श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद में अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद मध्यभारत प्रांत के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा, जिला अध्यक्ष नीलेश धाकड़ सहित गणमान्य अतिथियों ने भागवत भगवान का पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। पढ़ें पूरी खबर।
श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद: अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने किया भागवत भगवान का पूजन, संतों का लिया आशीर्वाद
रिपोर्ट: राजकुमार विश्वकर्मा | शमशाबाद
शमशाबाद। श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद इन दिनों रायसेन जिले की शमशाबाद तहसील के अंतर्गत ग्राम खेरखेड़ी में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर रहे हैं। साध्वी सुश्री रमा किशोरी जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही कथा भक्तों को धर्म, सेवा और संस्कारों का संदेश दे रही है।
इस पावन अवसर पर अखिल आर्यावर्त संघ अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद मध्यभारत प्रांत के प्रांत अध्यक्ष श्री राजकुमार विश्वकर्मा एवं विदिशा जिला अध्यक्ष श्री नीलेश धाकड़ विशेष रूप से कथा स्थल पहुंचे। उन्होंने विधि-विधान से भागवत भगवान का पूजन-अर्चन किया तथा व्यासपीठ का पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन
ग्राम खेरखेड़ी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन एवं कथा का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा पंडाल में उपस्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर रही है।कथा स्थल को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा एवं धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने किया पूजन
कथा स्थल पहुंचने पर अखिल आर्यावर्त संघ अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद मध्यभारत प्रांत के प्रांत अध्यक्ष श्री राजकुमार विश्वकर्मा का आयोजकों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया।इसके पश्चात उन्होंने भागवत भगवान का पूजन-अर्चन किया तथा कथा व्यास के रूप में विराजमान साध्वी सुश्री रमा किशोरी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर विदिशा जिला अध्यक्ष श्री नीलेश धाकड़ भी उपस्थित रहे।
संतों का मिला आशीर्वाद
धार्मिक आयोजन के दौरान सभी अतिथियों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- श्री राजकुमार विश्वकर्मा (प्रांत अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद मध्यभारत प्रांत)
- श्री नीलेश धाकड़ (जिला अध्यक्ष, विदिशा)
- श्री मनमोहन जी धाकड़
- श्री प्रशांत जी धाकड़
- आचार्य श्री कमरलाल जी शास्त्री
सभी ने व्यासपीठ का पूजन कर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।
साध्वी सुश्री रमा किशोरी जी ने दिया आध्यात्मिक संदेश
कथा वाचन के दौरान साध्वी सुश्री रमा किशोरी जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अनेक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए।उन्होंने कहा कि—
- मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य भगवान की भक्ति है।
- सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
- सनातन संस्कृति हमारे जीवन की सबसे बड़ी धरोहर है।
- परिवार और समाज में संस्कारों का संरक्षण आवश्यक है।
- भागवत कथा मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।
उनके मधुर भजनों एवं ओजस्वी वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भारी भीड़
श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद में केवल खेरखेड़ी ही नहीं बल्कि आसपास के अनेक गांवों एवं नगरों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।महिलाएं, युवा, बुजुर्ग एवं बच्चे सभी श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण कर रहे हैं।पूरे आयोजन में अनुशासन एवं सेवा व्यवस्था भी सराहनीय रही।
आयोजकों ने किया आत्मीय स्वागत
कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों का आयोजकों द्वारा पुष्पमालाओं एवं सम्मान के साथ स्वागत किया गया।पूरे आयोजन में ग्रामीणों का उत्साह देखने योग्य रहा।आयोजकों ने बताया कि कथा के समापन तक प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
क्षेत्र में बना भक्तिमय वातावरण
ग्राम खेरखेड़ी सहित संपूर्ण शमशाबाद क्षेत्र में कथा के कारण आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं।
निष्कर्ष
श्रीमद् भागवत कथा शमशाबाद केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाला आध्यात्मिक महोत्सव बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा, जिला अध्यक्ष नीलेश धाकड़, मनमोहन जी धाकड़, प्रशांत जी धाकड़ एवं आचार्य श्री कमरलाल जी शास्त्री की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। साध्वी सुश्री रमा किशोरी जी के प्रेरणादायक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

