गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव का शुभारंभ, कृष्णा मां ने दिए जीवन को आनंदमय बनाने के सूत्र
अनीस कुमार खाचरौद ,की रिपोर्ट
आष्टा। ब्रह्मानंद जन सेवा संघ, मां कृष्णा धाम मालिपुरा आष्टा के पावन तत्वावधान में एवं परम पूज्य कृष्णा मां के सानिध्य में आयोजित पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। महोत्सव के प्रथम दिवस पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों गुरु भक्तों ने दिव्य सत्संग का लाभ लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परम पूज्य कृष्णा मां द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित हरीमन जी शर्मा, हिमाचल प्रदेश सहित अनेक गणमान्य अतिथि और श्रद्धालु उपस्थित रहे। सत्संग के दौरान कृष्णा मां ने अपनी अमृतमयी और ओजस्वी वाणी से भक्तों को जीवन में विश्वास, संतोष और भक्ति का महत्व समझाया।
भगवान पूजा से अधिक भरोसे और विश्वास से प्राप्त होते हैं
कृष्णा मां ने सत्संग में कहा कि भगवान केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि सच्चे विश्वास और पूर्ण समर्पण से प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति भले ही कम पूजा करे, लेकिन भगवान के प्रति उसका भरोसा और विश्वास अटूट होना चाहिए।
उन्होंने भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रहलाद ने भगवान पर पूर्ण विश्वास रखा, इसी कारण भगवान ने हर कठिन परिस्थिति में उनकी रक्षा की और अंत में उन्हें अपने स्वरूप के दर्शन भी कराए।
कृष्णा मां ने कहा कि परमात्मा आस्था और विश्वास का विषय हैं। भक्त धन्ना जाट ने भी अपने विश्वास के बल पर भगवान को प्रकट कर लिया था। यदि व्यक्ति को भगवान और गुरु की वाणी पर पूर्ण विश्वास होता है, तो जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाइयों में भी उसे शक्ति और मार्गदर्शन मिलता है।
उन्होंने कहा कि भक्त का भाव होना चाहिए—
“तेरे दर पर आना मेरा काम था,
मेरी बिगड़ी बनाना अब तेरा काम है।
छोड़ दी कश्ती मैंने अब तेरे नाम पर,
अब किनारे लगाना तेरा काम है।”
मानव जीवन एक गणित की तरह है
सत्संग में कृष्णा मां ने मानव जीवन को गणित के समान बताते हुए कहा कि जीवन में हमेशा जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी घटनाएं चलती रहती हैं।
उन्होंने समझाया कि जीवन का पहला सूत्र जोड़ है, जिसमें मनुष्य अपने जीवन में अच्छे मित्रों, सकारात्मक विचारों, रिश्तों और संस्कारों को जोड़ता है। दूसरा सूत्र घटाव है, जिसमें व्यक्ति को अपने जीवन से बुराइयों, नकारात्मक सोच, गलत आदतों और अनावश्यक इच्छाओं को कम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में गुणा का अर्थ है अपनी खुशियों, प्रेम, सेवा और आनंद को बढ़ाना। वहीं भाग का अर्थ है अपने दुखों और परेशानियों को बांटकर जीवन को सरल और आनंदमय बनाना।
हर परिस्थिति में संतुष्ट रहना सीखें
कृष्णा मां ने कहा कि मनुष्य को हर परिस्थिति में प्रसन्न और संतुष्ट रहने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक शिष्य ने अपने गुरु को दूध के लिए गाय दान की।
गुरु ने कहा कि अब दूध मिलेगा, यह अच्छी बात है। कुछ समय बाद जब शिष्य गाय वापस मांगने आया तो गुरु ने कहा कि अब अच्छा हुआ, गाय की सेवा, चारा डालने और गोबर उठाने की जिम्मेदारी से मुक्ति मिलेगी।
इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जीवन में परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन मनुष्य का दृष्टिकोण सकारात्मक होना चाहिए। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतोष रखना सीख लेता है, वह हमेशा आनंदित रहता है।

भक्ति से जीवन की परेशानियां होती हैं सरल
कृष्णा मां ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में परमात्मा की भक्ति का होना आवश्यक है। भक्ति मनुष्य को मानसिक शक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में भक्ति और विश्वास मौजूद है तो कठिन परिस्थितियां भी अनुकूल लगने लगती हैं। वहीं भक्ति के अभाव में अच्छी परिस्थितियां भी परेशानी और तनाव का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गुरु और परमात्मा के प्रति विश्वास रखते हुए सेवा, सदाचार और अच्छे कर्मों के मार्ग पर आगे बढ़ें।
हजारों भक्तों ने लिया सत्संग का लाभ
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सत्संग का लाभ लिया। आयोजन स्थल पर भक्ति, आध्यात्मिकता और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
आयोजकों ने बताया कि पांच दिवसीय महोत्सव में विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु प्रतिदिन सत्संग और गुरु वचनों का लाभ प्राप्त करेंगे।
