नागदा राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी ध्वजारोहण 2026 में मंत्रोच्चार के बीच 7वीं ध्वजा लहराई गई। धर्मसभा, महाआरती, स्वामीवात्सल्य एवं साध्वीश्री के प्रेरक प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
नागदा राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी ध्वजारोहण 2026: मंत्रों की गूंज के बीच 7वीं ध्वजा लहराई, धर्मसभा और महाआरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
नागदा। नागदा राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी ध्वजारोहण 2026 धार्मिक आस्था, भक्ति और उत्साह के वातावरण में गुरुवार 16 जुलाई को महिदपुर मार्ग स्थित राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी में संपन्न हुआ। सातवें ध्वजारोहण महोत्सव के अवसर पर मंत्रों की गूंज, भक्ताम्बर पाठ, विशाल चल समारोह, धर्मसभा, स्वामीवात्सल्य और महाआरती जैसे विविध धार्मिक आयोजनों ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम साध्वीश्री भक्तिरसाश्रीजी महाराज सा. आदि ठाणा-3 एवं साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी महाराज सा. आदि ठाणा-4 की पावन निश्रा में सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजन में भाग लिया।
सातवें ध्वजारोहण महोत्सव का शुभारंभ
नागदा राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी ध्वजारोहण 2026 की शुरुआत प्रातः 6:30 बजे भक्ताम्बर स्तोत्र एवं गुरु चालीसा के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद सुबह 8 बजे श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ की नवकारशी का आयोजन किया गया, जिसका लाभ दादावाड़ी ट्रस्ट मंडल द्वारा लिया गया।
श्रद्धालुओं ने भगवान एवं गुरुदेव की भक्ति में लीन होकर दिनभर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभाई।
ध्वजा चल समारोह बना आकर्षण का केंद्र
सुबह 8:30 बजे महिदपुर मार्ग स्थित नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन मंदिर से ध्वजा का भव्य चल समारोह प्रारंभ हुआ।लाभार्थी परिवार की श्राविका ने अपने मस्तक पर ध्वजा धारण कर शोभायात्रा का नेतृत्व किया। श्रद्धालु “ऊँ पुण्याहाम्-पुण्याहाम्” मंत्रों का जाप करते हुए दादावाड़ी पहुंचे।पूरा वातावरण धर्ममय और भक्तिमय बन गया।
शिखर पर ध्वजा लहराते ही गूंजे जयकारे
सुबह 9:30 बजे जैसे ही दादावाड़ी के शिखर पर ध्वजा स्थापित की गई, पूरा परिसर जयकारों और मंगलध्वनि से गूंज उठा।ध्वजारोहण एवं महाआरती का लाभ राजमल, नरेंद्र, अंकित नांदेचा परिवार ने प्राप्त किया।ध्वजारोहण का संपूर्ण विधान श्रीसंघ के मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने सम्पन्न कराया।
धर्मसभा में साध्वीश्री के प्रेरक प्रवचन
ध्वजारोहण के पश्चात प्रातः 10 बजे धर्मसभा का आयोजन हुआ।पूर्व अध्यक्ष हेमंत कांकरिया द्वारा सामूहिक गुरु वंदन प्रस्तुत की गई।
साध्वीश्री भक्तिरसाश्रीजी का संदेश
साध्वीश्री ने कहा कि—
पुण्य से प्राप्त धन का सदुपयोग करने से पुनः पुण्य का बंध होता है तथा आत्मा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होती है।
उन्होंने धर्म, सेवा और दान की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी का संदेश
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा—समय सबसे बड़ा धन है। जो कार्य आज हो सकता है, उसे कल पर नहीं टालना चाहिए।उन्होंने समय के सदुपयोग को जीवन की सबसे बड़ी साधना बताया।
अष्ठप्रकारी पूजन में लगी भक्तों की बोलियां
धर्मसभा के दौरान वार्षिक अष्ठप्रकारी पूजन के विभिन्न लाभ लिए गए।मुख्य लाभार्थी—
- फल पूजा – पदमाबेन केशरीमल मेहता परिवार
- मुनिम बनने का लाभ – दाखाबाई माणकलाल बोहरा
- अखण्ड दीपक – मधुदेवी सुभाषचन्द्र नागदा परिवार
श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक धार्मिक लाभ प्राप्त किए।
भक्ति संगीत से भक्तिमय हुआ वातावरण
करीब तीन घंटे तक चली धर्मसभा के दौरान
- आशीष चौधरी
- सोनव वागरेचा
- अभिषेक कोलन
- आयुष बोहरा
ने संगीतमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम के दौरान श्रीसंघ एवं ट्रस्ट मंडल ने साध्वीश्री को कांबली अर्पित कर अभिनंदन किया।कार्यक्रम का संचालन पूर्व अध्यक्ष सुनील वागरेचा ने किया जबकि आभार ट्रस्ट अध्यक्ष सुनील कोठारी ने व्यक्त किया।
स्वामीवात्सल्य एवं महाआरती
धर्मसभा के पश्चात विशाल स्वामीवात्सल्य का आयोजन हुआ।रात्रि 8 बजे अखण्ड जाप एवं महाआरती सम्पन्न हुई।इस अवसर पर दादावाड़ी परिसर में विराजमान राजेंद्रसूरीश्वरजी महाराज साहब की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार एवं अंगरचना की गई।देर रात तक श्रद्धालु दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते रहे।
राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी का इतिहास
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने बताया कि—गच्छाधिपति आचार्यश्री हेमेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहब के पट्टधर ज्योतिषसम्राट आचार्यश्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहब की प्रेरणा से निर्मित राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी की प्रतिष्ठा 4 जुलाई 2019 को सम्पन्न हुई थी।आज यह दादावाड़ी नागदा क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
निष्कर्ष
नागदा राजेंद्रसूरी जैन दादावाड़ी ध्वजारोहण 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। ध्वजारोहण, धर्मसभा, स्वामीवात्सल्य, महाआरती और साध्वीश्री के प्रेरक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। बड़ी संख्या में समाजजनों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया।



