माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश 2026 में गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज एवं गुणवल्लभ सागरजी महाराज का ऐतिहासिक स्वागत हुआ। 2000 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति, राजू भाई मुंद्रा द्वारा पांचवीं बार 180 उपवास के लिए पसखाण तथा धर्मसभा की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश: गणीवर्य उदयरत्न सागरजी व गुणवल्लभ सागरजी का ऐतिहासिक प्रवेश, 2000 से अधिक श्रद्धालु हुए शामिल
रिपोर्ट : विक्रम सुराणा
माटुंगा में ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश
माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश के अवसर पर महाराष्ट्र की मायानगरी मुंबई स्थित श्री माटुंगा कच्छी मूर्तिपूजक श्वेतांबर जैन संघ में अचलगच्छ के परम पूज्य गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज साहेब एवं प्रसिद्ध प्रवचनकार गुणवल्लभ सागरजी महाराज साहेब का भव्य एवं ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
पूरा माटुंगा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों, धार्मिक ध्वजों और “जय गुरुदेव” के गगनभेदी जयकारों के बीच विशाल शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखकर हर कोई यही कहता नजर आया—
“यह रैली नहीं, यह तो उदयरत्न सागरजी एवं गुणवल्लभ सागरजी का मेला है।”
जयकारों से गूंज उठा माटुंगा
माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश के दौरान हजारों श्रद्धालु सफेद वेशभूषा में गुरु भक्ति में लीन दिखाई दिए। महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं, युवा धार्मिक ध्वज लेकर चल रहे थे और बच्चों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में मुंबई सहित देशभर से लगभग 2000 से अधिक गुरु भक्तों ने भाग लिया।
धर्मसभा में प्रेरणादायी प्रवचन
शोभायात्रा के पश्चात दोनों गुरुदेव धर्मसभा में विराजमान हुए।
गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज ने कहा
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि चातुर्मास केवल चार माह का धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का महापर्व है।उन्होंने कहा—“चातुर्मास में वाणी और पानी दोनों का विशेष महत्व है। यदि वाणी मधुर हो और पानी का सदुपयोग हो तो जीवन सफल बन जाता है।”उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संयम, तप, स्वाध्याय और सेवा का संदेश दिया।
गुणवल्लभ सागरजी महाराज का संदेश
प्रवचनकार गुणवल्लभ सागरजी महाराज साहेब ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा—“गुरु के बिना जीवन अधूरा है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। गुरु ही जीवन को सही दिशा देते हैं।”उन्होंने गुरु भक्ति, सदाचार और आत्मकल्याण का संदेश दिया।
राजू भाई मुंद्रा ने लिया पांचवीं बार 180 उपवास का संकल्प
माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश के दौरान सबसे प्रेरणादायी क्षण तब आया जब परम गुरु भक्त राजू भाई मुंद्रा (पोर्ट हॉल, मुंबई) ने गुरुदेव के पावन सानिध्य में पांचवीं बार 180 उपवास करने के लिए 16 उपवास का पसखाण ग्रहण किया।यह घोषणा होते ही पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।गुरुभक्तों ने इसे तप, श्रद्धा और आत्मबल का अद्भुत उदाहरण बताया।
देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक आयोजन में मुंबई के अलावा देश के अनेक शहरों से श्रद्धालु पहुंचे।इनमें प्रमुख रूप से—
- विजयवाड़ा
- सूरत
- पंजाब
- लुधियाना
- हैदराबाद
- बाड़मेर
- मोरसीम
- गुड़ामालानी
- हुबली
- दक्षिण मुंबई
सहित भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
प्रमुख पदाधिकारी एवं अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में श्री माटुंगा कच्छी श्वेतांबर मूर्तिपूजक सकल जैन संघ एवं ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारी उपस्थित रहे।विशेष रूप से उपस्थित रहे—
- नयन भाई भेदा
- प्रमुख श्री अखिल भारत अचलगच्छ (विधीपक्ष) श्वेतांबर जैन संघ
- मंगलजी सेठ भीनमाल
- प्रकाश भाई वीरा
- अशोकजी कटारिया
- संघवी मोरसीम
- मिश्रीमलजी बाड़मेर
- ताराचंदजी मोरसीम
- विनोद भाई मोरसीम
- नरपत भाई मोरसीम
- संजय भाई मोरसीम
- सुमित भाई कटारिया
- विपुल भाई मोरसीम
- कल्पेश भाई मोरसीम
- विदित भाई मोरसीम
- मीडिया प्रतिनिधि विक्रम सुराणा
- आशीष भाई मोरसीम
- सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रदीप भाई
सभी ने गुरुदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन चार महीनों में साधु-साध्वियां एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म प्रवचन, तप, स्वाध्याय और साधना के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं।
श्रद्धालु भी इस दौरान—
- उपवास
- आयंबिल
- एकासन
- सामायिक
- प्रतिक्रमण
- स्वाध्याय
जैसी धार्मिक आराधनाएं करते हैं।
निष्कर्ष
माटुंगा चातुर्मास मंगल प्रवेश केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा, तप और गुरु भक्ति का विराट संगम सिद्ध हुआ। गणीवर्य उदयरत्न सागरजी महाराज एवं गुणवल्लभ सागरजी महाराज के प्रेरणादायी संदेशों ने हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की।राजू भाई मुंद्रा द्वारा पांचवीं बार 180 उपवास का संकल्प इस आयोजन का सबसे प्रेरणादायी क्षण रहा।पूरे आयोजन ने मुंबई के धार्मिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम की।
