Maheshwar की महेश्वरी साड़ी को राष्ट्रीय गौरव, राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होंगे हथकरघा शिल्पी कमल गौड़
स्वराज वाणी संवाददाता | जिला ब्यूरो | गौतम साल्वे (मंडलेश्वर)
Maheshwar। विश्व प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी की गौरवशाली परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिलने जा रही है। महेश्वर के प्रसिद्ध हथकरघा शिल्पी कमल गौड़ का चयन भारत सरकार के वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए किया गया है। यह सम्मान उन्हें महेश्वरी साड़ी निर्माण में उत्कृष्ट शिल्प कौशल, पारंपरिक बुनाई कला के संरक्षण, नए प्रयोगों और हथकरघा क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।
कमल गौड़ की इस उपलब्धि से महेश्वर सहित पूरे निमाड़ अंचल में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय बुनकर समुदाय, हथकरघा कलाकारों और नागरिकों ने इसे महेश्वर की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान समारोह
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा), नई दिल्ली द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
इस समारोह में वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार और संत कबीर हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। देशभर के चयनित हथकरघा शिल्पियों को इस अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
महेश्वर के लिए यह विशेष गौरव का क्षण होगा, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु अपने करकमलों से हथकरघा शिल्पी कमल गौड़ को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगी।
महेश्वरी साड़ी की परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान
महेश्वर की पहचान केवल ऐतिहासिक धरोहरों, मां नर्मदा के पवित्र घाटों और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की विश्व प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी भी इसकी अलग पहचान है।
सदियों पुरानी महेश्वरी साड़ी की बुनाई कला ने देश-विदेश में महेश्वर को विशेष स्थान दिलाया है। इस पारंपरिक कला में रंगों का संयोजन, महीन बुनाई, आकर्षक डिजाइन और उत्कृष्ट गुणवत्ता इसकी खास पहचान है।
कमल गौड़ ने वर्षों की मेहनत, अनुभव और रचनात्मक सोच के साथ इस कला को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने महेश्वरी साड़ी की गुणवत्ता और डिजाइन में निरंतर सुधार करते हुए इस पारंपरिक शिल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हथकरघा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि
राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार भारत सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिल्पियों को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है।
कमल गौड़ का चयन यह दर्शाता है कि महेश्वर की पारंपरिक बुनाई कला आज भी अपनी मौलिकता, गुणवत्ता और सांस्कृतिक महत्व के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त कर रही है।
यह सम्मान केवल एक शिल्पी की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि महेश्वर के सभी बुनकरों और हथकरघा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे नई पीढ़ी के कलाकारों को भी अपनी पारंपरिक कला से जुड़ने और उसे आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
महेश्वर और निमाड़ में उत्साह का वातावरण
कमल गौड़ के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन की खबर मिलने के बाद महेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे पूरे निमाड़ क्षेत्र और मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया है।
हथकरघा शिल्पियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने कहा कि यह सम्मान महेश्वर की कला, संस्कृति और परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देगा।
महेश्वरी साड़ी की सुंदरता और बुनकरों की मेहनत को मिली यह राष्ट्रीय पहचान आने वाले समय में इस क्षेत्र के हथकरघा उद्योग को और मजबूती प्रदान करने वाली साबित हो सकती है।
कमल गौड़ की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, समर्पण और अपनी संस्कृति के प्रति लगाव से पारंपरिक कला भी विश्व स्तर पर सम्मान प्राप्त कर सकती है।
