पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री विधानाचार्य: जैन धर्म सेवा का समर्पित जीवन, 47 उपाधियों से सम्मानित हुए महान विद्वान
केकड़ी (राजस्थान)।
पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री विधानाचार्य आज जैन समाज के उन प्रतिष्ठित विद्वानों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन जैन धर्म, संस्कृति और साहित्य की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उत्तरप्रदेश के ललितपुर-झांसी जिले के नादेल बानपुर ग्राम में वैद्य श्री भरोसेलाल जैन एवं माता श्रीमती छोटी बाई जैन के घर जन्मे शास्त्री जी बचपन से ही सरल स्वभाव, मधुर वाणी और धार्मिक संस्कारों से ओतप्रोत रहे हैं।सात भाइयों और एक बहन के परिवार में पले-बढ़े पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री ने प्रारम्भ से ही धर्म अध्ययन को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। उन्होंने श्री दिगम्बर जैन गणेश प्रसाद वर्णी संस्कृत महाविद्यालय, सिद्धक्षेत्र आहारजी (टीकमगढ़, मध्यप्रदेश) से अध्ययन कर जैन आगम, सिद्धान्त, तत्वज्ञान तथा विधि-विधान में गहन दक्षता प्राप्त की।
36 वर्षों से जैन धर्म की अखंड सेवा
पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री विधानाचार्य पिछले 36 वर्षों से देशभर में श्री मंडल विधान, सहस्रनाम महामंडल विधान, पंचकल्याणक महोत्सव, महाआरती एवं अनेक धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन कर रहे हैं।उनकी ओजस्वी एवं प्रभावशाली वाणी श्रोताओं को जैन धर्म के सिद्धांतों से जोड़ने का कार्य करती है। वे जटिल दार्शनिक विषयों को अत्यंत सरल भाषा में समझाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।
प्रतिष्ठित “विधानाचार्य” उपाधि से सम्मानित
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवराय पाटन में भारत गौरव परम पूज्य गणिनी आर्यिका गुरु माँ स्वस्तिभूषण माता ससंघ के पावन सानिध्य में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि परिषद् द्वारा पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री को प्रतिष्ठित “विधानाचार्य” उपाधि से सम्मानित किया गया।यह सम्मान परिषद् अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन द्वारा प्रदान किया गया।परिषद् ने प्रमाणित किया कि शास्त्री जी ने विधि-विधान के विभिन्न पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ-साथ 36 वर्षों का व्यावहारिक अनुभव अर्जित किया है।
47 उपाधियों से विभूषित
संपूर्ण भारत में आयोजित विभिन्न धार्मिक आयोजनों एवं विधानों के माध्यम से पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री विधानाचार्य को अब तक 47 प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।उनियारा में उन्हें “आध्यात्मिक पाणिनि” की उपाधि भी प्रदान की जा चुकी है।
विदेशों में भी किया जैन धर्म का प्रचार
पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री ने भारत ही नहीं बल्कि
- अमेरिका
- चीन
- बैंकॉक
- नेपाल
- भूटान
- थाईलैंड
- दुबई
जैसे देशों में भी जैन धर्म के बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन, विधान एवं पंचकल्याणक सफलतापूर्वक सम्पन्न कराए हैं।
ज्योतिष, योग एवं वास्तु के भी विशेषज्ञ
धर्मशास्त्रों के साथ-साथ शास्त्री जी ज्योतिष, योग एवं वास्तुशास्त्र के भी विद्वान माने जाते हैं। वे मंदिर, घर एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों के वास्तुदोषों के साथ-साथ योग के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं के समाधान का मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।
केकड़ी में 34 वर्षों से धर्म प्रभावना
पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री पिछले 34 वर्षों से राजस्थान के केकड़ी में निवास कर रहे हैं और लगातार देशभर में धर्म प्रभावना का कार्य कर रहे हैं। उनके स्नेह, सरलता और आत्मीय व्यवहार के कारण जो भी व्यक्ति एक बार उनके संपर्क में आता है, वह जीवनभर उन्हें स्मरण रखता है।
पत्रकार पारस जैन “पार्श्वमणि” ने दी जानकारी
विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार कोटा (राजस्थान) ने बताया कि पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री का सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा, धार्मिक जागरण और जैन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित रहा है।उन्होंने कहा कि उन्हें सपरिवार शास्त्री जी के घर जाने का सौभाग्य मिला, जहाँ मिले आत्मीय स्नेह, वात्सल्य और आतिथ्य को वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने वीर प्रभु से प्रार्थना की कि शास्त्री जी एवं उनका परिवार सदैव स्वस्थ, सुखी एवं धर्म सेवा में अग्रसर रहे।
निष्कर्ष
पं. देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री विधानाचार्य केवल एक विद्वान शास्त्री ही नहीं बल्कि जैन धर्म के ऐसे समर्पित साधक हैं जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति, समाज सेवा एवं आध्यात्मिक जागरण को समर्पित किया है। “विधानाचार्य” जैसी प्रतिष्ठित उपाधि उनके दीर्घकालीन योगदान, विद्वता एवं निःस्वार्थ सेवा का राष्ट्रीय सम्मान है। उनके व्यक्तित्व से नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार, सेवा और समर्पण की प्रेरणा मिलती रहेगी।
रिपोर्ट
प्रस्तुति : राष्ट्रगौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार, कोटा (राजस्थान)
मो.: 9414764980


