Gadia परिवार द्वारा सुविधिनाथ परमात्मा मंदिर में मुख्य धर्म ध्वजा चढ़ाने का दो दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन
महिदपुर रोड स्थित सुविधिनाथ परमात्मा जैन मंदिर में आगामी दो दिनों तक एक भव्य धार्मिक आयोजन किया जा रहा है, जिसमें चतुर्थ ध्वजारोहण कार्यक्रम के साथ अनेक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इस आयोजन को लेकर जैन समाज में गहरा उत्साह देखा जा रहा है और क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया है और पूरे वातावरण में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का माहौल बना हुआ है।
श्रद्धालु इस आयोजन को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं और इसे धर्म लाभ का महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं। यह धार्मिक आयोजन परम पूज्य गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती साध्वी श्री सवेंगप्रिया श्री जी म.सा. आदि ठाणा 6 की मंगलकारी निश्रा में संपन्न किया जा रहा है। आयोजन के दौरान विभिन्न धार्मिक विधियों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न होंगे। कार्यक्रम को विधि-विधान और जैन परंपराओं के अनुसार भव्य और सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजकों और लाभार्थी परिवारों द्वारा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पहले दिन का कार्यक्रम और पूजन विधि
कार्यक्रम का शुभारंभ 1 जुलाई बुधवार को किया गया, जिसमें दोपहर 2 बजे से राजेंद्र सूरी अष्टप्रकारी पूजन का आयोजन रखा गया। इस पूजन में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भाग लिया और धार्मिक वातावरण में मंत्रोच्चारण एवं संस्कृत श्लोकों के माध्यम से पूजा-अर्चना संपन्न की गई।
इस पूजन का लाभ पूजनकला स्वर्गीय सुशीला एवं स्वर्गीय भेरूलाल चोरड़िया की स्मृति में अजय कुमार, आशीष कुमार, हितांश एवं अविश चोरड़िया परिवार द्वारा लिया गया। इस अवसर पर भक्ति गीतों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
दूसरे दिन होगा मुख्य ध्वजारोहण कार्यक्रम
मुख्य आयोजन 2 जुलाई गुरुवार को संपन्न होगा, जिसमें प्रातः 7:30 बजे स्नात्र पूजा तथा 8:30 बजे सप्तभेदी पूजा का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात 10:30 बजे मंदिर शिखर पर मुख्य धर्म ध्वजारोहण किया जाएगा।
ध्वजारोहण के बाद 11:45 बजे स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। यह आयोजन जैन परंपरा में सेवा और समर्पण का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

Gadia परिवार बने मुख्य लाभार्थी
इस वर्ष सुविधिनाथ परमात्मा के शिखर पर मुख्य धर्म ध्वजा चढ़ाने का लाभ गादिया परिवार को प्राप्त हुआ है। स्वर्गीय चंदरबाई एवं स्वर्गीय अमृतलाल गादिया की पुण्य स्मृति में यह धार्मिक कार्य संपन्न किया जा रहा है।
गादिया परिवार—रमेशचंद, वर्धमान, रिचिन, राज, अव्यान और आरव गादिया—इस आयोजन के मुख्य लाभार्थी हैं। परिवार द्वारा इस अवसर को अपने पूर्वजों की स्मृति में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया जा रहा है।
अन्य ध्वजारोहण लाभार्थी परिवार
कार्यक्रम में विभिन्न अन्य ध्वजारोहण लाभार्थी परिवार भी शामिल रहेंगे।
राजेंद्र सूरी जी की ध्वजा का लाभ रमेशचंद दिनेश जैन (बॉस) तथा राजेश कुमार, राहुल कुमार बोथरा परिवार द्वारा लिया जाएगा। वहीं पुण्य सम्राट की ध्वजा का लाभ अजय कुमार, आशीष कुमार, हितांश एवं अविश चोरड़िया परिवार द्वारा प्राप्त किया जाएगा।
इन सभी परिवारों के योगदान से पूरा आयोजन और अधिक भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप ले रहा है।
जैन समाज का संदेश और सहभागिता
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन जैन धर्म की परंपरा, श्रद्धा और सेवा भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ध्वजारोहण जैसे धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
आयोजन समिति ने सकल जैन श्री संघ से अनुरोध किया है कि वे सपरिवार इस मंगलकारी कार्यक्रम में उपस्थित होकर जिन शासन की शोभा को बढ़ाएं और धर्म लाभ प्राप्त करें।
आयोजन का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में ध्वजारोहण को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि, त्याग और भक्ति का संदेश देता है।
स्नात्र पूजा, सप्तभेदी पूजा और स्वामी वात्सल्य जैसे कार्यक्रम श्रद्धालुओं को धर्म से जोड़ते हैं और सेवा भाव को मजबूत करते हैं। इस प्रकार के आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का कार्य करते हैं।
समापन संदेश
यह दो दिवसीय धार्मिक आयोजन न केवल एक परंपरागत अनुष्ठान है, बल्कि जैन समाज की आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक भी है। सुविधिनाथ परमात्मा मंदिर में होने वाला यह चतुर्थ ध्वजारोहण कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का स्रोत बनेगा। गादिया परिवार द्वारा अपने पूर्वजों की स्मृति में लिया गया यह धार्मिक संकल्प समाज में सेवा, समर्पण और पुण्य कार्यों की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक भावनाएं मजबूत होती हैं, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना भी प्रबल होती है।
स्नात्र पूजा, सप्तभेदी पूजा और स्वामी वात्सल्य जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालु धर्म के गहरे मूल्यों से जुड़ते हैं और जीवन में संयम, करुणा तथा आत्मशुद्धि का संदेश ग्रहण करते हैं। आयोजन समिति और लाभार्थी परिवारों की संयुक्त पहल से यह कार्यक्रम और भी भव्य एवं सफल बन रहा है। समापन के साथ यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करेगा, जो उन्हें धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और समाज सेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।
