मोक्ष मार्ग को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बताते हुए मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने Indore के छत्रपति नगर स्थित श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय में धर्मसभा को संबोधित किया। जानिए उनके प्रेरणादायी प्रवचन, धर्म, भक्ति और मोक्ष मार्ग पर विशेष संदेश।
मोक्ष मार्ग: मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने बताया धर्म और भक्ति से मिलता है सुख, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग
संवाददाता : राजेश जैन दद्दू,Indore
मोक्ष मार्ग: धर्म की राह पर चलने वालों का जीवन होता है सफल
indore। मोक्ष मार्ग को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बताते हुए दिगंबर जैन प्राकृताचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि जो श्रद्धालु सच्ची निष्ठा, श्रद्धा और समर्पण के साथ धर्म की राह पर चलते हैं तथा भगवान की भक्ति करते हैं, उनके जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता। ऐसे लोगों को व्यापार में उन्नति, परिवार में सुख-शांति और अंततः मोक्ष मार्ग की प्राप्ति का सौभाग्य मिलता है।शुक्रवार प्रातः तीर्थ स्वरूप श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर, इंदौर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य मोक्ष मार्ग होना चाहिए। यदि भगवान की भक्ति केवल सांसारिक इच्छाओं के लिए नहीं बल्कि आत्मकल्याण और मोक्ष की भावना से की जाए तो जीवन स्वतः सफल हो जाता है।
मोक्ष मार्ग के लिए भगवान की भक्ति सबसे बड़ा साधन
मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि वीतरागता ही मोक्ष मार्ग का आधार है। जब व्यक्ति राग-द्वेष, क्रोध, लोभ और मोह का त्याग कर भगवान की आराधना करता है तो उसका मन निर्मल होता है और आत्मा का उत्थान होता है।उन्होंने कहा कि श्रावकों को प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय और भगवान की भक्ति अवश्य करनी चाहिए। यही साधना धीरे-धीरे आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है।
मोक्ष मार्ग के साथ धन-वैभव भी मिलता है
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जो व्यक्ति मोक्ष मार्ग को लक्ष्य बनाकर भगवान की आराधना करता है, उसके जीवन में धन, वैभव, सुख, समृद्धि और मानसिक शांति स्वतः आने लगती है।उन्होंने कहा कि भगवान से केवल भौतिक सुखों की कामना नहीं करनी चाहिए बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की भावना रखनी चाहिए। ऐसा करने से सांसारिक उपलब्धियां भी सहज रूप से प्राप्त होती हैं।
श्रीजी की शांतिधारा का सौभाग्य
धर्मसभा से पूर्व भगवान आदिनाथ का अभिषेक एवं श्रीजी की शांतिधारा संपन्न हुई।इस अवसर पर संगीत जैन एवं दिलीप जैन को श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के दर्शन कर धर्मलाभ लिया।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
धर्मसभा में ट्रस्ट के कार्याध्यक्ष डॉ. जैनेंद्र जैन, रमेशचंद जैन, राजेश जैन दद्दू, राकेश नायक, आलोक नेता, जिनेश जैन, डॉ. वी.सी. जैन, सुनील जैन (टारगेट), कमल टेलीफोन, सुरेश पड़ोसी, महेंद्र अतुल जैन (सुपाड़ी वाले) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे।सभी श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रेरणादायी प्रवचनों का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
मुनिश्री की आहारचर्या का सौभाग्य
धर्मसभा के पश्चात मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज की आहारचर्या कराने का सौभाग्य जितेंद्र देवरीवाला परिवार को प्राप्त हुआ। समाजजनों ने धर्मभावना के साथ आहारदान कर पुण्य अर्जित किया।
मोक्ष मार्ग का संदेश पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी
मुनिश्री ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि जीवन क्षणभंगुर है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय का सदुपयोग करते हुए धर्म, संयम, तप, स्वाध्याय और भगवान की भक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। यही मार्ग मनुष्य को आत्मिक शांति, सामाजिक सद्भाव और अंततः मोक्ष मार्ग तक पहुंचाता है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि प्रतिदिन कुछ समय धर्म साधना, पूजा-अर्चना एवं आत्मचिंतन के लिए अवश्य निकालें, क्योंकि यही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
