कास्टिंग डायरेक्टर Gaurav Dave बने रियल लाइफ हीरो, अंगदान से चार लोगों को मिलेगा नया जीवन
दुर्लभ बीमारी के कारण ब्रेन डेथ के बाद परिवार ने लिया साहसिक फैसला, अहमदाबाद भेजा गया हृदय
इंदौर। फिल्मों, टीवी सीरियल और वेब सीरीज में नए चेहरों को पहचान दिलाने वाले 25 वर्षीय कास्टिंग डायरेक्टर Gaurav Dave ने अपने निधन के बाद भी मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। दौर शहर के खजूरी बाजार निवासी गौरव ने अंगदान के माध्यम से चार लोगों को नया जीवन देने का रास्ता बनाया और खुद एक रियल लाइफ हीरो बन गए।
गौरव की जिंदगी फिल्मों की चमक-दमक से जुड़ी हुई थी। वह पर्दे के पीछे रहकर कलाकारों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लेकिन अचानक आई एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
ब्रेन स्ट्रोक के बाद सामने आई दुर्लभ बीमारी
गौरव को अचानक ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि वह एक बेहद दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं।
बताया गया कि यह बीमारी दुनिया में अब तक गिने-चुने मामलों में सामने आई है। इसे विश्व स्तर पर आठवां और भारत में तीसरा मामला बताया गया।
गौरव की स्थिति गंभीर होने के बाद चिकित्सकों ने उनकी ब्रेन सर्जरी की, लेकिन इसके बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
26 जुलाई को चिकित्सकों ने घोषित किया ब्रेन डेथ
लगातार उपचार के बाद भी गौरव की हालत में सुधार नहीं हुआ। 26 जुलाई की सुबह करीब सात बजे चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया।
इस कठिन समय में परिवार ने बेहद भावनात्मक और साहसिक निर्णय लेते हुए गौरव के अंगदान का फैसला लिया। परिवार के इस निर्णय से गौरव के जाने के बाद भी कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगी है।
चार लोगों को मिलेगा जीवनदान
गौरव के अंगदान से चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना है।
गौरव का हृदय अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल भेजा गया, जहां एक मरीज में उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके लिए इंदौर से अहमदाबाद तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
गौरव का लिवर इंदौर के अपोलो अस्पताल में उपचाररत मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा, जबकि दोनों किडनियां चोइथराम अस्पताल में भर्ती दो अलग-अलग मरीजों को जीवनदान देंगी।
परिवार ने समझी अंगदान की महत्ता
गौरव के अंगदान के निर्णय में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के जीतू बागानी ने बताया कि गौरव की बहन वैदही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रितिक चावरे ने परिवार को अंगदान की संभावनाओं और महत्व के बारे में जानकारी दी।
इसके बाद गौरव के पिता सतीश दवे और मां कविता दवे ने मानवता को प्राथमिकता देते हुए अंगदान की सहमति दी।
परिवार के इस निर्णय ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि दुख की घड़ी में भी दूसरों के जीवन को बचाने का संकल्प लिया जा सकता है।
बचपन से थी सिरदर्द की समस्या
गौरव के चचेरे भाई नरेंद्र राठौड़ ने बताया कि जब गौरव नौ वर्ष के थे, तब उन्हें सिरदर्द की समस्या हुई थी। उस समय चिकित्सकों ने इसे माइग्रेन बताया था।
हाल ही में 13 जुलाई को उन्हें अचानक तेज सिरदर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद वह एक दिन में घर लौट आए थे।
लेकिन 15 जुलाई को दोबारा तेज सिरदर्द होने पर उन्हें राजश्री अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई।
16 जुलाई को उनकी ब्रेन सर्जरी की गई। इसी दौरान चिकित्सकों को पता चला कि गौरव को मोयामोया बीमारी थी, जो एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी मानी जाती है।
फिल्मों और वेब सीरीज में बनाया था नाम
गौरव दवे फिल्म और मनोरंजन जगत में तेजी से अपनी पहचान बना रहे थे। वर्ष 2021 से उन्होंने कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में काम शुरू किया था।
इंदौर में शूट हुई अभिनेता विक्की कौशल और सारा अली खान अभिनीत फिल्म “जरा हटके जरा बचके” में उन्होंने कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया था। इस फिल्म के लिए उन्होंने स्थानीय कलाकारों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा उन्होंने कई टीवी सीरियल और वेब सीरीज के लिए कलाकारों का चयन किया। इनमें “बड़ा नाम करेगा”, “सुमन इंदौरी” और “रिवोल्यूशनरी” जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
गौरव ने अभिनय के क्षेत्र में भी कदम रखा था। उन्होंने तेलुगु फिल्म “माय हीरो” में पर्यटक की भूमिका निभाई थी, जबकि “वीडियोकेम स्कैम” वेब सीरीज में भी अभिनय किया था।
पर्दे के पीछे का कलाकार बना जीवन का नायक
गौरव का काम हमेशा नए कलाकारों को अवसर देने से जुड़ा रहा। उन्होंने कई लोगों को मनोरंजन जगत में आगे बढ़ने का मौका दिया। लेकिन अपने अंतिम समय में उन्होंने ऐसा कार्य किया, जिससे चार अनजान लोगों को जीवन की नई शुरुआत मिलेगी।
गौरव दवे अब भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के माध्यम से कई परिवारों में उम्मीद की रोशनी बनी रहेगी।
उनका अंगदान समाज के लिए एक प्रेरणा है कि मानव जीवन की सबसे बड़ी सेवा किसी जरूरतमंद को जीवन देने से बढ़कर नहीं हो सकती।
