Sardarpur में बाल लैंगिक शोषण रोकथाम को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, 660 शिक्षकों को किया जाएगा प्रशिक्षित
महेश कुमार वर्मा
सरदारपुर तहसील संवाददाता
स्थान – सरदारपुर
विद्यालयों में सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण निर्माण पर दिया जा रहा जोर
Sardarpur (धार), 22 जुलाई। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सरदारपुर में विकासखण्ड स्तरीय बाल लैंगिक शोषण जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अर्पण सोसायटी, मुंबई के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विकासखण्ड के शिक्षकों को बाल संरक्षण और बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर संवेदनशील बनाना और उन्हें आवश्यक जानकारी एवं कौशल से सशक्त करना है, ताकि विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और भरोसेमंद वातावरण तैयार किया जा सके।
पांच चरणों में होगा प्रशिक्षण
जानकारी के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल पांच चरणों में आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत विकासखण्ड के कुल 660 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को बाल सुरक्षा, बच्चों के अधिकार, लैंगिक शोषण की पहचान, रोकथाम के उपाय और विद्यालय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों के संचालन के संबंध में जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के तीसरे दिवस में विकासखण्ड के 140 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखना, उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनना और किसी भी संदिग्ध स्थिति में उचित कदम उठाना बेहद आवश्यक है।
बाल सुरक्षा और अधिकारों पर दी गई जानकारी
प्रशिक्षण में विद्यालय स्तर पर बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
शिक्षकों को यह भी जानकारी दी गई कि बच्चों में किसी प्रकार के भय, असुरक्षा या परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए और आवश्यक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
इसके साथ ही विद्यालय में ऐसा वातावरण विकसित करने पर जोर दिया गया, जहां विद्यार्थी अपनी बात खुलकर रख सकें और स्वयं को सुरक्षित महसूस करें।
शिक्षकों से जागरूकता गतिविधियां चलाने का आह्वान
इस अवसर पर खंड स्रोत समन्वयक श्री महेंद्र सोलंकी ने प्रशिक्षण में सहभागिता करते हुए शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विद्यालयों में बाल सुरक्षा को मजबूत करने में उनकी जिम्मेदारी सबसे अहम है।
उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे अपने-अपने विद्यालयों में बाल सुरक्षा और बाल लैंगिक शोषण रोकथाम से संबंधित जागरूकता गतिविधियों का प्रभावी संचालन करें। साथ ही विद्यार्थियों के अलावा अभिभावकों को भी इस विषय में जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि जागरूकता ही बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में पहला और महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशिक्षण संचालन में टीम का सहयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण प्रभारी श्री राजेश सोलंकी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल संचालन में मनोज मालवीय, मुकेश खराड़ी एवं शादिक कुरैशी ने सहायक के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को विभिन्न गतिविधियों और उदाहरणों के माध्यम से बाल संरक्षण से जुड़े विषयों को समझाया गया, ताकि वे विद्यालयों में इन जानकारियों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना उद्देश्य
अर्पण सोसायटी द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षकों को व्यवहारिक रूप से सक्षम बनाना है, जिससे वे बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
विद्यालय बच्चों के सीखने और विकास का प्रमुख स्थान होता है। ऐसे में वहां सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण होना आवश्यक है। शिक्षकों की भूमिका इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, जागरूकता और जिम्मेदारी से ही बाल शोषण जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
बाल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल लैंगिक शोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और संवेदनशील सोच का विकास भी जरूरी है।
शिक्षक, अभिभावक और समाज के सभी वर्ग मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को इसी दिशा में तैयार किया जा रहा है।
सरदारपुर में आयोजित यह पहल बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने और विद्यालयों को अधिक सुरक्षित एवं सकारात्मक स्थान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
