Indore में हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग गिरोह का भंडाफोड़, बिजली कंपनी के ED समेत कई लोग बने शिकार
Indore के बाणगंगा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे संगठित ब्लैकमेलिंग गिरोह का खुलासा किया है, जो अफसरों, कर्मचारियों और बिल्डरों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। इस गिरोह ने बिजली कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ED) शिवलाल करवाड़िया को भी अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये की वसूली की थी। पुलिस ने इस मामले में एक मीडियाकर्मी समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक महिला को भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया है।
कैसे सामने आया पूरा मामला
Indore पुलिस के अनुसार, पोलोग्राउंड क्षेत्र में रहने वाले कार्यपालक निदेशक शिवलाल करवाड़िया ने बाणगंगा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने अनवर खान, सिद्दीक खान, फारुख खान और साधना सिंह शक्तावत पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया कि आरोपितों ने उन्हें झूठे दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे की मांग की और दबाव बनाकर लाखों रुपये वसूल लिए।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया और सोमवार रात चंदननगर क्षेत्र से अनवर खान, सिद्दीक खान और फारुख खान को गिरफ्तार कर लिया। चौथी आरोपी साधना सिंह शक्तावत की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कैसे चलता था ब्लैकमेलिंग का खेल
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाता था। आरोप है कि गिरोह पहले किसी महिला के माध्यम से संपर्क स्थापित करता था, फिर बातचीत और मुलाकात के बाद झूठे आरोप लगाने की धमकी दी जाती थी। इसके बाद दुष्कर्म या छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की बात कहकर पीड़ितों से पैसे की मांग की जाती थी।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था और यह खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाता था जो सार्वजनिक पदों पर हैं या आर्थिक रूप से मजबूत हैं। गिरोह की गतिविधियों में एक मीडियाकर्मी की भूमिका भी सामने आई है, जो कथित रूप से भ्रामक खबरें प्रकाशित कर दबाव बनाता था।
ED से लेकर कर्मचारियों तक को बनाया निशाना
इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब जांच के दौरान बिजली कंपनी के आठ अन्य कर्मचारी भी सामने आए। इन कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें भी इसी गिरोह ने निशाना बनाया था। आरोप है कि महिला के माध्यम से संपर्क कर उन्हें भी झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और उनसे भी अलग-अलग समय पर रकम वसूली गई।
कुछ कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और नौकरी व सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने की धमकी दी गई। इसके बाद वे चुपचाप पैसे देने को मजबूर हो गए।
मीडियाकर्मी की भूमिका पर सवाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित अनवर खान स्वयं को एक अखबार का संपादक बताता था। उस पर आरोप है कि उसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कई लोगों पर दबाव बनाया और भ्रामक खबरें प्रकाशित कर उन्हें बदनाम करने की धमकी दी।
एसीपी रुबिना मिजवानी के अनुसार, अनवर खान ने साधना सिंह शक्तावत के साथ मिलकर पीड़ितों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी और उनसे जून 2024 से फरवरी 2026 के बीच करीब दो लाख रुपये तक की वसूली की। जब पीड़ित ने दोबारा पैसे देने से इनकार किया, तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अन्य मामलों से भी जुड़े तार
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पहले भी कई मामलों में सक्रिय रहा है। एक अन्य मामले में इसी महिला की मदद से बिल्डर कविंद्र गांधी को भी ब्लैकमेल करने की बात सामने आई है, जिस पर पहले से ही मामला दर्ज है।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहा था और इसके तार शहर के अन्य क्षेत्रों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संभावित पीड़ितों से भी संपर्क किया जा रहा है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
बाणगंगा थाना पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है और उनके बैंक खातों, कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला गंभीर संगठित अपराध की श्रेणी में आता है और इसके सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
निष्कर्ष
Indore का यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ लोग झूठे मामलों और डर का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से वसूली कर रहे थे। पुलिस की सतर्कता से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन जांच अभी जारी है और कई बड़े खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।
