छात्र संघ चुनाव मध्य प्रदेश को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जल्द छात्र संघ चुनाव कराने की मांग करते हुए शासन और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानिए पूरा मामला।
छात्र संघ चुनाव मध्य प्रदेश: युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज आखिर क्यों दबाई जा रही है?
विशेष संवाददाता : राजकुमार विश्वकर्मा
छात्र संघ चुनाव मध्य प्रदेश: भोपाल से उठी बड़ी मांग
भोपाल। छात्र संघ चुनाव मध्य प्रदेश का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। लंबे समय से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव आयोजित नहीं किए गए हैं। इससे लाखों छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर होते जा रहे हैं।
इस विषय को लेकर अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद, मध्यभारत प्रांत के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने सरकार, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव कराने की मांग की है।उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र चुनावों की घोषणा नहीं हुई तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा।
राजकुमार विश्वकर्मा ने सरकार से पूछा बड़ा सवाल
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि छात्र संघ चुनाव केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं बल्कि लोकतंत्र की पहली पाठशाला हैं।उन्होंने कहा—
“मध्य प्रदेश में छात्र संघ चुनाव न होना युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। आखिर शासन और प्रशासन इस विषय पर गंभीर क्यों नहीं है? विश्वविद्यालयों के कुलपति और जिम्मेदार अधिकारी इस विषय पर चुप क्यों हैं? यदि जल्द छात्र संघ चुनाव आयोजित नहीं कराए गए तो अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगी।”
उनके इस बयान के बाद प्रदेशभर में छात्र राजनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
छात्र संघ चुनाव क्यों जरूरी हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र संघ चुनाव भविष्य के नेतृत्व की नींव रखते हैं।इन्हीं छात्र संगठनों से आगे चलकर कई जनप्रतिनिधि, विधायक, सांसद, मंत्री और सामाजिक नेता तैयार होते हैं।छात्र संघ चुनाव होने से—
- छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार मिलते हैं।
- कॉलेजों की समस्याएं मजबूती से उठती हैं।
- प्रशासन छात्रों के प्रति जवाबदेह बनता है।
- नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
- छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत होता है।
चुनाव नहीं होने से क्या नुकसान हो रहा है?
प्रदेश के अधिकांश सरकारी और निजी महाविद्यालयों में छात्रों की अनेक समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।इनमें प्रमुख हैं—
- फीस वृद्धि
- छात्रवृत्ति में देरी
- परीक्षा परिणामों में विलंब
- कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
- पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं की कमी
- छात्रावास संबंधी समस्याएं
चुने हुए छात्र प्रतिनिधि नहीं होने के कारण इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने वाला कोई मंच उपलब्ध नहीं है।
शासन और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
राजकुमार विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस विषय पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।हर वर्ष चुनाव टालने के लिए कभी प्रशासनिक कारण, कभी कानून व्यवस्था और कभी अन्य तकनीकी कारणों का हवाला दिया जाता है।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
राजनीतिक इच्छाशक्ति पर भी उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र राजनीति हमेशा से बड़े नेताओं की पहली सीढ़ी रही है।ऐसे में लंबे समय से चुनाव नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।कई जानकारों का कहना है कि छात्र राजनीति के प्रभाव और उसके संभावित परिणामों को देखते हुए चुनावों को लगातार टाला जा रहा है।
युवा सशक्तिकरण के दावों पर सवाल
राज्य सरकार लगातार युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और रोजगार की बात करती है।लेकिन छात्र संगठनों का कहना है कि यदि युवाओं को नेतृत्व चुनने का अधिकार ही नहीं मिलेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे मजबूत होगी?युवाओं का मानना है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं बल्कि नेतृत्व निर्माण की प्रक्रिया भी है।
आंदोलन की चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द छात्र संघ चुनावों की घोषणा नहीं की गई तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।संगठन का कहना है कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की है।
निष्कर्ष
छात्र संघ चुनाव मध्य प्रदेश अब केवल चुनाव कराने या न कराने का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों, नेतृत्व निर्माण और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।अब सभी की नजर राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन पर है कि वे इस विषय पर क्या निर्णय लेते हैं।यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो प्रदेश में छात्र आंदोलन तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
