जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस पर मुरैना-पथरिया में श्रद्धापूर्वक चरण चिन्हों की स्थापना की गई। गणाचार्य विरागसागरजी महाराज के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर देशभर में भक्ति, समर्पण और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुए।
जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस पर चरण चिन्हों की हुई स्थापना
मुरैना/पथरिया | रिपोर्टर : मनोज जैन नायक
जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस के अवसर पर जैन संत समाधिस्थ गणाचार्य विरागसागरजी महाराज का द्वितीय समाधि स्मृति दिवस सम्पूर्ण भारतवर्ष में समर्पण, श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उनकी जन्मस्थली पथरिया में उनके पावन चरण चिन्हों की स्थापना की गई। यह आयोजन जैन समाज के लिए अत्यंत भावनात्मक एवं प्रेरणादायक रहा।
देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस
जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस पर देशभर के जैन मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, श्रद्धांजलि सभाओं तथा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने अपने पूज्य गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए संयम, अहिंसा और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
श्रीपाल भैयाजी ने बताया गुरुदेव का प्रेरणादायी जीवन
पूज्य गुरुदेव के परम भक्त बाल ब्रह्मचारी श्रीपाल भैयाजी ने बताया कि सागर जिले के पथरिया में जन्मे जैन संत समाधिस्थ गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने दिगम्बरी दीक्षा धारण करने के बाद अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में सत्य, अहिंसा, शाकाहार, ब्रह्मचर्य, जीवदया एवं पीड़ित मानवता की सेवा का संदेश दिया।उन्होंने अपने प्रवचनों एवं तपस्या के माध्यम से लाखों लोगों को संयम, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज और धर्म के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
गुरुदेव का असमय निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति
श्रीपाल भैयाजी ने कहा कि ऐसे महान संत का असमय चले जाना जैन समाज ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।उन्होंने कहा कि भले ही आज पूज्य गुरुदेव हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके उपदेश, उनका वात्सल्य, उनकी करुणा, उनकी प्रेरणा और उनके संदेश आज भी प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में जीवंत हैं।
जन्मस्थली पथरिया में हुई चरण चिन्हों की स्थापना
प्राप्त जानकारी के अनुसार जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस के अवसर पर समाधिस्थ गणाचार्य विरागसागरजी महाराज एवं उनके परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य वाक्केशरी आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी महाराज की जन्मस्थली पथरिया में विशेष धार्मिक आयोजन किया गया।पूज्य मुनिश्री के पावन सान्निध्य में बाल ब्रह्मचारी श्रीपाल भैयाजी एवं सम्यक जैन द्वारा चरण वेदिका पर विधि-विधानपूर्वक पावन चरण चिन्ह स्थापित किए गए।
श्रद्धालुओं ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
चरण स्थापना के पश्चात उपस्थित सभी साधर्मी बंधुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पूज्य गुरुदेव को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति के भजन गाए तथा गुरुदेव के बताए हुए आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विरागसागरजी महाराज का संदेश आज भी प्रासंगिक
जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि उनके जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का भी अवसर है।गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने अपने जीवन में सदैव सत्य, अहिंसा, करुणा, संयम, जीवदया और मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। आज के समय में उनके संदेश समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
जैन समाज के लिए प्रेरणा बने रहेंगे गुरुदेव
समाधि दिवस पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने यह सिद्ध कर दिया कि गुरुदेव का व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव अमर रहेगा। उनके उपदेश आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म, संयम और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।
निष्कर्ष
जैनाचार्य विरागसागर समाधि दिवस पर पथरिया में चरण चिन्हों की स्थापना का यह आयोजन श्रद्धा, समर्पण और गुरु भक्ति का अद्भुत उदाहरण बना। श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह आयोजन जैन समाज की धार्मिक आस्था एवं गुरु परम्परा के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण रहा।


