MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट अंतिम चरण में, रिपोर्ट दो हिस्सों में होगी तैयार
MP में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में काम तेज हो गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति अब विधेयक के ड्राफ्ट और अंतिम रिपोर्ट को तैयार करने के अंतिम चरण में पहुंच गई है। समिति की हालिया बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें अब तक प्राप्त सुझावों और प्रस्तावित प्रारूप पर विस्तार से चर्चा की गई।
दो भागों में तैयार होगी UCC रिपोर्ट
समिति ने स्पष्ट किया है कि अंतिम रिपोर्ट को दो हिस्सों में विभाजित किया जाएगा।
पहले भाग में समिति की अनुशंसाएं (recommendations) शामिल होंगी, जबकि दूसरे भाग में पूरे जन परामर्श (public consultation) का विस्तृत ब्योरा दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार यह प्रारूप इसलिए अपनाया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता की राय को भी विधेयक में उचित स्थान मिल सके।
ड्राफ्टिंग अंतिम चरण में पहुंची
भोपाल से जुड़े राज्य ब्यूरो के अनुसार UCC लागू करने को लेकर गठित समिति का कार्य अब लगभग पूरा होने की ओर है। समिति सदस्य सचिव अजय कटेसरिया ने जानकारी दी कि ड्राफ्टिंग का कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
नई दिल्ली में हुई बैठक में अब तक मिले सुझावों और विधेयक के प्रारूप पर विस्तार से विचार किया गया। समिति के वरिष्ठ सदस्यों और सलाहकारों ने विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की।
लिव-इन, विवाह और उत्तराधिकार पर चर्चा
बैठक के दौरान UCC के तहत आने वाले प्रमुख विषयों पर भी विचार किया गया। इनमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार समिति ने लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने जैसे प्रावधानों पर भी विचार किया है। इसके अलावा मतांतरित व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाने और आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखने जैसे सुझावों पर भी चर्चा हुई है।
जन परामर्श में मिले 9.5 लाख से अधिक सुझाव
समिति को जन परामर्श के दौरान भारी संख्या में सुझाव प्राप्त हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 9.5 लाख से अधिक ऑनलाइन सुझाव मिल चुके हैं।
इनमें लगभग 49 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी UCC के पक्ष में राय दी है। वहीं, 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है, जो समिति के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर मिले सुझाव यह दर्शाते हैं कि समाज में इस विषय पर व्यापक चर्चा और रुचि है।
आदिवासी समुदाय पर विशेष विचार
बैठक में यह भी चर्चा का विषय रहा कि आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा जाए या नहीं। कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए।
हालांकि, कुछ अन्य सदस्यों ने सुझाव दिया कि समानता के सिद्धांत के आधार पर सभी नागरिकों को एक समान कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर मंथन
समिति ने यह भी सुनिश्चित किया है कि UCC का ड्राफ्ट तैयार करते समय कानूनी मजबूती के साथ-साथ सामाजिक संतुलन भी बना रहे।
विभिन्न समुदायों की परंपराओं, व्यक्तिगत कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ
इस महत्वपूर्ण बैठक में समिति के सदस्य अनूप नायर, गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर सहित वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह मौजूद रहे। सभी सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए और ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।
जल्द जारी हो सकती है अंतिम रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, समिति का काम अब लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में अगला बड़ा कदम उठाया जाएगा।
निष्कर्ष
MP में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट अंतिम चरण में पहुंचना राज्य की नीतिगत दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतिम रिपोर्ट में किन सिफारिशों को शामिल किया जाता है और UCC के लागू होने से राज्य की सामाजिक और कानूनी संरचना में क्या बदलाव आते हैं।
