जयस कुक्षी ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, नीट परीक्षा की निष्पक्षता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग
रिपोर्ट: नरेंद्र सिरवी
सोनम वांगचुक के समर्थन में भी उठाई आवाज, जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति जताया समर्थन
कुक्षी (धार)। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) कुक्षी इकाई के नेतृत्व में सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने कुक्षी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
जयस पदाधिकारियों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था देश के भविष्य की नींव है। यदि इसमें पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित नहीं किए जाएंगे तो लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा। इसी उद्देश्य से संगठन ने अपनी मांगों को राष्ट्रपति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
एसडीएम कार्यालय पहुंचकर सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के कार्यकर्ता निर्धारित समय पर कुक्षी एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को संबोधित ज्ञापन में अनुरोध किया कि उसे राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंचाया जाए, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उचित स्तर पर विचार किया जा सके।
जयस कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसी भावना के साथ यह ज्ञापन सौंपा गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
ज्ञापन में संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई।
जयस पदाधिकारियों का कहना था कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उनका मत था कि यदि किसी परीक्षा या शिक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष समीक्षा और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
नीट परीक्षा की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
ज्ञापन में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।
जयस कार्यकर्ताओं ने कहा कि देशभर के लाखों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार के विवाद या अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
संगठन ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास कायम रहे।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग

जयस ने ज्ञापन के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
संगठन का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और सभी वर्गों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने वाली शिक्षा व्यवस्था ही देश को मजबूत बना सकती है।
ज्ञापन में शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए आवश्यक सुधारों की मांग की गई।
सोनम वांगचुक के समर्थन में जताई एकजुटता
जयस कार्यकर्ताओं ने पर्यावरणविद एवं शिक्षा सुधारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सोनम वांगचुक के समर्थन में भी अपनी एकजुटता व्यक्त की।
ज्ञापन में कहा गया कि जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की विभिन्न मांगों के प्रति संगठन समर्थन व्यक्त करता है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को ऐसे मुद्दों पर सकारात्मक संवाद करना चाहिए।
लोकतांत्रिक तरीके से रखी गईं मांगें
जयस पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात शासन और प्रशासन तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि युवाओं, विद्यार्थियों और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जनप्रतिनिधियों और सरकार का ध्यान आकर्षित करना आवश्यक है, ताकि समय रहते उचित निर्णय लिए जा सकें।
बड़ी संख्या में जयस कार्यकर्ता रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इनमें प्रमुख रूप से जयस जिला उपाध्यक्ष रमेश मंडलोई, सरपंच हरिओम डोड़वे, नगर अध्यक्ष प्रवीण गवली, रवि पटेल (कुडदीपुरा), रितेश कोचले, महेश मुझाल्दा, हरदास मुझाल्दा, मनोज बामनिया, राकेश चौहान, संजय जामोद, राकेश रावत, प्रदीप चौहान सहित बड़ी संख्या में जयस युवा साथी शामिल हुए।
सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिक मंच पर रखने की पहल
जयस का कहना है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन और शासन तक पहुंचाना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
संगठन का मानना है कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर रचनात्मक संवाद होना चाहिए, जिससे सकारात्मक समाधान निकल सके।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर दिया जोर
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने यह संदेश भी दिया कि देश की प्रगति का आधार मजबूत शिक्षा व्यवस्था है। यदि शिक्षा प्रणाली निष्पक्ष, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होगी, तो युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा और देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
कार्यकर्ताओं ने आशा व्यक्त की कि उनकी मांगों पर संबंधित स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और विद्यार्थियों तथा युवाओं के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ज्ञापन कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ और अंत में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप अपनी बात रखने का अवसर मिलना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।
