श्री करौली शंकर महादेव धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य प्रतिमा का भव्य अनावरण, महामंडलेश्वर करौली शंकर दास महाराज ने की प्राण-प्रतिष्ठा
अभिषेक त्रिवेदी की रिपोर्ट।
अनूपपुर। सनातन परंपरा, आध्यात्मिक साधना और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रमुख केंद्र श्री करौली शंकर महादेव धाम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। धाम परिसर में आद्य जगद्गुरु भगवान शंकराचार्य जी की प्रतिमा का अनावरण एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया। इस दिव्य अवसर पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर दास महाराज ने अपने कर-कमलों से प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई।
इस आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु श्री करौली शंकर महादेव धाम पहुंचे। गुरु दीक्षा, ध्यान-साधना एवं आध्यात्मिक शिविर में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने धर्म, ज्ञान और आत्मचिंतन का अनुभव प्राप्त किया। पूरे धाम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्ति भाव से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भगवान शंकराचार्य के जीवन से मिलता है ज्ञान और विवेक का संदेश
प्रतिमा अनावरण के बाद साधकों को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर करौली शंकर दास महाराज ने कहा कि भगवान शंकराचार्य सनातन धर्म के महान पुनरुद्धारक और अद्वैत वेदांत के प्रमुख प्रचारक थे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपरा को नई दिशा प्रदान की और ज्ञान, विवेक तथा आत्म-साक्षात्कार का मार्ग दिखाया।
महाराज श्री ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापना का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था को बढ़ाना नहीं, बल्कि साधकों के भीतर ज्ञान, चेतना और आत्म जागरण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य, संयम, सेवा और साधना के मार्ग को अपनाना चाहिए।
ध्यान और साधना से आत्मिक विकास का मार्ग
श्री करौली शंकर महादेव धाम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक जीवन और आत्मिक उन्नति पर भी विशेष चर्चा की गई। महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में आने वाली अनेक परेशानियों का कारण नकारात्मक विचार और मानसिक अशांति होती है। ध्यान, साधना और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को पहचान सकता है।
उन्होंने कहा कि वैदिक परंपरा में हवन, ध्यान और साधना को मन एवं चेतना को शुद्ध करने का माध्यम माना गया है। आध्यात्मिक अभ्यास से व्यक्ति तनाव, भय और नकारात्मकता से मुक्त होकर शांतिपूर्ण जीवन की ओर बढ़ सकता है।

सनातन संस्कृति को जीवन शैली के रूप में अपनाने का आह्वान
महामंडलेश्वर करौली शंकर दास महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली संपूर्ण व्यवस्था है। इसमें आध्यात्मिक विकास के साथ-साथ मानव कल्याण, सेवा भावना और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दिया गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म, संस्कार और सदाचार को स्थान दें। गुरु के मार्गदर्शन में चलकर व्यक्ति आत्मिक शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है।
गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धाम में आयोजित विशेष कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों ने गुरु पूजन, ध्यान साधना और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने भगवान शंकराचार्य जी की प्रतिमा के दर्शन कर सनातन संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
विशाल भंडारे के साथ हुआ धार्मिक आयोजन का समापन
गुरु पूर्णिमा पर्व पर आयोजित इस भव्य समारोह का समापन विशाल भंडारे और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सफलता के लिए धाम प्रबंधन एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
श्री करौली शंकर महादेव धाम से जुड़े दीक्षित भक्त हनी चौरसिया एवं राजेश सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह कार्यक्रम सनातन संस्कृति, गुरु परंपरा और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धर्म, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
