दर्शनमुनि जन्मदिवस के अवसर पर Nagda में 34वां जन्मदिवस सादगी के साथ मनाया गया। प्रकाशमुनिजी म.सा. ने कहा कि कोशिश करने वाले हारते हैं, संकल्प करने वाले हमेशा जीतते हैं। जानिए पूरा समाचार।
दर्शनमुनि जन्मदिवस: संकल्प करने वाले हमेशा जीतते हैं – प्रकाशमुनिजी म.सा.
रिपोर्ट: जीवनलाल जैन | Nagda (निप्र)
Nagda। दर्शनमुनि जन्मदिवस के अवसर पर नागदा स्थित स्थानक भवन में 34वां जन्मदिवस अत्यंत सादगी, आध्यात्मिक वातावरण और नवकार मंत्र जाप के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुभक्ति, प्रवचन, सम्मान समारोह एवं धार्मिक प्रभावना के कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी नितिन बुड़ावनवाला ने जानकारी देते हुए बताया कि रतलाम के समीप ग्राम करवड़ निवासी पुखराजमलजी माण्डोत एवं लीलाबाई माण्डोत के सुपुत्र ने सांसारिक जीवन का त्याग कर आत्मकल्याण के लिए दीक्षा ग्रहण की थी। दीक्षा के बाद उन्हें दर्शनमुनि नाम प्रदान किया गया। उनके 34वें जन्मदिवस पर नागदा स्थानक भवन में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए।
दर्शनमुनि जन्मदिवस पर विशेष आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत नवकार मंत्र जाप एवं गुरु गुणगान से हुई। पूरे स्थानक भवन में भक्तिमय वातावरण बना रहा। समाजजनों ने दर्शनमुनि के संयममय जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
प्रकाशमुनिजी म.सा. बोले – संकल्प करने वाले हमेशा जीतते हैं
धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रकाशमुनिजी म.सा. ने कहा कि जयंती हमेशा महापुरुषों की तथा कल्याणक तीर्थंकरों के मनाए जाते हैं, जबकि जो आत्मा स्वयं के कल्याण के लिए संयम का मार्ग अपनाती है, उसका जन्मदिवस मनाया जाता है।उन्होंने कहा—
“संयमित जीवन जीना आ गया तो मोक्ष निकट है, जीना नहीं आया तो संसार विकट है। कोशिश करने वाले हमेशा हारते हैं, लेकिन संकल्प करने वाले हमेशा जीतते हैं।”
उन्होंने कहा कि जीवन में केवल प्रयास करने की बजाय दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है जिसका लक्ष्य स्पष्ट और संकल्प अटल होता है।
दर्शन के तीन अर्थ बताए
प्रकाशमुनिजी म.सा. ने अपने प्रवचन में ‘दर्शन’ शब्द के तीन अर्थ बताते हुए कहा—
- देखना
- सिद्धांत
- समत्व
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सबसे पहले स्वयं को देखना और परखना चाहिए।उन्होंने विवाह पत्रिका का उदाहरण देते हुए कहा कि दुल्हन के नाम के आगे लिखा “सौ. कां.” और दूल्हे के नाम के आगे लिखा “चि.” भी जीवन का संदेश देता है। दुल्हन की सौ कामनाओं को पूरा करने की चिंता दूल्हे को करनी चाहिए। यही परिवार और जीवन का वास्तविक धर्म है।उन्होंने कहा कि त्याग में धर्म और तप में निर्जरा होती है।
सुमनप्रभाजी म.सा. ने संयम जीवन का महत्व बताया
इस अवसर पर सुमनप्रभाजी म.सा. ने कहा कि सामान्य व्यक्ति का जन्मदिन केवल एक दिन की खुशी देता है, जबकि संयम लेने वाले संतों का जन्मदिवस प्रतिदिन प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि दर्शन नाम का वास्तविक अर्थ ऐसा जीवन है जिसके दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाए। यह नाम गुरुदेव द्वारा दिया गया है।उन्होंने कहा—
- नम्र व्यक्ति सभी को प्रिय होता है।
- चाबी ताले के हृदय में जाकर ताला खोलती है।
- हथौड़े की चोट ताला नहीं खोलती बल्कि उसे तोड़ देती है।
- जीवन में क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही सफल होता है।
दीक्षा के समय मिला था दर्शनमुनि नाम
दर्शनमुनि ने पूज्य जिनशासन गौरव उमेशमुनिजी ‘अणु’ के श्रीमुख से दीक्षा अंगीकार की थी। दीक्षा के समय उन्हें दर्शनमुनि नाम प्रदान किया गया था।
रतलाम श्रीसंघ अध्यक्ष का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान रतलाम श्रीसंघ अध्यक्ष पारसजी ओरा का सम्मान किया गया।रतलाम के प्रकाश मुणत ने भी अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए और संयममय जीवन को समाज के लिए आदर्श बताया।
समाजजनों ने दी शुभकामनाएं
दर्शनमुनि जन्मदिवस पर समाज के अनेक पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने शुभकामनाएं दीं।इनमें प्रमुख रूप से—
- मूर्तिपूजक संघ अध्यक्ष मनीष व्होरा
- दिगंबर समाज अध्यक्ष सुनील जैन
- चातुर्मास समिति अध्यक्ष दिलीप कांठेड
- अभिषेक कोलन
- दिलीप सिसोदिया
- दीलबर
- अनिल पावेचा
सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
2027 वर्षावास की विनती
स्थानकवासी संघ अध्यक्ष ने गुरुदेव से वर्ष 2027 के वर्षावास हेतु नागदा आने की विनम्र प्रार्थना की।
धार्मिक प्रभावना एवं नवकारसी
धार्मिक प्रभावना का लाभ प्रेमलता बहन, रमेशजी एवं नवीनजी तरवेचा परिवार द्वारा लिया गया।नवकार मंत्र जाप की प्रभावना का लाभ स्थानकवासी संघ ने प्राप्त किया जबकि संपूर्ण समाज की नवकारसी का लाभ स्थानक श्रीसंघ द्वारा लिया गया।कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
निष्कर्ष
दर्शनमुनि जन्मदिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि संयम, संकल्प और आत्मकल्याण का प्रेरणादायी संदेश लेकर आया। प्रकाशमुनिजी म.सा. एवं सुमनप्रभाजी म.सा. के प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन में दृढ़ संकल्प, नम्रता, त्याग और आत्मचिंतन का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।


