‘हस्तिनापुर के वीर’ में द्रोणाचार्य-अर्जुन के रिश्ते को मिली नई पहचान, जितेन लालवानी ने की उर्वा सवालिया की तारीफ
मुंबई, जुलाई 2026। सोनी सब का लोकप्रिय पौराणिक शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ दर्शकों को पांडवों और कौरवों के बचपन की उन अनसुनी कहानियों से रूबरू करा रहा है, जिन्होंने आगे चलकर उनके जीवन और भाग्य को आकार दिया। शो में रिश्तों, मूल्यों और सीखों को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
इन्हीं महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक है गुरु द्रोणाचार्य और युवा अर्जुन का संबंध, जो अनुशासन, विश्वास और समर्पण की मजबूत नींव पर आधारित है। यही मार्गदर्शन आगे चलकर अर्जुन को इतिहास के महानतम धनुर्धरों में से एक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
द्रोणाचार्य और अर्जुन के रिश्ते में दिखेगा विश्वास और समर्पण
शो में गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी और युवा अर्जुन का किरदार निभा रहे उर्वा सवालिया ने अपने अभिनय से इस गुरु-शिष्य संबंध को जीवंत बनाया है।
जहां पर्दे पर दोनों का रिश्ता एक आदर्श गुरु और शिष्य के रूप में नजर आता है, वहीं पर्दे के पीछे भी दोनों कलाकारों के बीच एक मजबूत और आत्मीय जुड़ाव देखने को मिलता है। जितेन ने न केवल अपने किरदार के माध्यम से बल्कि वास्तविक जीवन में भी उर्वा का मार्गदर्शन किया है।
रिहर्सल से लेकर शूटिंग तक जितेन बने मेंटर
शूटिंग के दौरान जितेन लालवानी और उर्वा सवालिया के बीच की खास बॉन्डिंग साफ नजर आती है। दोनों कलाकार अपने किरदारों को बेहतर तरीके से समझने के लिए लगातार संवाद करते हैं और सीन की बारीकियों पर चर्चा करते हैं। द्रोणाचार्य और अर्जुन के रिश्ते को पर्दे पर प्रभावी बनाने के लिए वे धनुर्विद्या की मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और अभिनय की छोटी-छोटी बातों पर विशेष ध्यान देते हैं।
सेट पर जितेन लालवानी का अनुभव और मार्गदर्शन उर्वा के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। शूटिंग के बीच होने वाली हल्की-फुल्की बातचीत और दोस्ताना माहौल ने दोनों कलाकारों के बीच सहजता बढ़ाई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी ऑन-स्क्रीन परफॉर्मेंस में भी दिखाई देता है।
जितेन न केवल एक सह-कलाकार के रूप में बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका में भी उर्वा का उत्साह बढ़ाते हैं। उनके सुझावों और सहयोग से उर्वा अपने किरदार अर्जुन की भावनाओं, अनुशासन और सीखने की यात्रा को बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। दोनों कलाकारों की यह मजबूत बॉन्डिंग शो में गुरु-शिष्य के रिश्ते को और अधिक जीवंत बनाती है।
उर्वा की जिज्ञासा और मेहनत की जितेन ने की सराहना
अपने अनुभव साझा करते हुए जितेन लालवानी ने कहा,
“उर्वा बेहद ईमानदार और मेहनती बच्चा है। उसकी जिज्ञासा और सीखने की उत्सुकता बिल्कुल वैसी ही है, जैसा कि हमारे शास्त्रों में अर्जुन का वर्णन किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि उर्वा की सबसे खास बात यह है कि वह हर छोटी-बड़ी बात को ध्यान से समझने की कोशिश करता है। वह सेट पर लगातार सवाल पूछता है और अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए पूरी मेहनत करता है।
जितेन ने कहा, “मुझे कभी ऐसा नहीं लगता कि मैं किसी बच्चे के साथ काम कर रहा हूं, क्योंकि वह सेट पर जिस परिपक्वता के साथ काम करता है, वह अद्भुत है।”
ऑफ-स्क्रीन भी मजबूत है दोनों की बॉन्डिंग
जितेन ने बताया कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच केवल काम से जुड़ी बातें ही नहीं होतीं, बल्कि वे कई मजेदार पल भी साझा करते हैं।
उन्होंने कहा, “कैमरा बंद होने के बाद भी हम बातें करते हैं, मजाक करते हैं और टेक्स के बीच माहौल को हल्का रखते हैं। इतने छोटे कलाकार को अपने काम के प्रति इतनी लगन से जुड़ा देखना प्रेरणादायक है।”
उनके अनुसार, ऑफ-स्क्रीन बना यह विश्वास और अपन‘हस्तिनापुर के वीर’ में अर्जुन के बचपन और उसके व्यक्तित्व निर्माण की यात्रा को विशेष रूप से दिखाया जा रहा है।ापन स्क्रीन पर द्रोणाचार्य और अर्जुन के रिश्ते को और अधिक वास्तविक बनाने में मदद करता है।
अर्जुन की यात्रा को खास बनाने का प्रयास
‘हस्तिनापुर के वीर’ में अर्जुन के बचपन और उसके व्यक्तित्व निर्माण की यात्रा को विशेष रूप से दिखाया जा रहा है। गुरु द्रोणाचार्य के मार्गदर्शन में अर्जुन किस तरह अनुशासन, एकाग्रता और मेहनत के बल पर अपनी प्रतिभा को निखारता है, यह कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शो के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश भी मिलता है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और सीखने की इच्छा किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
सोनी सब पर प्रसारित हो रहा है शो
दर्शक पौराणिक कथाओं के इस विशेष सफर का आनंद सोनी सब पर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे ले सकते हैं। शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ में महाभारत काल के प्रमुख पात्रों के बचपन, उनके रिश्तों, संघर्षों और जीवन मूल्यों को एक नए और रोचक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है।
यह शो दर्शकों को उन अनकही कहानियों से जोड़ता है, जो आगे चलकर महान योद्धाओं और ऐतिहासिक पात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गुरु-शिष्य परंपरा, पारिवारिक संबंधों और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखते हुए यह सीरियल भारतीय संस्कृति और विरासत की झलक भी प्रस्तुत करता है।
