जैतहरी में हाथियों का आतंक: दीवार गिरने से बुजुर्ग घायल, हाथी देखने गई महिला भी चोटिल
संवाददाता : अभिषेक त्रिवेदी
रिहायशी इलाकों में हाथियों की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत, फसलों और मकानों को नुकसान
अनूपपुर/जैतहरी। जैतहरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों के लगातार विचरण से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है। भोजन की तलाश में हाथियों का समूह रात के समय रिहायशी इलाकों में पहुंचकर मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है और खेतों में खड़ी फसलों को रौंद रहा है।
पिछले दो दिनों में हाथियों के कारण हुई अलग-अलग घटनाओं में एक बुजुर्ग और एक महिला घायल हो गए हैं। दोनों को उपचार के लिए जैतहरी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटनाओं के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
हाथी ने तोड़ी कच्ची दीवार, मलबे में दबे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात हाथियों का समूह जैतहरी नगर से लगे लहरपुर गांव में पहुंच गया। यहां भोजन की तलाश में हाथियों ने 60 वर्षीय बुद्धू पिता बाबूलाल पनिका के कच्चे मकान की दीवार गिरा दी।
दीवार का भारी मलबा घर के अंदर खाट पर सो रहे बुद्धू के ऊपर गिर गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के गश्ती दल ने मौके पर पहुंचकर घायल बुजुर्ग को तत्काल जैतहरी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी के कारण रात के समय घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है।
हाथी देखने की कोशिश में छत से गिरी महिला
हाथियों से जुड़ी दूसरी घटना रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि की है। जैतहरी से करीब 10 किलोमीटर दूर चोई गांव के पडमनिया टोला में दो हाथियों का समूह बस्ती के बीच पहुंच गया।
हाथियों के आने की खबर फैलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इसी दौरान 40 वर्षीय कलावती पति लखन चर्मकार हाथियों को देखने के लिए छत पर चढ़ने लगीं। अचानक सीढ़ी से पैर फिसलने के कारण वह नीचे गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं।
परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल जैतहरी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

दो हिस्सों में बंटा हाथियों का समूह
वर्तमान में हाथियों का समूह दो भागों में बंट गया है। सोमवार सुबह दो हाथियों का दल जैतहरी के चोई गांव से लगे प्लांटेशन क्षेत्र के जंगल में और एक हाथी कुसुमहाई के झंडी टोला जंगल में विश्राम करता पाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार दिन के समय हाथी जंगलों में छिपे रहते हैं और रात होते ही भोजन की तलाश में गांवों की ओर निकल आते हैं। इससे क्षेत्र के लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
फसलों और मकानों को नुकसान, ग्रामीणों में आक्रोश
जैतहरी क्षेत्र में हाथियों द्वारा लगातार खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने और कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त किए जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। हाथियों के डर के कारण कई ग्रामीण रातभर जागकर अपने घरों और खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हाथियों की गतिविधियों से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का समूह रात के समय गांवों की ओर पहुंच जाता है और फसलों को रौंदने के साथ-साथ घरों को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और परिवारों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से केवल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से गश्त बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए। साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा और फसलों व मकानों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
जैतहरी क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। अब लोग प्रशासन और वन विभाग से जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

