Gwalior। किलागेट सोड़ा का कुआं स्थित श्री वासुपूज्य जैन महिला मंडल एवं दिगंबर जैन मंदिर कमेटी ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं वीर शासन जयंती महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो रहा है। आयोजन के पांचवें दिन शनिवार को धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच इंद्रध्वज विधान की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर भगवान जिनेंद्र की आराधना की। इस अवसर पर इंद्र-इंद्राणियों द्वारा जिनालयों पर विधि-विधान से ध्वजा चढ़ाई गई तथा इंद्रध्वज मंडल की परिक्रमा कर भगवान के चरणों में नमन किया गया।
इंद्रों ने की भगवान जिनेंद्र की विशेष पूजा
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि इंद्रध्वज महामंडल विधान के पांचवें दिन विधानाचार्य पंडित अनुभव शास्त्री एवं पंडित अमन शास्त्री के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।
सौधर्म इंद्र महेश चंद्र जैन, कुबेर यश जैन, महायज्ञ नायक इंद्र देव जैन सहित अन्य इंद्र-इंद्राणियों एवं श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्यों से भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना की। विशेष मंत्रोच्चार के साथ मध्यलोक के अकृत्रिम जिन चैत्यालयों की भक्ति करते हुए मांगलिक ध्वजाएं अर्पित की गईं।
इसके बाद इंद्र-इंद्राणियों ने इंद्रध्वज मंडप की सात परिक्रमाएं कर भगवान जिनेंद्र को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया।

भक्ति गीतों पर झूमे श्रद्धालु
इंद्रध्वज विधान स्थल पर संगीतमय भजनों का आयोजन भी किया गया। भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने “कर लो जिनवर का गुणगान”, “रोम-रोम पुलकित हो जाए”, “तुमसे लागी लगन, ले लो अपनी शरण”, “पारस प्यारा”, “केसरिया, आज हमारो मन केसरिया”, “चंदन के पलना में झूले मोरे वीरा” और “मेरे महावीर झूले पलना” जैसे भजनों पर भक्ति भाव से सहभागिता की।
भजनों के दौरान इंद्र-इंद्राणियों ने नृत्य कर अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु भी भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।

मोक्ष आत्मा की परम अवस्था है – अंकुर शास्त्री
विधानाचार्य पंडित अंकुर शास्त्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए मोक्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में मोक्ष का अर्थ जन्म और मरण के चक्र से पूरी तरह मुक्त होना है।
उन्होंने कहा कि मोक्ष आत्मा की वह परम अवस्था है, जहां सभी दुख, मोह और कर्मों के बंधन समाप्त हो जाते हैं और केवल शांति का अनुभव होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मज्ञान, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
पंडित अंकुर शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को सही और गलत का विवेक रखते हुए अपनी वास्तविक आत्मा को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। बिना किसी लालच और फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा भक्ति भाव से प्रभु की आराधना करना आत्मकल्याण का मार्ग है।

धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल
इंद्रध्वज महामंडल विधान के आयोजन में जैन समाज के पदाधिकारी, महिला मंडल की सदस्याएं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान जिनेंद्र की पूजा-अर्चना कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
आयोजन स्थल पर सुबह से ही भक्तों की उपस्थिति रही और धार्मिक मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र हो उठा। महिला मंडल की सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैन समाज के लोगों ने एकजुट होकर इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाया।
आयोजकों ने बताया कि इंद्रध्वज महामंडल विधान जैसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में संस्कार, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
भगवान जिनेंद्र की आराधना के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने धर्म और भक्ति के इस अवसर को अपने जीवन के लिए प्रेरणादायक बताया।
रिपोर्ट: सचिन जैन, प्रवक्ता जैन समाज ग्वालियर
