मुरैना में धर्मसभा: मुनिश्री उपशांतसागर ने दिया श्रेष्ठ विचारों और सदाचार का संदेश
“झोपड़ी कैसी भी हो, खोपड़ी अच्छी होना चाहिए” — मुनिश्री उपशांतसागर
मुरैना (मनोज जैन नायक)। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आयोजित धर्मसभा में दिगंबर मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में अच्छे विचार, संस्कार और आत्मसंयम अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक मूल्य उसके धन, संपत्ति या बाहरी वैभव से नहीं, बल्कि उसके विवेक, व्यवहार और श्रेष्ठ सोच से तय होता है।
मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का घर छोटा हो या बड़ा, यदि उसके विचार पवित्र और आचरण श्रेष्ठ हैं तो वह सीमित संसाधनों में भी सुखी और आदर्श जीवन जी सकता है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं को पाने की दौड़ में लगा हुआ है, लेकिन वास्तविक शांति आत्मशुद्धि, संयम और अच्छे विचारों से ही प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकार मनुष्य के जीवन में अशांति पैदा करते हैं। भगवान महावीर का संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं निर्माता होता है। अच्छे कर्म, करुणा, क्षमा और आत्मसंयम के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।
मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बाहरी दिखावे की बजाय अपने विचारों, व्यवहार और चरित्र को बेहतर बनाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि यदि बुद्धि धर्म, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले तो छोटी-सी झोपड़ी भी आनंद का धाम बन सकती है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा, “मनुष्य की झोपड़ी कैसी भी हो, लेकिन उसकी खोपड़ी अच्छी होना चाहिए।” इस संदेश के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन में सबसे बड़ा धन अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच है।

पाप कर्म से बचने के लिए अच्छे कर्म जरूरी: जैनाचार्य उदारसागर
धर्मसभा में जैनाचार्य श्री उदारसागर महाराज ने कहा कि प्रत्येक जीव अपने कर्मों का स्वयं निर्माता होता है। जीवन में मिलने वाले सुख-दुःख, मान-सम्मान और परिस्थितियां व्यक्ति के कर्मों का परिणाम होती हैं। यदि मनुष्य पाप कर्मों से बचना चाहता है तो उसे अच्छे कर्मों, सदाचार और आत्मसंयम को अपने जीवन में अपनाना होगा।
आचार्यश्री ने कहा कि केवल पूजा-पाठ करने से ही जीवन में परिवर्तन नहीं आता, बल्कि धर्म का वास्तविक स्वरूप सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, दया, सेवा, गुरुजनों के सम्मान और विनम्र व्यवहार में दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि क्रोध, लोभ, छल, हिंसा और असत्य जैसे कर्म आत्मा को अशांत करते हैं, जबकि क्षमा, त्याग, परोपकार और संयम आत्मा को निर्मल बनाते हैं। मनुष्य को अपने प्रत्येक कार्य और विचार का आत्मावलोकन करना चाहिए।
आचार्यश्री ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन आवश्यक है। ईमानदारी और सदाचार से प्राप्त सफलता ही स्थायी होती है। उन्होंने कहा कि शुभ विचार, शुभ वचन और शुभ आचरण को जीवन का आधार बनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

9 अगस्त को होगी वर्षायोग मंगल कलश स्थापना
आध्यात्मिक वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन (दयेरी वाले) ने बताया कि रविवार, 9 अगस्त को भव्य समारोह के साथ वर्षायोग मंगल कलश स्थापना का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
समिति द्वारा कार्यक्रम की तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। मंगल कलश स्थापना समारोह में देशभर से बड़ी संख्या में गुरु भक्तों और साधर्मी बंधुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
समिति के सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, बैठने की व्यवस्था, धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन सहित अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समाजजनों ने बताया कि वर्षायोग मंगल कलश स्थापना धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

प्रतिदिन हो रहे प्रवचन, गुरुभक्ति और प्रश्न मंच के आयोजन
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के ऑडिटर डॉ. मनोज जैन प्रोफेसर ने बताया कि वर्षायोग के दौरान प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 9:30 बजे तक आचार्यश्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांतसागर महाराज के मंगल प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।
इन प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, अहिंसा और सदाचार का महत्व समझाया जा रहा है।
सायंकाल मंदिर परिसर में गुरुभक्ति, आरती एवं प्रश्न मंच का आयोजन किया जाता है। प्रश्न मंच में सही उत्तर देने वाले बच्चों और मातृशक्ति को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया जाता है।
रात्रि में श्रावकगण और युवा साथी आचार्य संघ की वैयावृत्ति का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आचार्य संघ के सान्निध्य से युवाओं में धर्म के प्रति श्रद्धा, संस्कार और सेवा भावना बढ़ रही है।
वर्षायोग के इन धार्मिक आयोजनों से मुरैना नगर में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
