Indore News: लवकुश चौराहे के डबल डेकर फ्लाईओवर को मिली CMRS की मंजूरी, मुख्यमंत्री आज शुरू कर सकते हैं यातायात
Indore । शहर के बहुप्रतीक्षित लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। फ्लाईओवर की एक लेन से यातायात शुरू करने के लिए आखिरकार कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की अनुमति मिल गई है। बुधवार को अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रस्तावित ट्रायल रन टालना पड़ा था, लेकिन देर शाम जरूरी मंजूरी मिलने के बाद अब गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में फ्लाईओवर की एक भुजा से यातायात शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
Indore विकास प्राधिकरण (IDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित झाड़े ने बताया कि फ्लाईओवर की एक लेन को आम यातायात के लिए खोलने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर का बाकी निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है और लगभग दो महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री कर सकते हैं फ्लाईओवर का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गुरुवार को इंदौर दौरा प्रस्तावित है। इसी दौरान उनके हाथों लवकुश चौराहे के डबल डेकर फ्लाईओवर की एक भुजा से यातायात शुरू किए जाने की संभावना है।
प्रशासन और IDA अधिकारियों ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। फ्लाईओवर के उद्घाटन को लेकर जनप्रतिनिधियों में भी उत्साह देखा गया। इससे पहले बुधवार को भी मौके पर तैयारियां पूरी कर ली गई थीं, लेकिन CMRS की अनुमति नहीं मिलने के कारण ट्रायल को रोकना पड़ा था।
अनुमति नहीं मिलने से टल गया था ट्रायल रन
बुधवार को फ्लाईओवर की एक लेन पर वाहनों की आवाजाही शुरू करने के लिए ट्रायल रन प्रस्तावित था। IDA ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली थी। मौके पर टीन शेड हटाने, रास्ता खोलने और अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई थीं।
उद्घाटन की उम्मीद में पुजारी को भी बुलाया गया था और कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए थे। हालांकि बाद में पता चला कि फ्लाईओवर शुरू करने के लिए CMRS की जरूरी अनुमति अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसके बाद ट्रायल रन को टालना पड़ा।
इस दौरान मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से जानकारी ली और महापौर से भी बातचीत की। बाद में स्पष्ट हुआ कि सुरक्षा और तकनीकी मंजूरी के बिना फ्लाईओवर पर वाहनों का संचालन शुरू नहीं किया जा सकता।
दिल्ली तक लगानी पड़ी दौड़
CMRS की अनुमति लेने के लिए IDA और मेट्रो अधिकारियों को दिल्ली तक जाना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि फ्लाईओवर के लिए आवश्यक कंपाइलेशन रिपोर्ट, सुरक्षा जांच और लोड टेस्ट सहित सभी दस्तावेज तैयार किए गए।
मंगलवार शाम को पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन CMRS को भेजी गई थी। इसके बाद बुधवार सुबह IDA और मेट्रो के अधिकारी दिल्ली पहुंचे और जल्द अनुमति देने का अनुरोध किया। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर शाम CMRS की ओर से फ्लाईओवर की एक भुजा को शुरू करने की मंजूरी दे दी गई।
CMRS की अनुमति क्यों होती है जरूरी?
लवकुश चौराहे का यह फ्लाईओवर मेट्रो ट्रैक के ऊपर से गुजरता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा और संचालन को लेकर विशेष नियम लागू होते हैं। मेट्रो ट्रैक के ऊपर बने किसी भी फ्लाईओवर या संरचना को आम यातायात के लिए खोलने से पहले CMRS की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है।
CMRS की टीम फ्लाईओवर का निरीक्षण करती है और उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी मापदंडों की जांच के बाद अनुमति जारी करती है। हाल ही में CMRS की टीम ने मेट्रो और फ्लाईओवर से जुड़े निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था।
डबल डेकर फ्लाईओवर से मिलेगी बड़ी राहत
लवकुश चौराहा इंदौर के सबसे व्यस्त यातायात क्षेत्रों में से एक है। यहां लंबे समय से जाम की समस्या बनी हुई थी। डबल डेकर फ्लाईओवर शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर शुरू होने से उज्जैन रोड, मरीमाता क्षेत्र और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। खासतौर पर पीक ऑवर में लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिलने की संभावना है।
जल्दबाजी में हुई तैयारी में सामने आई कमी
फ्लाईओवर शुरू करने को लेकर IDA ने तेजी से तैयारियां की थीं, लेकिन CMRS की अनुमति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। यही वजह रही कि बुधवार को प्रस्तावित ट्रायल रन को अंतिम समय पर रोकना पड़ा।
अधिकारियों ने बाद में जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर अनुमति प्राप्त कर ली। अब उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में फ्लाईओवर की एक भुजा से यातायात शुरू हो जाएगा।
दो महीने में पूरा होगा बाकी काम
IDA अधिकारियों के अनुसार, फ्लाईओवर का शेष निर्माण कार्य लगभग दो महीने में पूरा होने की संभावना है। इसके बाद पूरी संरचना को आम यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
फिलहाल एक भुजा शुरू होने से वाहन चालकों को राहत मिलेगी और क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होगा। इंदौर शहर के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
