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मेनका गांधी जैन समाज कानूनी नोटिस: दिगंबर जैन संतों पर विवादित बयान के बाद 7 दिन का लीगल नोटिस, माफी नहीं मांगी तो होगी बड़ी कानूनी कार्रवाई

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Published On: 30 June 2026
Indore
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मेनका गांधी जैन समाज कानूनी नोटिस मामले में इंदौर के जैन समाज ने दिगंबर जैन संतों पर दिए गए कथित विवादित बयान को लेकर कानूनी नोटिस भेजा है। 7 दिन में सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग की गई है। जानिए पूरा मामला।

मेनका गांधी जैन समाज कानूनी नोटिस: दिगंबर जैन संतों पर विवादित बयान के बाद 7 दिन में माफी की मांग, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई

इंदौर | राजेश जैन दद्दू

पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान पर जैन समाज ने कड़ा कानूनी रुख अपनाया है। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि मेनका गांधी ने सार्वजनिक मंच से यह कहा कि “जैन संत मोरों की हत्या कर उनके पंखों से पिच्छी बनाते हैं।” इस बयान को जैन समाज ने असत्य, निराधार, भ्रामक तथा धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड कानूनी नोटिस भेजा है।

क्या है पूरा मामला?

इंदौर में जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें विधिक नोटिस भेजा है। समाज का कहना है कि दिगंबर जैन संतों पर लगाया गया आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है और इससे करोड़ों जैन अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।समाज का कहना है कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” है। ऐसे में किसी भी जीव की हत्या का प्रश्न ही नहीं उठता। दिगंबर जैन संत जिस पिच्छी का उपयोग करते हैं, वह प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोर पंखों से बनाई जाती है।

किन धाराओं के तहत भेजा गया नोटिस?

जैन समाज की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में निम्न धाराओं का उल्लेख किया गया है—

1. IPC धारा 295A

धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के आरोप में।

2. IPC धारा 499 एवं 500

मानहानि के तहत, क्योंकि कथित बयान से जैन धर्म, जैन संतों तथा पूरे समाज की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचने का आरोप लगाया गया है।

3. आईटी एक्ट की धारा 66E एवं 67

यदि कथित बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित या वायरल हुआ है तो आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

नोट: कानूनी धाराओं की वास्तविक लागू स्थिति और न्यायिक परीक्षण संबंधित जांच एवं अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

नोटिस में रखी गई प्रमुख मांगें

जैन समाज की ओर से भेजे गए नोटिस में निम्न मांगें रखी गई हैं—

  • सात दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
  • विवादित बयान तत्काल वापस लिया जाए।
  • भविष्य में इस प्रकार के भ्रामक एवं धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान न दिए जाएं।
  • निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आपराधिक एवं सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

जैन समाज का पक्ष

जैन समाज के वरिष्ठ समाज पदाधिकारी डॉ. जैनेन्द्र जैन, मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू, टी.के. वेद, हंसमुख गांधी, आनंद नवीन गोधा तथा महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि दिगंबर जैन संतों पर इस प्रकार का आरोप न केवल असत्य है बल्कि करोड़ों जैन अनुयायियों की धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार है।समाज के अनुसार, जैन धर्म सदियों से अहिंसा, करुणा और जीव दया का संदेश देता आया है। ऐसे में संतों पर हिंसा का आरोप लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं भ्रामक है।

notice-to-ManekaGandhi.pdf

राजेश जैन दद्दू ने क्या कहा?

समाजसेवी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कानूनी नोटिस अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है तो जैन समाज आगे कानूनी कार्रवाई करेगा।

मयंक जैन का बयान

मयंक जैन ने कहा कि जैन धर्म में किसी भी जीव की हत्या पूर्णतः निषिद्ध है। दिगंबर मुनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पिच्छी प्राकृतिक रूप से गिरे हुए मोर पंखों से बनाई जाती है।उन्होंने कहा कि “15 लाख मोरों की हत्या” जैसा आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है और इससे समाज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

नोटिस भेजने वाले

नोटिस प्रेषक

मयंक जैन
पिता – अशोक जैन

पता – 38, वर्धमान नगर

मोबाइल – 8976729663

अभिभावक नियुक्त

महेंद्र जैन

पिता – विजय जैन

निवासी – शिवपुरी (मध्य प्रदेश)

विश्व जैन संगठन का भी समर्थन

विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस कानूनी पहल का समर्थन किया है।संगठनों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं के संबंध में बिना प्रमाण के दिए गए सार्वजनिक बयान समाज में भ्रम फैलाते हैं और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे क्या होगा?

यदि निर्धारित सात दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी या संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो जैन समाज की ओर से संबंधित न्यायालय में आपराधिक एवं सिविल मानहानि संबंधी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।हालांकि, इस मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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