जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी की जन्म जयंती पर विशेष। 5000 से अधिक भजनों के महान रचयिता, उनकी प्रेरणादायी विरासत, परिवार के संस्कार और राष्ट्र गौरव पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ का विशेष लेख पढ़ें।
जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी: जन्म जयंती पर विशेष
रिपोर्ट: राष्ट्र गौरव राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार, कोटा (राजस्थान)
बकानी (जिला झालावाड़)। जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी का व्यक्तित्व बहुआयामी प्रतिभा, आध्यात्मिक चेतना और उत्कृष्ट साहित्यिक साधना का अद्भुत संगम था। जन्म जयंती के पावन अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए पूरा जैन समाज उनके अमूल्य योगदान को स्मरण कर रहा है।
जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी ने अपने जीवनकाल में 5000 से अधिक भजनों की रचना की। उनके भजन केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के साथ गाए जाते हैं। उन्होंने भारत के प्राचीन जैन तीर्थों, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनी रचनाओं में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
उनकी अमर रचनाओं में “चांद खेड़ी म्हणे तो उजाली लागी छ”, “जीते नंगा मरते नंगा”, “कालों कालों सावरों पारस म्हारो नाथ”, “ओ चांदनपुर वाले बाबा जग के रखवाले बाबा”, “जो भगवती त्रिशला” जैसे भजन आज भी देशभर के धार्मिक आयोजनों, मंदिरों और भक्ति कार्यक्रमों में श्रद्धा के साथ गूंजते हैं। इन भजनों ने करोड़ों लोगों को धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का कार्य किया।
जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी की प्रेरणा और आशीर्वाद से उनका परिवार आज शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, साहित्य, पत्रकारिता तथा विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। परिवार के सदस्य उनके बताए हुए अनुशासन, संस्कृति और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्र गौरव राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” ने भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका सौभाग्य है कि उन्हें स्वर्गीय नमजी जैन बकानी का स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में जो भी संस्कार, अनुशासन और सफलता मिली है, वह उन्हीं के मंगल आशीर्वाद का परिणाम है। उनकी प्रेरणा आज भी परिवार और समाज के लिए ऊर्जा का स्रोत बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि आज जैन संगीत सम्राट नमजी जैन बकानी हमारे बीच होते तो परिवार और समाज की उपलब्धियों को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते। उनकी अमूल्य विरासत, भक्ति साहित्य और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
जन्म जयंती के अवसर पर समाज के लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
