आचार्य विद्यासागर जी का 58वां दीक्षा दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। राष्ट्र गौरव पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ पत्रकार कोटा द्वारा गुरुदेव को समर्पित भावपूर्ण काव्यांजलि प्रस्तुत की गई। पढ़ें पूरी खबर।
आचार्य विद्यासागर जी का 58वां दीक्षा दिवस: भावपूर्ण काव्यांजलि से गूंजा गुरु वंदन
आचार्य विद्यासागर जी का 58वां दीक्षा दिवस
आचार्य विद्यासागर जी का 58वां दीक्षा दिवस देशभर में श्रद्धा, भक्ति और गुरु वंदना के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने परम पूज्य संतशिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के श्रीचरणों में कोटिशः नमोस्तु अर्पित करते हुए उनके त्याग, तपस्या, संयम और आध्यात्मिक जीवन को नमन किया।इस अवसर पर राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार, कोटा (राजस्थान) ने गुरुदेव को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण काव्य रचना प्रस्तुत की, जिसने श्रद्धालुओं के हृदय को भावविभोर कर दिया।
गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटिशः नमोस्तु
परम पूज्य संतशिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के 58वें दीक्षा दिवस पर देशभर के जैन समाज में विशेष पूजन, गुरु वंदना, अभिषेक, प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के त्यागमय जीवन को याद करते हुए उनके द्वारा दिए गए संयम, सदाचार, आत्मकल्याण और अहिंसा के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” की विशेष काव्य प्रस्तुति
इस अवसर पर राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार, कोटा (राजस्थान) द्वारा गुरुदेव को समर्पित यह भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया गया—
तर्ज : जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करे…
जहां त्याग तपस्या संयम शील की बहती निर्मल धारा
वो विद्यागुरु हमारा।पिता श्री मलप्पा जी और मात श्रीजी के दुलारे
बचपन से विद्यासागर ने श्री जिनवचन उच्चारे।
लिया तरुणाई में ब्रह्मचर्य व्रत, है यह कितना न्यारा,
वो विद्यागुरु हमारा।
संसार, शरीर और भोगों से जिसने है नेह हटाया,
गुरु ज्ञानसागर जी से विद्यासागर जी नाम पाया।
चल दिए छोड़ घर-बार सभी, मुक्ति का पथ अपनाया,
वो विद्यागुरु हमारा।
जो लोभ, मोह और माया से नित ही दूर रहते,
जीवादि प्रयोजन तत्वों पर नित-नित चिंतन करते।
जिनकी वाणी ने भेदज्ञान का अमृत कलश बिखेरा,
वो विद्यागुरु हमारा।
श्री महावीर स्वामी के आप लगते थे लघुनन्दन,
इस पंचकाल में बाँट रहे थे कुन्द-कुन्द का कुन्दन।
जितने भी शिष्य हुए जगती में, उनको वचन न्यारा,
वो विद्यागुरु हमारा।
जिनके सम्मुख उपमा छोटी से छोटी होती जाए,
वो मंद मुस्कान सदा चेहरे पर खिलती आए।
“पार्श्वमणि” हम जिनका करते हैं नित वंदन बारम्बारा,
वो विद्यागुरु हमारा।
आचार्य विद्यासागर जी का प्रेरणादायी जीवन
आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन संयम, तप, त्याग, ब्रह्मचर्य, स्वाध्याय और धर्म साधना को समर्पित किया।उन्होंने लाखों लोगों को नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, गौ संरक्षण, शिक्षा, संस्कार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।उनके मार्गदर्शन में अनेक संतों ने दीक्षा लेकर जैन धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाया।
जैन समाज में दीक्षा दिवस का महत्व
दीक्षा दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक जागरण का पर्व माना जाता है।आचार्य विद्यासागर जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।उनके विचार समाज को सत्य, अहिंसा, करुणा और आत्मविकास का मार्ग दिखाते हैं।
श्रद्धालुओं ने किया गुरु वंदन
58वें दीक्षा दिवस पर देशभर के मंदिरों, जिनालयों एवं धार्मिक संस्थानों में विशेष पूजन, अभिषेक, गुरु वंदना, प्रवचन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए गए।श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए उनके चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
प्रस्तुति
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”
पत्रकार, कोटा (राजस्थान)
मोबाइल: 9414764980

