मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी के शुभ अवसर पर सिलवानी नगर में भव्य अगवानी की गई। विश्व बंदिनी आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज का चातुर्मास बुधवार बाजार जैन मंदिर में होगा। पढ़ें पूरी खबर।
मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी: ऐतिहासिक एवं भव्य अगवानी, समाज को मिला महान सौभाग्य
रिपोर्ट: वैभव जैन मस्ताना, संवाददाता सिलवानी | दैनिक स्वराज वाणी
सिलवानी। मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी का शुभ अवसर पूरे नगर के लिए ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक गौरव का विषय बन गया। विश्व बंदिनी आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज का ससंघ नगर आगमन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
अखिल दिगंबर जैन समाज सिलवानी ने लगभग 10 किलोमीटर पहले पहुंचकर मुनिश्री की अगवानी की। समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चों ने जयघोष करते हुए गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इस अवसर पर पूरा नगर धार्मिक वातावरण में सराबोर दिखाई दिया।
मुनिश्री का भव्य नगर प्रवेश
मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी के शुभ अवसर पर नगर में उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला। जैसे ही मुनिश्री का ससंघ सिलवानी की सीमा में पहुंचा, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
जैन समाज के सभी वर्गों ने गुरु चरणों में विनम्र भाव से आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरा मार्ग धार्मिक नारों और जयघोष से गूंज उठा।
10 किलोमीटर पहले हुई ऐतिहासिक अगवानी
मुनिश्री के नगर प्रवेश से लगभग 10 किलोमीटर पहले ही जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच गए थे।
इस दौरान—
- महिलाओं ने मंगल गीत गाए।
- युवाओं ने स्वागत की व्यवस्था संभाली।
- बच्चों ने हाथों में ध्वज लेकर स्वागत किया।
- समाज के वरिष्ठजनों ने गुरु चरणों में वंदना की।
मुनिश्री ने सभी श्रद्धालुओं को स्नेहपूर्वक आशीर्वाद प्रदान किया।
सिलवानी समाज को मिला चातुर्मास का सौभाग्य
इस वर्ष मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी का आयोजन होना सम्पूर्ण जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव की बात है।
चातुर्मास वर्षा ऋतु के चार महीनों का वह काल होता है जब संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म प्रवचन, स्वाध्याय, तप, साधना और समाज को संस्कार प्रदान करते हैं।
बुधवार बाजार जैन मंदिर में होगा चातुर्मास
सिलवानी के स्थानीय बुधवार बाजार दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री का चातुर्मास सम्पन्न होगा।
इसके लिए समाज द्वारा—
- आवास व्यवस्था
- प्रवचन स्थल
- धर्मसभा
- श्रद्धालुओं की बैठक
- पूजा-अर्चना
- दैनिक धार्मिक कार्यक्रम
सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा नगर
मुनिश्री की अगवानी के दौरान पूरा नगर धर्ममय दिखाई दिया।
महिलाओं ने मंगल कलश लेकर स्वागत किया।
बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
युवाओं ने अनुशासित व्यवस्था संभाली।
वरिष्ठजनों ने गुरु वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समाज के प्रत्येक सदस्य ने इस ऐतिहासिक अवसर को जीवन का सौभाग्य बताया।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
इस दौरान—
- प्रतिदिन प्रवचन
- स्वाध्याय
- सामूहिक पूजा
- तप
- संयम
- पर्युषण की तैयारियां
- धार्मिक संस्कार
जैसे कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
मुनिश्री के सान्निध्य में हजारों श्रद्धालुओं को धर्म लाभ प्राप्त होगा।
समाज की तैयारियां पूरी
अखिल दिगंबर जैन समाज सिलवानी ने चातुर्मास को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
समाज के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आध्यात्मिक संदेश
मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज के आगमन से पूरे नगर में आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है।
गुरुजनों का सान्निध्य समाज में सदाचार, संयम, अहिंसा और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।
निष्कर्ष
मुनिश्री श्रेयांश सागर महाराज चातुर्मास सिलवानी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को एकजुट करने वाला ऐतिहासिक आध्यात्मिक महोत्सव है। श्रद्धा, सेवा और भक्ति से सम्पन्न यह आयोजन आने वाले चार महीनों तक नगर को धर्ममय बनाए रखेगा। समाज के सभी वर्गों ने मुनिश्री के स्वागत में भाग लेकर यह सिद्ध कर दिया कि गुरु परंपरा आज भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति है।
