MP Elderman Appointed: मध्यप्रदेश के 13 नगर निगमों में एल्डरमैन नियुक्त, भोपाल को मिले 12 नामित पार्षद; इंदौर-ग्वालियर-जबलपुर में अभी इंतजार
MP में लंबे समय से लंबित चल रही स्थानीय निकायों की राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 13 नगर निगमों में एल्डरमैन यानी नामित पार्षदों की नियुक्ति कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार राजधानी भोपाल नगर निगम में 12 एल्डरमैन बनाए गए हैं, जबकि अन्य 12 नगर निगमों में 8-8 नामित पार्षदों को जिम्मेदारी दी गई है।
हालांकि प्रदेश के तीन बड़े नगर निगमों इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अभी एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं की गई है। इन नगर निगमों के लिए अलग से आदेश जारी होने का इंतजार है।
भोपाल नगर निगम में 12 एल्डरमैन नियुक्त
सरकार ने राजधानी भोपाल नगर निगम में सबसे अधिक 12 एल्डरमैन नियुक्त किए हैं। नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत भोपाल जैसे बड़े नगर निगम में नामित पार्षदों की संख्या अन्य निगमों की तुलना में अधिक रखी जाती है।
नियुक्त किए गए एल्डरमैन नगर निगम की बैठकों में हिस्सा ले सकेंगे और अलग-अलग समितियों में अपनी भूमिका निभाएंगे। स्थानीय विकास योजनाओं, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक मुद्दों पर वे अपनी राय रख सकेंगे।
इन नगर निगमों में बनाए गए 8-8 एल्डरमैन
राज्य सरकार ने भोपाल के अलावा मुरैना, सागर, रीवा, सतना, सिंगरौली, कटनी, छिंदवाड़ा, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास और रतलाम नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन नियुक्त किए हैं।
मुरैना नगर निगम में ऊषा बौंदिल, राजेंद्र राठौर, अरविंद भदौरिया, दिनेश शर्मा, निधि गुप्ता, संतोषराम प्रजापति, बन्टूदास लाल और महावीर कोरी को जिम्मेदारी दी गई है।
सागर नगर निगम में महेश जैन, धर्मेंद्र रजक, जुगल प्रजापति, सुबोध पाराशर, विवेक सोढ़िया, राजेंद्र ठाकुर, आशालता सिलाकारी और अभिषेक चौरसिया को नामित किया गया है।
रीवा नगर निगम में सत्यप्रकाश सचदेवा, राजेंद्र शुक्ला, सरस्वती गुप्ता, मनोज पटेल, राजकुमार जायसवाल, प्रकाश सोनी, बुद्धसेन नापित और आनंदेंद्र सिंह को नियुक्त किया गया है।
वहीं उज्जैन नगर निगम में मुकेश मालवीय, अशोक देवड़ा, मनीष खंडेलवाल, अरविंद उपाध्याय, मुकेश चौधरी, धर्मेंद्र वर्मा, शैलेंद्र यादव और मधुकर राव को एल्डरमैन बनाया गया है।
इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में फैसला बाकी
MP के सबसे बड़े नगर निगम इंदौर के साथ ग्वालियर और जबलपुर में अभी एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं हुई है। इन तीनों नगर निगमों के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नामों को लेकर चर्चा जारी है।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार इन नगर निगमों के लिए भी नामों की घोषणा कर सकती है। इन नियुक्तियों को लेकर स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी उत्सुकता बनी हुई है।
क्या होता है एल्डरमैन?
एल्डरमैन या नामित पार्षद ऐसे सदस्य होते हैं जिन्हें राज्य सरकार नगर निगम अधिनियम के तहत मनोनीत करती है। इनका उद्देश्य नगर निगम की कार्यप्रणाली में विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनुभवी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना होता है।
एल्डरमैन नगर निगम की बैठकों में शामिल होकर शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं और योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय दे सकते हैं। इसके अलावा वे विभिन्न समितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हालांकि महापौर और अन्य चुनावों में मतदान का अधिकार उन्हें राज्य के नियमों और कानूनों के अनुसार ही मिलता है।
नगर निगमों की समितियों के गठन में आएगी तेजी
एल्डरमैन की नियुक्ति के बाद नगर निगमों में स्थायी समितियों और अन्य महत्वपूर्ण समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इन सदस्यों की मौजूदगी से नगर निगमों में प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने और विकास योजनाओं की समीक्षा बेहतर तरीके से होने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय निकायों में राजनीतिक गतिविधियों को भी इन नियुक्तियों के बाद नई दिशा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिलने से नगर निगम स्तर पर राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।
स्थानीय राजनीति में बढ़ेगी सक्रियता
MP के नगर निगमों में एल्डरमैन नियुक्ति को सरकार की ओर से स्थानीय निकायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े नगर निगमों में नियुक्तियों के बाद तस्वीर और साफ होगी।
इन नियुक्तियों के जरिए सरकार ने नगर निगमों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने और प्रशासनिक गतिविधियों को गति देने की कोशिश की है। अब सभी की नजरें बाकी नगर निगमों में होने वाली अगली घोषणाओं पर टिकी हैं।
