थांदला मंगल प्रवेश के अवसर पर पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी, पूज्य श्री पावनमुनिजी एवं पूज्य श्री जिनांशमुनिजी का भव्य स्वागत हुआ। धर्मसभा में मुनिश्री ने सुख-दुःख, धर्म, संयम और मोक्ष का गहन संदेश दिया। पढ़ें पूरी खबर।
थांदला मंगल प्रवेश: धर्म नगरी में गूंजे जिन शासन के जयकारे
थांदला मंगल प्रवेश के पावन अवसर पर धर्म नगरी थांदला एक बार फिर जिन शासन के जयघोष से गुंजायमान हो उठी। जैनाचार्य पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी महाराज के अंतेवासी शिष्य पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी महाराज, रत्नपुरी गौरव पूज्य श्री पावनमुनिजी महाराज तथा थांदला गौरव पूज्य श्री जिनांशमुनिजी महाराज का नगर में अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मंगल प्रवेश कराया गया।पूज्या महासती श्री निखिलशीलाजी महाराजसा के निर्देशन में पूज्या श्री प्रियशीलाजी महाराजसा एवं पूज्या श्री दीप्तिश्रीजी महाराजसा सहित थांदला श्रीसंघ के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पेटलावद मार्ग पर पहुंचे, जहां संतों की अगवानी की गई। महापुरुषों के जयकारों और मंगल गीतों के बीच भव्य शोभायात्रा के रूप में संतों का नगर प्रवेश सम्पन्न हुआ।
धर्मसभा में दिया जीवन बदलने वाला संदेश
मंगल प्रवेश एवं पक्खी पर्व के पावन अवसर पर स्थानीय पौषध भवन में विशाल धर्मसभा आयोजित की गई।सभा को संबोधित करते हुए पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी महाराज ने कहा—
“जो सुख भविष्य में दुःख का कारण बने, वह वास्तव में अमंगल ही है।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर सांसारिक सुखों को ही वास्तविक सुख समझ लेता है, जबकि जिन सुखों के पीछे पाप, मोह और कषाय छिपे हों, वे अंततः दुःख का कारण बनते हैं।मुनिश्री ने अनेक दृष्टांतों एवं स्तवनों के माध्यम से स्पष्ट किया कि पाप रहित धर्म ही वास्तविक सुख का मार्ग है।
धर्म ही देता है वास्तविक सुख
पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी ने कहा कि जीव जब अनुत्तर श्रद्धा के साथ स्वयं पर अनुकम्पा करता है और पापों से विमुख होता है, तभी वह मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है।उन्होंने कहा कि असंयमी जीव की प्रत्येक प्रवृत्ति विषय-विकार, कषाय और विकथाओं को बढ़ाने वाली होती है, जो अंततः उसे दुःख ही देती है।
धन की भूख नहीं, धर्म की भूख आवश्यक
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि आज अधिकांश समस्याओं का मूल कारण धन की अंधी दौड़ है।उन्होंने कहा—
“जब व्यक्ति में पापभीरुता आती है और धर्म के प्रति अनुत्तर श्रद्धा जागती है, तब उसके भीतर धर्म की भूख पैदा होती है और वही उसे वास्तविक सुख प्रदान करती है।”
मनुष्य जन्म दुर्लभ अवसर
प्रवचन के दौरान पूज्यश्री ने मनुष्य जन्म की दुर्लभता बताते हुए कहा कि चारों गतियों में केवल मनुष्य ही ऐसा भव है, जहां आत्मा अनुत्तर श्रद्धा प्राप्त कर उसे आचरण में परिवर्तित कर सकती है।
पूज्य श्री जिनांशमुनिजी बोले— संसार में सुख नहीं
धर्मसभा की शुरुआत में थांदला गौरव पूज्य श्री जिनांशमुनिजी महाराज ने कहा—
“इस पंचम आरे में सुख की कल्पना करना ही सबसे बड़ी मूर्खता है।”
उन्होंने उपस्थित युवा एवं प्रौढ़ श्रावक-श्राविकाओं से प्रश्न किया कि संसार का कोई एक ऐसा प्रसंग बताइए जिसे पूर्ण सुख कहा जा सके।उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति इसका उत्तर नहीं दे सका क्योंकि संसार में वास्तविक सुख है ही नहीं।इसके विपरीत उन्होंने कहा कि संयम जीवन में उन्हें अनगिनत सुखद अनुभव प्राप्त हुए हैं।
सांसारिक रिश्तों पर भी रखे विचार
पूज्य श्री जिनांशमुनिजी ने वर्तमान समाज में टूटते रिश्तों एवं समाप्त होती इंसानियत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज स्वार्थ ने संबंधों की पवित्रता को कमजोर कर दिया है।
अगला वर्षावास गुजरात के लिमखेड़ा में
धर्मदासगण नायक पूज्य प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी महाराज की आज्ञा के अनुसार पूज्य श्री चंद्रेशमुनिजी महाराज सहित समस्त संतों का आगामी वर्षावास गुजरात के लिमखेड़ा में होगा।यह पूज्य गुरुदेव का पहला स्वतंत्र वर्षावास होगा तथा उनका गृह नगर भी है।
तपस्वियों ने ग्रहण किए प्रत्याख्यान
संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं पवन नाहर ने जानकारी देते हुए बताया कि पक्खी पर्व के अवसर पर पक्खी मंडल के आराधकों सहित नगर में चल रहे सामूहिक वर्षीतप आराधकों एवं अन्य तपस्वियों ने पूज्य गुरुदेव से उपवास, आयम्बिल, निवि, एकासन आदि तपों के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
संघ सचिव हितेश शाह ने की स्थिरता की विनती
धर्मसभा का संचालन करते हुए संघ सचिव हितेश शाह ने पूज्य गुरुदेव के पूर्व वर्षावास की स्मृतियों को साझा किया तथा उनके उपकारों का स्मरण करते हुए कुछ दिनों तक थांदला में स्थिरता प्रदान करने का विनम्र अनुरोध किया।
