मेनका गांधी मानहानि नोटिस: जैन संतों की पिच्छी को लेकर दिए गए बयान पर विश्व जैन संगठन सहित कई संस्थाओं ने मेनका गांधी को 1 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा। 15 दिन में माफी नहीं मांगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी।
जैन संतों पर अभद्र टिप्पणी का मामला: मेनका गांधी को 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू | इंदौर
पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा जैन संस्कृति एवं जैन संतों के परम पवित्र धार्मिक उपकरण पिच्छी (मोरपंख से निर्मित) को लेकर दिए गए कथित बयान के विरोध में देशभर के जैन समाज ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस बयान से भारत सहित विदेशों में निवास करने वाले करोड़ों जैन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं।उन्होंने कहा कि मेनका गांधी का बयान अत्यंत गैर-जिम्मेदार, भ्रामक, असत्य, मनगढ़ंत और अमर्यादित है, जो जैन धर्म की मूल भावना और अहिंसा के सिद्धांतों के विपरीत है।
10 पृष्ठ का कानूनी नोटिस भेजा गया
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 23 जून को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता निपुण जैन के माध्यम से भारत वर्षीय सकल दिगंबर जैन समाज, जैन युवा संगठन, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ तथा श्री णमोकार महामंत्र समिति सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं की ओर से मेनका गांधी को 10 पृष्ठ का विस्तृत कानूनी (लीगल) नोटिस भेजा गया है।
क्या था मेनका गांधी का बयान
विधिक नोटिस के अनुसार, हाल ही में दिगंबर जैन संत आचार्य श्री सौरभ सागर महाराज के दिल्ली प्रवास के दौरान मेनका गांधी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि जैन समाज लाखों मोरों की हत्या कर उनके पंखों से पिच्छी तैयार करता है। उन्होंने लगभग 15 लाख मोरों की हत्या का दावा किया था।जैन समाज का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह असत्य, निराधार, तथ्यहीन एवं मनगढ़ंत है तथा इससे करोड़ों जैन समाजजनों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
जैन धर्म का मूल सिद्धांत है अहिंसा
राजेश जैन दद्दू ने कहा कि संपूर्ण विश्व जानता है कि जैन धर्म की आधारशिला “अहिंसा परमो धर्मः” तथा “जियो और जीने दो” के सिद्धांत पर आधारित है। जैन साधु-संत सूक्ष्म से सूक्ष्म जीव की रक्षा का संकल्प लेकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसा बयान जैन धर्म और उसकी परंपराओं के प्रति गंभीर अज्ञानता को दर्शाता है।
डॉ. जैनेन्द्र जैन ने रखा पक्ष
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि यह सर्वविदित एवं शाश्वत सत्य है कि जैन मुनियों की पिच्छी जिन मोरपंखों से बनाई जाती है, वे मोरों द्वारा प्राकृतिक रूप से समय-समय पर स्वयं झाड़े गए पंख होते हैं।उन्होंने कहा कि जैन धर्म में किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना या उसकी हत्या करना पूर्णतः निषिद्ध है। बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन, विधिक आधार अथवा प्रमाण के इस प्रकार का आरोप लगाना केवल भ्रम फैलाने और जैन समाज की सामाजिक एवं धार्मिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है।
एक करोड़ रुपये की मानहानि का दावा
समाज की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में 1 करोड़ रुपये की मानहानि एवं क्षतिपूर्ति का दावा किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह राशि प्राप्त होती है तो इसका उपयोग किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया जाएगा, बल्कि राष्ट्रहित, जीव-दया, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण, पक्षी संरक्षण, अहिंसा प्रचार, गौ-सेवा तथा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में किया जाएगा।
15 दिन में मांगी गई सार्वजनिक माफी
कानूनी नोटिस में मेनका गांधी से निम्न मांगें की गई हैं—
- 15 दिनों के भीतर अपने बयान को बिना शर्त वापस लें।
- राष्ट्रीय समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक रूप से लिखित एवं वीडियो संदेश जारी कर जैन समाज और जैन संतों से माफी मांगें।
- अपने आरोपों को असत्य, निराधार, मनगढ़ंत एवं तथ्यहीन स्वीकार करते हुए सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करें।
नहीं मानी मांग तो होगी कानूनी कार्रवाई
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया गया तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की संबंधित धाराओं के तहत धार्मिक भावनाएं आहत करने, विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने, मानहानि तथा लोकशांति भंग करने के आरोपों में सक्षम न्यायालय में दीवानी एवं आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
देशभर में विरोध तेज
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि नोटिस भेजे जाने के बाद देशभर का जैन समाज एकजुट होकर मेनका गांधी के कथित बयान का विरोध कर रहा है। सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक मंचों पर इस बयान की कड़ी आलोचना की जा रही है।
