सारनी में कचरा घर हटाने पर विवाद: पार्षद ज्योति नागले पर मनमानी के आरोप, वार्डवासियों ने जताया विरोध, सीएमओ ने आदेश से किया इनकार
संवाददाता: संदीप तायड़े, सारनी/घोड़ाडोंगरी (बैतूल)
सारनी (बैतूल)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के सारनी नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-5 (सुनील गावस्कर वार्ड) में कचरा घर (गार्बेज कलेक्शन प्वाइंट) हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय लोगों ने वार्ड पार्षद ज्योति नागले पर बिना लिखित आदेश के कचरा घर तुड़वाने, विरोध करने वाले नागरिकों से अभद्र व्यवहार करने तथा मनमाने ढंग से कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर पार्षद का कहना है कि उन्होंने वार्ड में फैली गंदगी को रोकने और लोगों को कचरा वाहन में ही कचरा डालने के लिए यह कदम उठाया है।
इस पूरे मामले ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली, सफाई व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मामले में नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने भी स्पष्ट किया है कि कचरा घर तोड़ने का कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, सारनी नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-5 में वर्षों से एक कचरा घर बना हुआ था, जहां आसपास के रहवासी अपने घरों का कचरा एकत्रित करते थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वार्ड की कई गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां नियमित रूप से कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंच पाते। ऐसे में यह कचरा घर सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ था।
आरोप है कि हाल ही में वार्ड पार्षद ज्योति नागले ने बिना पूर्व सूचना और बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के इस कचरा घर को हटवा दिया। जैसे ही इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को लगी, उन्होंने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया।
विरोध के दौरान हुई बहस
स्थानीय लोगों का दावा है कि जब महिलाओं और युवाओं ने कचरा घर हटाने के निर्णय पर सवाल उठाए, तो मौके पर मौजूद पार्षद और नागरिकों के बीच तीखी बहस हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें पार्षद और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोकझोंक दिखाई देने की बात कही जा रही है।
हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
वार्डवासियों का आरोप—बिना विकल्प हटाया गया कचरा घर
वार्ड के कई रहवासियों का कहना है कि कचरा घर हटाने से पहले नगर पालिका या जनप्रतिनिधि द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
उनका कहना है कि वार्ड की संकरी गलियों में कचरा वाहन नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में यदि सामुदायिक कचरा संग्रहण स्थल ही समाप्त कर दिया जाएगा तो लोगों के सामने कचरा निस्तारण की समस्या खड़ी हो जाएगी।
नागरिकों का कहना है कि इससे लोग मजबूरी में सड़क किनारे, खाली प्लॉटों या सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंक सकते हैं, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होगी।
लोगों ने जताई स्वास्थ्य संबंधी चिंता
स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई तो वार्ड में गंदगी बढ़ सकती है।
बारिश के मौसम में खुले में कचरा जमा होने से दुर्गंध, मच्छरों की संख्या बढ़ने और संक्रमण फैलने जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
वार्डवासियों का कहना है कि नगर पालिका को पहले नई व्यवस्था बनानी चाहिए थी, उसके बाद पुरानी व्यवस्था हटाई जानी चाहिए थी।
पार्षद ज्योति नागले ने क्या कहा?
वार्ड पार्षद ज्योति नागले ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम वार्ड में सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया।
उन्होंने कहा—
“हाँ, मैंने वार्ड क्रमांक-5 में बने बड़े कचरा घर को हटवाया है। सभी लोग वहीं कचरा फेंक रहे थे, जिससे वार्ड में गंदगी फैल रही थी। पूर्व सीएमओ द्वारा लगभग एक माह पहले मौखिक रूप से निर्देश दिए गए थे कि वार्डों में खुले स्थानों पर कचरा एकत्रित नहीं होना चाहिए और लोगों को कचरा वाहन में ही कचरा डालने के लिए प्रेरित किया जाए। इसी कारण कचरा घर हटवाया गया।”
पार्षद का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना था, न कि किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना।
सीएमओ ने लिखित आदेश से किया इनकार
इस मामले में नगर पालिका परिषद सारनी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी हितेश शाक्य ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने स्पष्ट किया—
“कचरा घर तोड़ने जैसा कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था। पूर्व सीएमओ द्वारा केवल यह कहा गया था कि वार्डों में कचरा खुले में एकत्रित न होने दिया जाए तथा लोगों को कचरा वाहन में कचरा डालने के लिए प्रेरित किया जाए।”
सीएमओ के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि यदि कोई लिखित आदेश नहीं था तो कचरा घर हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
नगर पालिका की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रत्येक घर तक नियमित रूप से कचरा वाहन पहुंच रहा होता तो शायद इस प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं होती।
लोगों का कहना है कि नगर पालिका को पहले डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी बनानी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन की तैयारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे नगर पालिका परिषद के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
कुछ नागरिकों ने बताया कि वे सामूहिक रूप से नगर पालिका अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले में उचित कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करेंगे।
हालांकि अभी तक नगर पालिका की ओर से इस संबंध में किसी प्रस्तावित बैठक या निर्णय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सफाई व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन एक महत्वपूर्ण विषय है।
यदि किसी सामुदायिक कचरा संग्रहण केंद्र को हटाया जाता है तो उससे पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक होता है ताकि नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
साथ ही किसी भी प्रशासनिक निर्णय में स्थानीय नागरिकों की राय लेना और पारदर्शिता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
आगे क्या हो सकता है?
अब इस मामले में नगर पालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
संभावना है कि नगर पालिका अधिकारी वार्ड की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर वैकल्पिक समाधान तलाशें।
यदि नागरिकों द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है तो प्रशासन पूरे मामले की जांच भी कर सकता है।
निष्कर्ष
सारनी नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-5 में कचरा घर हटाए जाने का मामला स्थानीय स्तर पर विवाद का विषय बन गया है। एक ओर वार्डवासियों का आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के कचरा घर हटाने से सफाई व्यवस्था प्रभावित होगी और विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, वहीं पार्षद ज्योति नागले का कहना है कि यह कदम स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया। दूसरी ओर नगर पालिका के सीएमओ ने स्पष्ट किया है कि कचरा घर हटाने का कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस विवाद का समाधान किस प्रकार करता है और वार्डवासियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए क्या कदम उठाए जाते हैं।
