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बरसात में कीचड़ से त्रस्त ग्राम पडौर के ग्रामीण, सोन नदी मार्ग हुआ दुर्गम

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Published On: 31 July 2026
Villagers walking through a muddy and waterlogged road connecting Pador village to the Son River in Anuppur district after heavy monsoon rains, highlighting poor rural road conditions and disrupted connectivity
— Villagers walking through a muddy and waterlogged road connecting Pador village to the Son River in Anuppur district after heavy monsoon rains, highlighting poor rural road conditions and disrupted connectivity

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बरसात में कीचड़ से त्रस्त ग्राम पडौर के ग्रामीण, सोन नदी मार्ग हुआ दुर्गम

वार्ड नंबर 9 से सोन नदी तक जाने वाली सड़क बदहाल, स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित, ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत की उठाई मांग

संवाददाता: अभिषेक त्रिवेदी, अनूपपुर
अनूपपुर।
जनपद पंचायत अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत पडौर के वार्ड क्रमांक 9 में मुख्य मार्ग से स्कूल टोला होते हुए बैगन टोला तिराहा और वहां से सोन नदी तक जाने वाला सड़क मार्ग लगातार हो रही बारिश के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और जलभराव होने से आवागमन बेहद कठिन हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग कई बस्तियों के लिए जीवनरेखा की तरह है, लेकिन बरसात के मौसम में इसकी स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क लंबे समय से मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही है। हर वर्ष बारिश के दौरान सड़क की यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों और मरीजों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कीचड़ और जलभराव ने बढ़ाई मुश्किलें

लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पर कई स्थानों पर पानी भर गया है। सड़क की मिट्टी बह जाने से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और पूरा मार्ग दलदल में तब्दील हो गया है। कई जगहों पर वाहन फंस जाते हैं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को फिसलने का खतरा बना रहता है।

ग्रामीण बताते हैं कि सुबह और शाम के समय लोगों को घर से निकलने में सबसे अधिक परेशानी होती है। बारिश के बाद सड़क पर इतना अधिक कीचड़ जमा हो जाता है कि पैदल चलने वालों के पैर तक धंस जाते हैं। कई बार लोग फिसलकर गिर भी चुके हैं।

स्कूली बच्चों के लिए बना सबसे बड़ी समस्या

इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य सड़क से स्कूल टोला होकर गुजरने वाला यह रास्ता विद्यार्थियों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है।

बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े और किताबें भी खराब हो जाती हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि सड़क की शीघ्र मरम्मत नहीं कराई गई तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई छोटे बच्चे स्कूल जाने से डरने लगे हैं क्योंकि फिसलन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

महिलाएं और बुजुर्ग भी परेशान

सड़क की खराब स्थिति का सबसे अधिक असर महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। घरेलू कार्यों के लिए बाजार जाने वाली महिलाओं को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। वहीं बुजुर्गों के लिए इस मार्ग पर चलना बेहद कठिन हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना पड़े तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। खराब सड़क के कारण वाहन समय पर गांव तक नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी होती है।

सोन नदी किनारे बसे परिवारों के लिए यही एकमात्र संपर्क मार्ग

ग्रामीणों के अनुसार, सोन नदी के किनारे बसे परिवारों के लिए यही सड़क मुख्य संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से लोग खेती-किसानी के कार्यों के लिए खेतों तक पहुंचते हैं और आवश्यक सामग्री का आवागमन भी इसी मार्ग से होता है।

बारिश के मौसम में जब सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल जाती है, तब लोगों का गांव और मुख्य सड़क से संपर्क लगभग टूट जाता है। किसानों को खेतों तक कृषि उपकरण और आवश्यक सामग्री पहुंचाने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

दुर्घटनाओं का बढ़ा खतरा

सड़क पर बने गहरे गड्ढे और फिसलन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से जोखिम में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।

रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि सड़क पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है। पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

हर साल दोहराई जाती है यही समस्या

ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या नई नहीं है। प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान यही स्थिति उत्पन्न होती है। बारिश शुरू होते ही सड़क की ऊपरी परत बह जाती है और पूरा मार्ग कीचड़ से भर जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक केवल अस्थायी मरम्मत कर औपचारिकता निभाई जाती रही है। बरसात समाप्त होने के बाद थोड़ी-बहुत मिट्टी डाल दी जाती है, लेकिन अगले मानसून में फिर वही स्थिति बन जाती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मार्ग का स्थायी निर्माण ही इस समस्या का समाधान हो सकता है।

ग्रामीणों ने कई बार लगाई गुहार

स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत अनूपपुर और संबंधित अधिकारियों को सड़क की मरम्मत के लिए आवेदन दिए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले यदि सड़क पर मुरूम और बजरी डाल दी जाती तो आज इतनी गंभीर स्थिति नहीं बनती।

लोगों का कहना है कि प्रशासन को बारिश से पहले संवेदनशील ग्रामीण सड़कों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य कराना चाहिए ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

मिट्टी, मुरूम और बजरी डालने की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस सड़क पर मिट्टी, मुरूम और बजरी डलवाई जाए ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके। साथ ही सड़क के गड्ढों को भरकर जल निकासी की उचित व्यवस्था भी की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी तो सड़क पर पानी जमा नहीं होगा और भविष्य में सड़क जल्दी खराब भी नहीं होगी।

जनप्रतिनिधियों से भी लगाई मदद की गुहार

ग्रामवासियों ने पंचायत प्रतिनिधियों, जनपद पंचायत के अधिकारियों और जिला प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक सड़क नहीं बल्कि कई परिवारों की दैनिक जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क की मरम्मत शीघ्र नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।

ग्रामीणों की जुबानी

स्थानीय निवासी कहते हैं,

“बारिश शुरू होते ही यह सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल जाती है। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल भेजना चिंता का विषय बन गया है। कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। प्रशासन को जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत करानी चाहिए।”

एक अन्य ग्रामीण ने कहा,

“सोन नदी तक जाने का यही मुख्य रास्ता है। बरसात में यहां से निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो अस्पताल ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।”

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

  • सड़क के गड्ढों की तत्काल मरम्मत की जाए।
  • मार्ग पर मिट्टी, मुरूम एवं बजरी डलवाई जाए।
  • जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
  • सड़क का पक्कीकरण कर स्थायी समाधान किया जाए।
  • बरसात के दौरान नियमित निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त मार्गों की समय पर मरम्मत कराई जाए।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा

ग्राम पंचायत पडौर के ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग और प्रशासन समय रहते आवश्यक कदम उठाते हैं तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत अनूपपुर और पंचायत प्रतिनिधियों से मांग की है कि इस मार्ग का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बरसात के मौसम में लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

 

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