेकर लगाए गए आरोप

ग्रामीणों ने विशेष रूप से ग्राम पंचायत सलैया क्षेत्र में संचालित एक स्क्रैप दुकान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित दुकान के संचालन से जुड़े दस्तावेजों और अनुमति की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुकान के संचालन को लेकर ग्राम पंचायत की अनुमति और भूमि उपयोग संबंधी नियमों की जांच आवश्यक है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है तथा संबंधित संचालक की ओर से इस विषय में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि क्षेत्र में कानून का पालन सुनिश्चित कराना है।

उन्होंने मांग की है कि—

  • सभी स्क्रैप दुकानों का सत्यापन किया जाए।
  • वैध लाइसेंस और आवश्यक अनुमति की जांच हो।
  • खरीदे जाने वाले स्क्रैप का रिकॉर्ड देखा जाए।
  • यदि किसी प्रकार की अनियमितता मिले तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

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कुछ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी चोरी और कथित अवैध स्क्रैप कारोबार से संबंधित शिकायतें प्रशासन और पुलिस तक पहुंचाई थीं।

उनका आरोप है कि अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ा है।

हालांकि पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।

सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

विशेषकर किसानों का कहना है कि यदि कृषि उपकरण और मोटर पंप जैसी आवश्यक सामग्री चोरी होती है, तो इसका सीधा असर खेती और आजीविका पर पड़ता है।

उन्होंने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने की भी मांग की है।

जनसुनवाई में उठाया जाएगा मामला

क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया है कि वे आगामी जनसुनवाई में जिला प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे।

बताया जा रहा है कि नागरिक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निम्न मांगें रखेंगे—

  • क्षेत्र में संचालित सभी स्क्रैप दुकानों की जांच।
  • बिना अनुमति संचालित प्रतिष्ठानों पर नियमानुसार कार्रवाई।
  • चोरी की घटनाओं की प्रभावी जांच।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
  • चोरी के मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करता है तो इससे लोगों का विश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी व्यापारी नियमों के अनुसार कार्य कर रहे हैं तो जांच से उनकी स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

स्क्रैप कारोबार के लिए क्या हैं सामान्य नियम?

विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रैप कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को सामान्यतः स्थानीय निकाय, व्यापार पंजीकरण, कर संबंधी नियमों तथा अन्य लागू कानूनों का पालन करना होता है।

इसके अलावा कई मामलों में खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखना, विक्रेता की पहचान दर्ज करना और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

यदि किसी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायत मिलती है तो संबंधित विभाग जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।

क्षेत्रवासियों की मुख्य मांगें

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के सामने निम्न प्रमुख मांगें रखने की बात कही है—

  • सभी स्क्रैप दुकानों का दस्तावेजी सत्यापन।
  • कथित अवैध प्रतिष्ठानों की जांच।
  • चोरी की घटनाओं की प्रभावी रोकथाम।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
  • शिकायतों का समयबद्ध निराकरण किया जाए।
  • यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता मिले तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

सारनी और घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में कथित अवैध स्क्रैप कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों का आरोप है कि चोरी की घटनाओं में वृद्धि हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है तथा संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। अब क्षेत्रवासियों की नजर आगामी जनसुनवाई और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यदि प्रशासन जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है, तो इससे न केवल विवाद का समाधान होगा बल्कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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