अवैध होर्डिंग और बैनर लगाने वालों पर Indore Highcourt सख्त, 24 घंटे में हटाने और एफआईआर के निर्देश
शिकायत मिलते ही कार्रवाई के आदेश
शहरों में बिना अनुमति लगाए जा रहे अवैध होर्डिंग, बैनर और विज्ञापन सामग्री को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अवैध होर्डिंग या बैनर की शिकायत मिलने पर नगर निगम और संबंधित अधिकारी 24 घंटे के भीतर उन्हें हटाने की कार्रवाई करें।
इसके साथ ही अवैध तरीके से होर्डिंग लगाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब शहरों में बिना अनुमति लगाए जाने वाले राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों पर कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
Indore Highcourt ने दिए निर्देश
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को जबलपुर खंडपीठ द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए आदेश तथा 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कई स्थानों पर वैध अनुमति लेकर लगाए गए होर्डिंग और विज्ञापन स्ट्रक्चर पर भी बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक विज्ञापन लगाए जा रहे हैं। इससे अधिकृत एजेंसियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और उनके स्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचता है।
वैध होर्डिंग पर अवैध विज्ञापन लगाने वालों पर होगी एफआईआर
याचिका में बताया गया कि कई कंपनियां नगर निगम को निर्धारित शुल्क जमा कर अनुमति प्राप्त यूनिपोल, लॉलीपॉप और अन्य आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करती हैं।
लेकिन कई बार इन अधिकृत होर्डिंग पर बिना अनुमति बैनर, पोस्टर और विज्ञापन लगा दिए जाते हैं। इससे नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ विज्ञापन एजेंसियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल होर्डिंग हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
नगर निगम बनाएगा विशेष टीम
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन ने भी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। भोपाल नगर निगम के होर्डिंग प्रभारी परितोष रंजन परसाई ने कहा कि आदेश के आधार पर शहर में अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों को हटाने के लिए टीम बनाई जाएगी।
नगर निगम अब ऐसे स्थानों की पहचान करेगा जहां बिना अनुमति होर्डिंग या बैनर लगाए गए हैं। इसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
किन होर्डिंग और बैनरों को माना जाएगा अवैध
आउटडोर मीडिया रूल्स-2017 के अनुसार कई प्रकार के विज्ञापन स्ट्रक्चर अवैध माने जाते हैं।
इनमें बिना अनुमति खंभों, पेड़ों या डिवाइडरों पर लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर और कटआउट शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे स्ट्रक्चर भी अवैध माने जाएंगे जिनके लिए पंजीकृत चार्टर्ड या स्ट्रक्चरल इंजीनियर का सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं लिया गया हो।
ऐतिहासिक धरोहरों, राजभवन, हाईकोर्ट और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में लगाए गए विज्ञापन स्ट्रक्चर भी नियमों के खिलाफ हैं।
ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित करने वाले होर्डिंग पर भी रोक
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे होर्डिंग भी हटाए जाएंगे जो यातायात व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों या संवेदनशील मोड़ों के पास लगी तेज रोशनी वाली स्क्रीन, ऐसे विज्ञापन जो रोड साइन बोर्ड या दिशा सूचक बोर्ड को छिपाते हैं, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा फुटपाथ, सर्विस रोड या रोड डिवाइडर पर पैदल यात्रियों का रास्ता रोकने वाले यूनिपोल और विज्ञापन बोर्ड भी हटाए जाएंगे।
याचिका के बाद आया आदेश
दरअसल, इंदौर में एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड, जबलपुर और अन्य लोगों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याचिका में कहा गया था कि कंपनियां नगर निगम से अनुमति लेकर और निर्धारित शुल्क जमा कर आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करती हैं। इसके बावजूद कई बार इन स्ट्रक्चर पर बिना अनुमति बैनर और पोस्टर लगा दिए जाते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने इससे होने वाले आर्थिक नुकसान और स्ट्रक्चर को पहुंचने वाली क्षति का मुद्दा उठाया था।
शहरों में दिखेगा आदेश का असर
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को अवैध होर्डिंग के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
माना जा रहा है कि आदेश का असर इंदौर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में भी दिखाई देगा। प्रशासन द्वारा अवैध विज्ञापन सामग्री हटाने के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
