MP शिक्षकों के स्वैच्छिक स्थानांतरण पर बड़ा अपडेट: 28 से 30 जून के बीच जारी होंगे आदेश, कई होंगे प्रक्रिया से बाहर
MP के स्कूल शिक्षा विभाग में स्वैच्छिक स्थानांतरण (वॉलंटरी ट्रांसफर) प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। विभाग द्वारा जारी नई तबादला नीति के तहत इस बार कई कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिसके कारण कुछ शिक्षकों को इस प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल पाएगा। स्थानांतरण संबंधी आदेश 28 से 30 जून के बीच जारी किए जाने की तैयारी है।
आवेदन प्रक्रिया पूरी, अब आदेश जारी करने की तैयारी
लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब विभाग जिला और संकुल स्तर पर प्राप्त आवेदनों की जांच कर रहा है। सभी पात्र शिक्षकों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर कार्रवाई करते हुए अंतिम आदेश जल्द जारी किए जाएंगे।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि स्थानांतरण आदेश 28 जून से 30 जून के बीच कभी भी जारी हो सकते हैं।
नई तबादला नीति में ई-अटेंडेंस अनिवार्य
नई स्थानांतरण नीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार ई-अटेंडेंस (डिजिटल उपस्थिति) को बनाया गया है। इस नियम के अनुसार केवल वही शिक्षक स्थानांतरण के पात्र होंगे, जिनकी उपस्थिति 90 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई है।
यदि किसी शिक्षक की ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम है, तो उसे इस बार की स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। इस निर्णय के चलते बड़ी संख्या में शिक्षक पात्रता से बाहर हो सकते हैं।
अप्रैल 2026 तक की उपस्थिति होगी आधार
विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के लिए अप्रैल 2026 तक की ई-अटेंडेंस को आधार माना जाएगा। मई और जून के शुरुआती दिनों में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहने के कारण इन महीनों को गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संबंधित शिक्षकों का उपस्थिति डेटा समय पर संकलित करें और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
जनगणना ड्यूटी वाले शिक्षकों पर रोक
इस बार स्थानांतरण प्रक्रिया में एक और बड़ा नियम लागू किया गया है। जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, उन्हें फिलहाल स्थानांतरण का लाभ नहीं मिलेगा।
लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के आदेश के अनुसार ऐसे शिक्षक फरवरी 2027 तक स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं होंगे। यह नियम उन सभी शिक्षकों पर लागू होगा जो वर्तमान में जनगणना कार्य में नियुक्त हैं।
कारण और प्रशासनिक व्यवस्था
विभाग का कहना है कि जनगणना कार्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समयबद्ध सरकारी जिम्मेदारी है, जिसे प्रभावित होने से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। यदि ऐसे शिक्षकों को स्थानांतरण की अनुमति दी जाती है, तो जनगणना कार्य की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को फिलहाल स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। हालांकि, कार्य पूरा होने के बाद उनके मामलों पर अलग से निर्णय लिया जा सकता है।
नई नीति के कारण कम हुए आवेदन
नई तबादला नीति में कई सख्त प्रावधानों के चलते इस वर्ष स्थानांतरण के लिए आवेदन संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही है। विशेष रूप से ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और कड़े पात्रता मानदंडों के कारण कई शिक्षक आवेदन करने से पीछे हट गए।
शिक्षक संगठनों के अनुसार नई नीति ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया है, लेकिन कुछ नियमों को लेकर असंतोष भी देखा जा रहा है।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया
नई नीति को लेकर शिक्षकों के एक वर्ग में असंतोष की स्थिति भी बनी हुई है। खासतौर पर ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत की अनिवार्यता और जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को बाहर रखने के निर्णय पर कई शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि इससे कई योग्य शिक्षक भी स्थानांतरण से वंचित रह जाएंगे। हालांकि विभाग का तर्क है कि यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था और कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, MP स्कूल शिक्षा विभाग की यह नई स्थानांतरण नीति पारदर्शिता और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि इसके कुछ प्रावधानों को लेकर विवाद भी सामने आ रहा है।
28 से 30 जून के बीच जारी होने वाले स्थानांतरण आदेशों पर अब सभी शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इन्हीं आदेशों से तय होगा कि किन्हें नई पदस्थापना मिलेगी और किन्हें इस बार इंतजार करना होगा।
