नवागढ़ में वर्षायोग (चातुर्मास) कलश स्थापना श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न, देशभर से उमड़े श्रद्धालु
अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में गुरु पूर्णिमा पर धर्म, साधना और संयम का संदेश; मुनिश्री मंगलानंद सागर एवं मुनिश्री मंगल सागर महाराज का चातुर्मास स्थापना समारोह हुआ भव्य
रिपोर्ट: मनोज जैन नायक
मुरैना/नवागढ़।
मुरैना जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वर्षायोग (चातुर्मास) कलश स्थापना एवं गुरु भक्ति महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की परंपरा के प्रभावक संतों के सान्निध्य में आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु भक्ति, जिनवाणी आराधना एवं धर्म साधना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
समूचा नवागढ़ क्षेत्र धार्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया। मंदिर परिसर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। भक्ति गीतों, मंगलाचरण, पूजन-अर्चन और जयघोषों के बीच आयोजित इस समारोह ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। चातुर्मास स्थापना के साथ ही चार माह तक चलने वाली धार्मिक गतिविधियों का शुभारंभ भी हुआ।
मुनिश्री मंगलानंद सागर एवं मुनिश्री मंगल सागर महाराज का हुआ चातुर्मास स्थापना समारोह
सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित इस मांगलिक अवसर पर मुनिश्री सरल सागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री मंगलानंद सागर महाराज एवं मुनिश्री मंगल सागर महाराज के वर्षायोग (चातुर्मास) स्थापना का विधिवत आयोजन किया गया।
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु में मुनिराज एक ही स्थान पर विराजमान होकर धर्मोपदेश, स्वाध्याय, तप एवं साधना के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत नवागढ़ अतिशय क्षेत्र को इस वर्ष भी चातुर्मास स्थल बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, नवागढ़ बना आस्था का केंद्र

मनोकामना पूर्ण करने वाले अतिशयकारी श्री अरनाथ भगवान की पावन नगरी नवागढ़ में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने भगवान अरनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा गुरुजनों के सान्निध्य में जिनवाणी श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। समाज के सभी वर्गों—युवा, महिलाएं, वरिष्ठजन एवं बच्चों—ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
आयोजन स्थल पर अनुशासित व्यवस्था, भक्ति का वातावरण तथा श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता ने समारोह को अत्यंत गरिमामयी बना दिया।
चरण प्रक्षालन एवं जिनवाणी समर्पण का मिला सौभाग्य
धार्मिक आयोजन के दौरान पूज्य मुनिराजों के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य श्री राहुल जैन एवं परिवार, फरीदाबाद को प्राप्त हुआ।
इसी प्रकार जिनवाणी समर्पण का पुण्य लाभ ब्रह्मचारी जयकुमार, निशांत, शिखरचंद एवं पुष्पा परिवार तथा श्री गिरीश कुमार जैन एवं श्रीमती पूनम देवी, अहमदाबाद को प्राप्त हुआ।
जैन परंपरा में चरण प्रक्षालन एवं जिनवाणी समर्पण को अत्यंत पुण्यदायी धार्मिक कार्य माना जाता है। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर इन धार्मिक विधियों में सहभागिता निभाई।
मुनिश्री ने दिया आत्मचिंतन, संयम और साधना का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिश्री ने कहा कि चातुर्मास केवल साधु-संतों के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रावक-श्राविका के लिए आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि, संयम, स्वाध्याय और साधना का स्वर्णिम अवसर है।
उन्होंने कहा कि वर्षायोग के चार महीनों में व्यक्ति को अपने जीवन का आत्ममंथन करना चाहिए तथा धार्मिक साधना के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा—
“चातुर्मास आत्मकल्याण का पर्व है। इस अवधि में व्यक्ति को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए धर्म, ध्यान और स्वाध्याय में अधिक समय देना चाहिए।”
उन्होंने समाज से आग्रह किया कि धार्मिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च, दिखावा एवं आडंबर से बचते हुए सादगी और आध्यात्मिकता को अपनाएं।
भौतिकता से दूर रहकर धर्म के मूल स्वरूप को अपनाने की प्रेरणा
अपने प्रवचन में मुनिश्री ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि आज का समाज भौतिक सुख-सुविधाओं और बाहरी चकाचौंध की ओर तेजी से आकर्षित हो रहा है। इसका प्रभाव धार्मिक आयोजनों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां कई बार आध्यात्मिकता की अपेक्षा प्रदर्शन और अर्थप्रधानता अधिक दिखाई देती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि—
- धर्म का उद्देश्य प्रदर्शन नहीं, आत्मशुद्धि है।
- धार्मिक आयोजन समाज को संयम, सेवा और सदाचार की प्रेरणा दें।
- जीवों की विराधना से बचते हुए करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए।
- धर्म तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति के आचरण में दिखाई दे।
मुनिश्री ने कहा कि मोक्षमार्ग की साधना सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र से ही संभव है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को धर्म को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर जीवन में उतारना चाहिए।
इन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ कलश स्थापना का सौभाग्य
वर्षायोग कलश स्थापना समारोह में विभिन्न श्रद्धालुओं ने बोली के माध्यम से कलश स्थापना का पुण्य अर्जित किया।
कलश प्राप्तकर्ताओं में प्रमुख रूप से—
- प्रथम कलश – श्री गिरीश कुमार एवं श्रीमती पूनम देवी (अहमदाबाद)
- द्वितीय कलश – श्री निर्मल कुमार (सनी) जैन (रेवाड़ी)
- तृतीय कलश – श्री संतोष कुमार एवं श्री संजीव कुमार (बीना)
- चतुर्थ कलश – श्री राजशेखर, श्रीमती कुसुम जैन एवं श्री मनोज जैन (सोजना)
- पंचम कलश – श्री प्रमोद चौधरी परिवार (कोलारस)
- षष्ठ कलश – श्री अभिषेक कुमार (ग्वालियर)
इन सभी श्रद्धालुओं का समाज द्वारा अभिनंदन किया गया।
नवागढ़ गुरुकुलम् एवं समितियों ने संभाली व्यवस्थाएं
इतने विशाल धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र समिति, चातुर्मास समिति, नवागढ़ गुरुकुलम्, श्री पुष्पेंद्र कुमार एवं संगीतकार चक्रेश सोजना सहित समस्त कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, पेयजल, सुरक्षा, पार्किंग तथा धार्मिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की गईं। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन एवं सेवा भावना का उत्कृष्ट परिचय दिया।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु भक्ति का अनुपम दृश्य

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए गुरु वंदना, पूजन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर परिसर में “जय जिनेंद्र”, “आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की जय” एवं धर्ममय जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं विश्व शांति की मंगलकामना करते हुए पूजा-अर्चना की।
चार माह तक चलेगी धर्म, स्वाध्याय और साधना की श्रृंखला
चातुर्मास स्थापना के साथ ही नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में आगामी चार महीनों तक नियमित रूप से—
- प्रवचन
- स्वाध्याय
- सामायिक
- प्रतिक्रमण
- तप एवं उपवास
- बाल एवं युवा संस्कार शिविर
- धार्मिक प्रतियोगिताएं
- जिनवाणी अध्ययन
- सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम
आयोजित किए जाएंगे। इससे स्थानीय समाज के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भी धर्म साधना का लाभ प्राप्त होगा।
आस्था, अनुशासन और सेवा का बना प्रेरणादायी संगम
समारोह के समापन पर श्रद्धालुओं ने कहा कि नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में आयोजित वर्षायोग स्थापना महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संयम, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा देने वाला उत्सव है।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में गुरु के उपदेशों को आत्मसात कर संयम, करुणा और सदाचार का पालन करे, तो वही सच्ची गुरु भक्ति है।
समारोह में शताधिक श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही और पूरा वातावरण धर्म, भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। आयोजन के सफल समापन पर समाजजनों ने सभी सहयोगियों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
