मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज Indore के श्री महावीर जिनालय संगम नगर में भव्य मंगल प्रवेश के दौरान कहा कि जो व्यक्ति सप्त व्यसन से दूर रहता है वही सच्चा श्रावक है। पढ़ें पूरी खबर।
मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज Indore
रिपोर्ट: सतीश जैन (इला बैंक), प्रचार प्रमुख, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, Indore।
Indore। आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज का श्री महावीर जिनालय, संगम नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर में प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ उनका स्वागत किया। मार्ग में अनेक स्थानों पर समाजजनों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी तथा जयघोष के साथ उनका अभिनंदन किया।
मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज Indore में बोले- सभी जीवों के प्रति रखें वात्सल्य
अपने मंगल प्रवचन में मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि सभी लोगों को आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। प्रत्येक जीव के प्रति वात्सल्य और क्षमा का भाव रखना ही सच्चा धर्म है।उन्होंने कहा कि समाज एक परिवार की तरह होता है। परिवार की तरह समाज में भी एक-दूसरे के दोष देखने के बजाय गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।मुनि श्री ने कहा कि—
“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।”
उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि जहां कहीं भी 28 मूल गुणों के धारी दिगंबर मुनिराज के दर्शन हों, वहां श्रद्धा से नमन अवश्य करें। यह मत देखें कि वे किस संघ से संबंधित हैं। संघ से अधिक महत्वपूर्ण उनकी चर्या, साधना और दिगंबर मुद्रा होती है। पंथवाद से दूर रहकर धर्म की मूल भावना को अपनाना चाहिए।
सच्चे श्रावक की पहचान बताई
अपने प्रवचन के दौरान मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि एक श्रेष्ठ श्रावक वही है जो मद्य, मांस और मधु का पूर्ण रूप से त्याग करता है।
उन्होंने कहा कि—
“जो व्यक्ति सप्त व्यसन में नहीं लगा, वही सच्चा श्रावक है।”
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संयम, सदाचार, अहिंसा और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
वृहद शांतिधारा का आयोजन
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि प्रातःकाल अभिषेक के पश्चात मुनि श्री के मुखाग्र बिंद से वृहद शांतिधारा का आयोजन हुआ।शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री पारस जी जैन तथा सतीश-अमित जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से—
- मनोज जैन
- सतीश जैन
- सुबोध कासलीवाल
- अमित जैन
- पीयूष जैन
- डॉ. प्रदीप बांझल
- संदीप जैन
- रमेशचंद जैन
- नानकचंद बांझल
- अभिषेक जैन
- संपत जैन
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन मौजूद रहे।
निष्कर्ष
मुनि श्री सम्बुद्ध सागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन के माध्यम से समाज को प्रेम, क्षमा, अहिंसा और संयम का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंथवाद से ऊपर उठकर धर्म की मूल भावना को अपनाना चाहिए तथा सप्त व्यसनों से दूर रहकर ही सच्चे श्रावक का जीवन जिया जा सकता है।
